Coffee Talk With Patrika : आधारकार्ड आपराधिक विवेचनाओं में भी हो यूज

Kajal Kiran Kashyap

Publish: Feb, 17 2017 11:30:00 (IST)

Bilaspur, Chhattisgarh, India
Coffee Talk With Patrika : आधारकार्ड आपराधिक विवेचनाओं में भी हो यूज

विवेचना का आधा काम तकनीकी ही कर डालती है

बिलासपुर. आधारकार्ड में इकट्ठा किया गया डाटा अगर क्राइम की विवेचना से लिंक कर दिया जाए तो अपराध में कोई अनसुलझी गुत्थी टाइप की शब्दावलियां तक खत्म हो जाएं। पुलिस अपनी विवेचना में विज्ञान का इस्तेमाल ज्यादा करे, क्योंकि विज्ञान झूठ नहीं बोलता। यह कहना है देश के श्रेष्ठतम फॉरेंसिक एक्सपर्ट डॉ. डीके सतपथी का। वे सिम्स के डेंटल विभागाध्यक्ष डॉ. बीके कश्यप के साथ गुरुवार को पत्रिका ऑफिस में कॉफी टॉक विद पत्रिका के गेस्ट बने।

पहले बातें प्रोफेशन की
विवेचनाओं को और सटीक कैसे बनाया जा सकता है : आपराधिक मामलों की सही विवेचना के लिए जरूरी है कि हर जिले में एक मेडिको लीगल अधिकारी हो। मैंने इसके लिए कई बार सरकार को लिखा, लेकिन कोई काम नहीं हो पाया। जबकि यह सिंपल है। सरकार अपने 15 साल की सेवा करने चुके डॉक्टरों को ऑफर दे कि वे अगर इसमें आना चाहते हैं तो उन्हें एक अलग से इंक्रीमेंट दिया जाएगा। वे पदस्थ कहीं भी रहें, कहलाएंगे मेडिको लीगल ऑफिसर ही। जिंदा तो झूठ बोल सकता है, लेकिन मुर्दा नहीं।

आधारकार्ड बड़ा पीपल डाटा, इन्वेस्टिगेशन में लें काम : ब्रिटेन में हर बच्चा किसी अस्पताल में जन्मता है। वहां कानून है कि जन्म लेते ही बच्चे के फिंगर प्रिंट एक सप्ताह के भीतर डाटा सेंटर में दें। इससे नेशनल लेवल पर जरा में पता चल जाता है कि फलां शव किसका है और मिले फिंगर प्रिंट किसके हैं। विवेचना का आधा काम तकनीकी ही कर डालती है।

मस्तूरी कांड में बहुत करीब है टारगेट मैं यह मानता हूं कि हम घटना के लगभग समय तक पहुंच चुके हैं। तीन थ्योरियां हैं। लगभग करीब हैं, मगर चूंकि अभी और काम बाकी है इसलिए इस मामले में विस्तार से बात नहीं करना चाहिए।

अब जरा घर की, परिवार की बातें
पत्नी को शिकायत : पत्नी वक्त को लेकर शिकायत करती है, यह लाजमी भी है। बच्चे बड़े होकर अपनी जिंदगियों में मशरूफ हो जाते हैं, ऐसे में पति-पत्नी और नजदीक आ जाते हैं। मुझे 40 वर्ष हो गए काम करते हुए। ज्यादातर समय बाहर रहता हूं।

10 किलोमीटर साइकिलिंग सेहत का राज : रोज 6 किमी वॉकिंग, 10 किमी साइकिलिंग करता हूं। पिता फ्रीडम फाइटर थे तो मेरी यह नैतिक जिम्मेदारी है कि कभी खुद को खास न समझूं, क्योंकि खास मानते ही हम खुद से दूर होते चले जाते हैं। दिनचर्या में पौराणिक पुस्तकों का अध्ययन शुमार हैं। 117 तरह के गुलाब की देखभाल मैं खुद करता हूं। क्योंकि ये न बुराई करते हैं न चुगली।

युवाओं को संवाद करना चाहिए, वाट्सएप वक्त खा रहा है : सोशल मीडिया ने संवाद कम कर दिया है। प्रत्यक्ष संवाद जरूरी है। मैं कहता हूं अपने छात्रों से कि वे शरारती जरूर बनें, उद्दंड नहीं। शरारत उनका जन्मसिद्ध हक है। समय को प्रबंधित करके चलें।

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