कैदियों के पेरोल, यात्रा एवं भोजन खर्च शपथपत्र में पेश करने डीजी को दिए निर्देश

Kajal Kiran Kashyap

Publish: Jul, 18 2017 12:37:00 (IST)

bilaspur
कैदियों के पेरोल, यात्रा एवं भोजन खर्च शपथपत्र में पेश करने डीजी को दिए निर्देश

प्रदेश के विभिन्न जेलों में 15 से 20 वर्षों से जेल में बंद कैदियों की हालत जानने के लिए जस्टिस प्रीतिंकर दिवाकर एवं जस्टिस आरपी शर्मा की युगलपीठ में पुलिस के महानिदेशक (जेल) एवं पुलिस महानिरीक्षक सोमवार को उपस्थित हुए

बिलासपुर. हाईकोर्ट ने प्रदेश के कारागृह में वर्षों से बंद कैदियों को मिलने वाले पेरोल, पेशी के दौरान यात्रा व्यय एवं भोजन की व्यवस्था संबंधी समस्त जानकारियों की रिपोर्ट शपथ पत्र के साथ पेश करने के निर्देश दिए हैं।

प्रदेश के विभिन्न जेलों में 15 से 20 वर्षों से जेल में बंद कैदियों की हालत जानने के लिए जस्टिस प्रीतिंकर दिवाकर एवं जस्टिस आरपी शर्मा की युगलपीठ में पुलिस के महानिदेशक (जेल) एवं पुलिस महानिरीक्षक सोमवार को उपस्थित हुए। युगलपीठ ने डीजीपी से जेलों में बंद कैदियों को मिलने वाले पेरोल, पेशी के दौरान यात्रा व्यय एवं सुनवाई के दौरान भोजन की व्यवस्था संबंधी समस्त जानकारियां शपथपत्र के साथ बताने के लिए कहा है।

युगलपीठ ने कैदियों के नाम, पता, पिता का नाम एवं उन्हें मिलने वाले पेरोल की अवधि संबंधी जानकारी भी मांगी है। ये भी पूछा गया है कि कितने कैदियों को अब तक पेरोल पर छोड़ा गया है, और किस जुर्म के तहत उन्हें सजा हुई है। गत दिनों पूर्व एक मामले की सुनवाई के लिए राजनांदगांव के कुछ कैदियों को हाईकोर्ट लाया गया था।

सुनवाई के दौरान कोर्ट को जानकारी मिली कि कैदियों को 12 एवं 15 वर्षों से पेरोल पर नहीं छोड़ा गया है। जबकि नियमानुसार प्रति वर्ष 10-10 दिनों के लिए दो बार कैदियों को पेरोल दिए जाने का प्रावधान किया गया है। पेशी के दौरान कैदियों को मिलने वाले भोजन के लिए अभी भी 25 पैसे का भत्ता एवं खाने में चना-गुड़ तथा पारले बिस्किट दिए जाने पर भी कोर्ट ने जानकारी मांगी है। मामले की अगली सुनवाई 5 सप्ताह बाद होगी।

हाईकोर्ट ने दिया नोटिस शासन से मांगा जवाब: आरटीआई अधिनियम 2005 के तहत भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की जानकारी सार्वजनिक नहीं किए जाने पर हाईकोर्ट ने राज्य शासन को नोटिस जारी कर 5 सप्ताह में जवाब देने के निर्देश दिए हैं। याचिकाकर्ता राजकुमार मिश्रा ने सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के तहत ईओडब्लू एवं एंटी करप्शन ब्यूरो से 3 माह सें लंबित प्रकरणों की जानकारी मांगी थी। लेकिन यह जानकारी देने से इनकार कर दिया गया। शासन के इस निर्णय को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिका में कहा गया कि आरटीआई के अधिनियम 24 में भ्रष्टाचार और मानव अधिकारों के अतिक्रमण के अभिकथनों से संबंधित सूचना वर्जित नहीं है। अधिनियम की धारा 8 (1) के अनुसार जिस प्रकार विधानसभा या सांसद को जानकारी से इनकार नहीं किया जा सकता। उसी प्रकार किसी व्यक्ति को भी जानकारी देने से मना नहीं किया जा सकता।

नपा अध्यक्ष के अविश्वास प्रस्ताव पर स्थगन, कलेक्टर महासमुंद एवं सीएमओ को नोटिस: महासमुंद नगर पालिका अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर हाईकोर्ट ने स्थगन देते हुए कलेक्टर महासमुंद एवं सीएमओ को नोटिस जारी किया है। महासमुंद नगर पालिका अध्यक्ष कौशल्या देवी बंसल के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया है। अविश्वास प्रस्ताव लाए जाने पर कलेक्टर महासमुंद एवं राजस्व अधिकारी से शिकायत कर मामले की जांच किए जाने की मांग की गई। कलेक्टर ने मामले की जांच के लिए एसडीओ को पीठासीन अधिकारी नियुक्त कर दिया। जांच के बाद भी अविश्वास प्रस्ताव वापस नहीं लिए जाने पर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है।

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