मालिकाना हक की लड़ाई, माली ने मकान पर चलवा दिया बुलडोजर

Kajal Kiran Kashyap

Publish: Dec, 01 2016 12:47:00 (IST)

Bilaspur, Chhattisgarh, India
मालिकाना हक की लड़ाई, माली ने मकान पर चलवा दिया बुलडोजर

एक वर्ष बाद रामशण की मृत्यु हो गई थी। रामशरण के बेटे अशोक ने शेष रकम राजेश से लेकर ऋणपुस्तिका में नामांतरण के बाद रजिस्ट्री कराने की बात कही।

बिलासपुर. कुदुदंड में मकान के मालिकाना हक की लड़ाई में शंकर माली ने बुधवार को बुलडोजर चलवाकर अपने ही दामाद का मकान ढहा दिया। पीडि़त दंपती ने घटना की शिकायत थाने में दर्ज कराई। भाजपा विधायक के जरिए दवाब बनाए जाने के बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज करना तो दूर जांच तक शुरू नहीं की। जानकारी के अनुसार कुदुदंड मिलन चौक निवासी राजेश पिता लक्ष्मीनारायण सैनी (45) ने मिलन चौक निवासी रामशरण श्रीवास से 17 दिसंबर 2013 को 703 वर्ग फीट जमीन पर बने मकान को 7 लाख रुपए में खरीदा था। राजेश ने रामशण को 5 लाख 30 हजार रुपए नकद दिए, और शेष राशि 1 लाख 70 हजार रुपए रजिस्ट्री के दौरान देने की बात कही थी। दोनों ने इकरारनामा किया था।  एक वर्ष बाद रामशण की मृत्यु हो गई थी। रामशरण के बेटे अशोक ने शेष रकम राजेश से लेकर ऋणपुस्तिका में नामांतरण के बाद रजिस्ट्री कराने की बात कही। इसके बाद से राजेश मकान में रह रहा था। बुधवार शाम 4 बजे चाचा ससुर शंकर माली अपने भाई संतू माली व 4-5 अन्य साथियों के साथ पहुंचा और उक्त मकान को अशोक से खरीद लेने की बात कहते हुए उस पर एक्सीवेटर चलवा दिया।  शिकायत पर पुलिस पहुंची, लेकिन बैरंग लौट आई।

भाजपा विधायक से पुलिस अफसरों को करवाया फोन

शंकर ने भाजपा के एक विधायक से पुलिस के आला अधिकारियों को फोन करवाया और कार्रवाई नहीं करने का दबाव बनवाया। विधायक की सिफारिश पर पुलिस ने प्रार्थी को गुुरुवार को जांच करने का हवाला देकर लौटा दिया।
घटना के बाद शंकर फरार
राजेश का मकान तोड़वाने के बाद शंकर माली इनोवा कार से फरार हो गया। शाम 6 बजे पुलिस कर्मियों ने मोबाइल पर संपर्क  करके  उसे थाने में आने के लिए कहा। लेकिन शंकर ने शहर से दूर होने की बात  कहते हुए गुरुवार को संपर्क करने की बात कही और कॉल डिस्कनेक्ट कर दिया।
5 नवंबर को घर में घुसकर की थी तोडफ़ोड़
मकान के मालिकाना हक के विवाद में शंकर माली ने 4-5 साथियों के साथ मिलकर 5 नवंबर को राजेश के घर में घुसकर मकान खरीद लेने की बात कहते हुए मकान में तोडफ़ोड़ की थी। राजेश ने उस समय भी इसकी शिकायत सिविल लाइन थाने में की थी। लेकिन पुलिस ने कोर्ट में परिवाद दायर करने की सलाह देकर धारा 155 के तहत पुलिस  हस्तक्षेप अयोग्य अपराध करार देकर फरमाइश नालिस देकर चलता कर दिया था।

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