शादी ब्याह के बजट पर पड़ा नोटबंदी का असर

Kajal Kiran Kashyap

Publish: Nov, 30 2016 12:00:00 (IST)

Bilaspur, Chhattisgarh, India
शादी ब्याह के बजट पर पड़ा नोटबंदी का असर

पंडित, नाई, बढ़ई, रसोइया, फूल वाले, टेलर, धोबी, बग्गी वाले, बैंड व डीजे वाले भी परेशान हो रहे हैं। शादी-ब्याह के सीजन में इनका व्यापार ठंडा पड़ा है।

बिलासपुर. देव उठनी ग्यारस के साथ ही शादी की शहनाई बजने लगी है। लेकिन सभी वैवाहिक कार्यक्रम नोटबंदी से खासे प्रभावित हुए हैं। पूर्व में जिन्होंने नगदी निकालकर घर पर रखे थे, उन्हें बैंकों में जमा करना पड़ा। इसके बाद पैसे निकालने की समय सीमा तय कर दी गई। इससे लोगों को बैंकों के चक्कर लगाने पड़े। लेकिन इसके बाद भी पर्याप्त रकम की व्यवस्था नहीं हो सकी। शादी-ब्याह की के लिए पैसे निकालने के लिए ढाई लाख रुपए तक निकालने की छूट दी गई, लेकिन नियम ऐसे कि कुछ परिवार ने शादी ही टाल दी, तो कुछ बहुत सीमित बजट में शादी समारोह निपटा रहे हैं। शादी-ब्याह की रस्मों से जुड़े व्यावसायियों को भी संकट का सामना करना पड़ रहा है। पंडित, नाई, बढ़ई, रसोइया, फूल वाले, टेलर, धोबी, बग्गी वाले, बैंड व डीजे वाले भी परेशान हो रहे हैं। शादी-ब्याह के सीजन में इनका व्यापार ठंडा पड़ा है।

कैश नहीं तो दे रहे चेक

बग्घी वाले संदीप कुमार सोनवानी ने बताया कि नोटबंदी के चलते हमारे काम पर थोड़ा असर तो पड़ा है। शगुन में मिलने वाले पैसे अब हमें चेक या ऑन लाइन दिए जा रहे हैं। कुछ दिन पहले गणेश वाटिका में शादी का आयोजन किया गया था जहां दुल्हा पक्ष जर्मनी का था। उन्होंने कैश के अभाव में हमें शगुन के पैसे चेक से पेमेंट किए।

ओरिजनल के बजाए आर्टिफिशियल फ्लॉवर

फूल व्यापारी अजय देवांगन ने बताया कि शादी में तीन दिन के आयोजन में प्रत्येक दिन घर पर ओरिजन गेंदे के फूल से घर सजाया जाता है। लेकिन इस बार नोट में कमी के चलते लोगों ने आर्टिफिशियल फूलों से ही हॉल व मकान को डेकोरेट कराने आर्डर दिया है। ताकि इससे तीन दिन का खर्चा करने के बजाए एक ही दिन खर्चा कर रहे हैं।

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