देश को अब स्किल्ड युवाओं की है जरूरत तभी हम अपने मकसद में होंगे कामयाब

Kajal Kiran Kashyap

Publish: Feb, 16 2017 01:49:00 (IST)

Bilaspur, Chhattisgarh, India
देश को अब स्किल्ड युवाओं की है जरूरत तभी हम अपने मकसद में होंगे कामयाब

स्किल इंडिया और मेक इन इंडिया मिशन से स्वयं के रोजगार खड़ा करें और दूसरों को रोजगार दें

बिलासपुर. आज देश का हर क्षेत्र और हर व्यक्ति कौशल विकास से स्किल्ड हो रहा है, फिर भी आदिवासी अंचल और आदिवासी क्षेत्र के विद्यार्थी अब भी कौशल विकास से दूर है। इसी कमी को दूर करने के लिए डॉ. सीवी रामन् विश्वविद्यालय कौशल विकास और प्रधानमंत्री कौशल केंद्र के साथ आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में काम रहा है। यह क्षेत्र के लिए ही नहीं पूरे प्रदेश के लिए गौरव की बात हैं। विश्वविद्यालय के माध्यम से अधिक से अधिक आदिवासी विद्यार्थी कौशल विकास की मुख्यधारा से जुड़ें। स्किल इंडिया और मेक इन इंडिया मिशन से स्वयं के रोजगार खड़ा करें और दूसरों को रोजगार दें। आदिवासी क्षेत्र में शिक्षा का काम करना एक चुनौती से कम नहीं है जो डॉ. सीवी रामन् विश्वविद्यालय कर रहा है। स्वयं को सक्षम बनाना जरूरी है जो कौशल विकास से ही संभव है।

उक्त बातें डॉ.सीवी रामन् विश्वविद्यालय के कौशल विकास उन्न्यन कार्यक्रम  मेंं केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री फग्गन  सिंह कुलस्ते ने कहीं। मुख्य अतिथि की आसंदी से कुलस्ते ने कहा कि देश में सबसे ज्यादा जरूरत स्किल्ड युवाओं की है। इसलिए देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मिशन को अपने हाथ में लिया हैं। छत्तीसगढ़ में इसकी कमान डॉ. सीवीरामन् विश्वविद्यालय को सौंपी गई है, जिसके माध्यम से विश्वविद्यालय में कौशल विकास केंद्र और राज्य रिसोर्स सेंटर बनाया गया है। आज की स्थिति यह है कि डाक्टरी की पढ़ाई करने के बाद गांव में सेवा नहीं देना चाहते।  यह तय किया जा रहा है, कि डाक्टर की डिग्री के बाद कम से कम 2 साल गांव में सेवा देनी होगी, तभी मेडिकल में मास्टरर्स डिग्री की पढ़ाई की अनुमति दी जाएगी। इस अवसर  सभी विभागों के विभागाध्यक्ष मौजूद थे।

अर्थ स्टेशन बनेगा सीवीआरयू में, इसरो से हो रही बात-चौबे : डॉ. सीवी रामन् विश्वविद्यालय के कुलाधिपति संतोष चौबे ने विवि की भावी योजनाओं के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि  विश्वविद्यालय में एक अर्थ सेंटर स्थापित करने जा रहे हैं। सैटेलाइट के माध्यम से नई तकनीक से जुड़ेंगे। इसके लिए प्रबंधन ने इसरों से बात की है। जल्द से सकारात्मक परिणाम आएंगे और हम आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र कोटा को विश्व स्तर पर चिन्हित कर सकेंगे। चौबे ने कहा कि विश्वविद्यालय मेडिकल कॉलेज और नर्सिंग में क्षेत्र के काम करना चाहता है। इसकी आंतरिक तैयारी की जा रही है हम जल्द ही आगे बढ़ेंगे।

चौबे ने कहा कि संस्थान का उद्देश्य है कि बाटम पिरामिंड की तरह  काम करना है। इसलिए हम महानगर, नगर, विकासखंड क्षेत्र की तुलना में गा्रमीण क्षेत्र में काम करना अधिक पसंद करते है। चौबे ने देश के महानगरों ,नगरों, विकासखंड की संख्या बताते हुए गांव की संख्या अधिक होने और यहां जमीनी स्तर पर काम करने के अवसर पर जोर दिया। उन्होंने कहा की भारत के 7 लाख गांव में लोगों के लिए काम करना अधिक सुखदायक है, ताकि अंतिम पंक्ति के अंतिम व्यक्ति तक हम योजनाओं को सीधा पहुंचा सकें।

छात्रसंघ पदाधिकारियों ने ली शपथ:  विश्वविद्यालय के छात्रसंघ पदाधिकारियों ने शपथ ग्रहण किया। इसमें अध्यक्ष दिग्विजय सिंह राणा, उपाध्यक्ष प्राजंल चौकसे, सचिव चेतन दास मानिकपुरी, सह सचिव दीप सोनी ने अतिथियों के समक्ष पद और गोपनीयता की शपथ ली। इस अवसर पर पदाधिकारियों ने अपनी बात रखी और छात्रसंघ की गतिविधियों और कार्य की जानकारी दी।

विकास के लिए शिक्षा संस्थान उद्योगों से बेहतर- दुबे : कुलपति प्रो. आरपी दुबे ने कहा कि यदि किसी क्षेत्र का विकास करना है तो वहां उद्योग लगाने से कही बेहतर से है कि वहां शिक्षा का संस्थान खोला जाए। यही काम डॉ सीवी रामन् विश्वविद्यालय ने किया। प्रो दुबे ने बताया कि 2030 में हमारा देश सबसे युवा देश होगा यानी कि यहां के लोगोंं की औसत आयु 30 साल होगी। दुनिया के सबसे ज्यादा युवा भारत में ही हैं।  इस लिहाज से 2030 में रोजगार की जरूरत होगी। हम आज से ही स्किल इंडिया और मेक इन इंडिया जैसे मिशन को लेकर काम कर रहे है। इससे उन दिनों में हर युवा के हाथ में रोजगार होगा।

अंचल से हीरा तराश रहा सीवीआरयू-डॉ रेणु: विशिष्ट अतिथि कोटा विधायक डॉ.रेणु जोगी ने कहा कि सीवीआरयू यहां के विद्यार्थियों की प्रतिभाओं को निखारकर हीरे की तरह तराश रहा है। हाल ही में कोटा जैसे अदिवासी क्षेत्र के बच्चें कबड्डी और तैराकी में नेशलन खेलने गए हैं। इतना ही नहीं वनाचंल क्षेत्र की बेटियों  ने तीरंदाजी में भी नाम कमाया है। डॉ. जोगी ने कहा कि यह तभी संभव हो पाया है जब सीवीआरयू यहां के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा दे रहा है और इसलिए ही आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र से भी प्रतिभाएं सामने आ रही हैं।

ज्ञान है, हुनर की जरूरत : अटल विशिष्ठ अतिथि  कांग्रेस के महामंत्री अटल श्रीवास्तव ने कहा कि प्रदेश के लोगों के पास ज्ञान है। सिर्फ  हुनर की जरूरत है। इस जरूरत को पूरा करने का काम सीवीआरयू कर रहा है।  डिजास्टर मैनेजमेंट जैसे कोर्स शुरू किए जाने की जरूरत है। ताकि सुरक्षा की जैसे जॉब में अवसर मिल सके। उन्होंने कहा कि मेरा विश्वास है कि जल्द ही विश्वविद्यालय में ऐसे रोजगार मूलक कोर्स और भी शुरू किया जाएगा।
20 हजार आदिवासियों  ने लिया प्रवेश-पाण्डेय : विश्वविद्यालय के कुलसचिव शैलेष पाण्डेय ने कहा कि डॉ. सीवी रामन् विश्वविद्यालय 2006 में स्थापित किया गया था, तब से अब 10 सालों में 32 हजार विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया है। मुझे यह बात बताते हुए हर्ष हो रहा है कि इस विद्यार्थियों में लगभग 20 हजार विद्यार्थी अनुसुचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग के है। सही मायने में यही हमारे विश्वविद्यालय के सार्थकता है और हमारी पूंजी भी है,  क्योंकि आदिवासी और अनुसुचित जाति व पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा से जोडऩे के लिए ही विश्वविद्यालय की स्थापना की गई थी ।

आज विश्वविद्यालय का उददेश्य पूरा हो चुका है।  लेकिन मंजिले अभी दूर है। हम यहां के आदिवासी विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर पर और मंच देगें । पाण्डेय ने बताया कि इसकी शुरूआत हो चुकी है। यूजीसी, प्रधानमंत्री कौशल विकास केन्द्र की अनुमति दी है। इसके बाद राज्य सरकार ने इसे स्टेट रिर्सोस सेंटर का दर्जा दिया है। आज हम 530 महाविद्यालय, विश्वविद्यालय के 5 लाख विद्यार्थियों को  स्कील में दक्ष कर रहे है।

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