फर्जी वेबसाइट बनाने से पहले पकड़ा गया मास्टर माइंड

Kajal Kiran Kashyap

Publish: Oct, 19 2016 12:56:00 (IST)

Bilaspur, Chhattisgarh, India
फर्जी वेबसाइट बनाने से पहले पकड़ा गया मास्टर माइंड

प्राक्सी सर्वर का उपयोग करके उसने खुद को यम ब्रांड का प्रोपराइटर बताकर वेबसाइट बनाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी थी।

बिलासपुर. उत्तरप्रदेश के सहारनपुर से पकड़े गए दिल्ली के ठग गिरोह के मास्टरमाइंड रमनप्रीत ने मल्टीनेशनल कंपनी यम ब्रांड की फर्जी वेबसाइट बनाने  की पूरी तैयारी कर ली थी। उसने कंपनी का प्रोपराइटर बनकर देश के अन्य फर्म संचालकों से ठगी करने की योजना बनाई थी। लेकिन इससे पहले ही सिविल लाइन पुलिस ने गिरफ्त में ले लिया। पुलिस की जांच में आरोपी के कम्प्यूटर और उससे पूछताछ में यह खुलासा हुआ। साइबर एक्सपर्ट एसआई प्रभाकर तिवारी ने बताया कि मैसर्स प्राइड इंटरनेशन फर्म के संचालक  भावेश पुजारा और संजय यादव से 80 लाख रुपए की ठगी करने वाले गिरोह के मास्टरमाइंड रमनप्रीत सिंह ने  प्रॉक्सी सर्वर का उपयोग करके मल्टरनेशनल कंपनी यम ब्रांड के डोमेन नेम को यूजर नेम में बदल दिया।

 उसने उक्त कंपनी के नाम से फर्जी मेल आईडी बनाई थी। इसका उपयोग करके उसने संजय और भावेश से रकम जमा कराई थी। इसके बाद और लोगों को ठगने के लिए वह यम ब्रांड की फर्जी वेबसाइट बनाने की तैयारी कर रहा था। प्राक्सी सर्वर का उपयोग करके उसने खुद को यम ब्रांड का प्रोपराइटर बताकर वेबसाइट बनाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी थी। इसी बीच टीम ने उसे सहारनपुर से गिरफ्तार कर लिया गया। उसके पास से जब्त किए गए कम्प्यूटर में फर्जी वेबसाइट बनाने के सबूत मिले हैं। पूछताछ में आरोपी ने फर्जी वेबसाइट बनाने के लिए काम शुरू करना स्वीकार किया है।

सत्यता की जांच करने उपयोग करें यूआरएल

साइबर एक्सपर्ट ने बताया कि  किसी भी मल्टीनेशनल कंपनी या इंटरनेशनल कंपनी की वेबसाइट पर जाने से पहले यूआरएल (यूनिवर्सल रिसोर्स लोकेटर) का उपयोग करना चाहिए। यदि कंपनी असली है तो वह नेट पर सर्च करने पर ग्रीन कलर में दिख्खाई देगा। यदि फर्जी वेबसाइट है तो रेड कलर में दिखाई पड़ेगा।

शब्दों और नाम पर दें विशेष ध्यान

नामी कंपनियों की वेबसाइट खोलते समय कंपनी के नाम और उसके नाम के शब्दों पर विशेष ध्यान देना चाहिए। आमतौर पर जल्दबाजी में लोग इंटरनेट यूज करते समय आधा नाम टाइप करते हैं, इससे नेट पर फर्जी कंपनी का भी नाम आ जाता है। जल्दबाजी में लोग इसी वेबसाइट पर इन करके उसमें दिए गए फोन नंबर पर संपर्क करते हैं और ठगी का शिकार हो जाते हैं।

फर्जी वेबसाइट बन जाता तो पकडऩे में होती परेशानी: एसआई प्रभाकर तिवारी ने बताया, यदि आरोपी फर्जी वेबसाइट बनाने में सफल हो जाता और वेबसाइट को असली वेबसाइट समझाकर लोग उसके झांसे में आकर ठगी का शिकार हो जाते, तब आरोपी को पकड़ पाना काफी मुश्किल हो जाता। आम तौर पर फर्जी वेबसाइट ब्लाइंड सर्वर प्राक्सी सर्वर से बनाया जाता है, जिसे रिकवर करने में कई महीने लग जाते हैं। जब तक आरोपी का सही लोकेशन पता चलता, तब तक वह पकड़ से दूर चला जाता।

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