नोटबंदी क्या हुई, याद आई तीर्थयात्रा, फुल ट्रेवल रिजर्वेशन की संख्या हो गई दोगुनी

Kajal Kiran Kashyap

Publish: Nov, 29 2016 01:58:00 (IST)

Bilaspur, Chhattisgarh, India
नोटबंदी क्या हुई, याद आई तीर्थयात्रा, फुल ट्रेवल रिजर्वेशन की संख्या हो गई दोगुनी

टे्रन में 9 बोगियां होती हैं। इसके लिए पहले उसे रेलवे के जोन कार्यालय में आवेदन देना होता है, जिस पर रेलवे अपनी कोच की उपलब्धता के अनुसार उसे एफटीआर की अनुमति देता है।

बिलासपुर. तीर्थ दर्शन के नाम पर अब रेलवे के माध्यम से काला धन सफेद किया जा रहा है। रेलवे की एफटीआर के माध्यम से आ रहे करोड़े रुपए को रेल बुक करने के लिए इन्हीं काले धन का उपयोग किया जा रहा है। यही कारण है कि अभी तक तीर्थ दर्शन के लिए बुक होने वाली ट्रेनों की संख्या पिछले वर्ष की तुलना में दोगुनी हो गई है। हर महीने जहां रेलवे की दो एफटीआर होती थी, वहीं इस महीने दोगनी होकर सीधे चार एफटीआर हो गई है। दरअसल लोगों को रेलवे में सामूहिक यात्रा के लिए एफटीआर (फुल टैरिफ रिजर्वेशन) की सुविधा दी जाती है, जिसके तहत कोई भी संस्था या व्यक्ति  रेलवे में लंबी यात्रा के लिए एक निश्चित समय के लिए पूरी ट्रेन को बुक करवा सकता है। टे्रन में 9 बोगियां होती हैं। इसके लिए पहले उसे रेलवे के जोन कार्यालय में आवेदन देना होता है, जिस पर रेलवे अपनी कोच की उपलब्धता के अनुसार उसे एफटीआर की अनुमति देता है। साथ ही उसे एडवांस के तौर पर एक कोच का पचास हजार रुपए देना होता है। वहीं गाड़ी रवाना होने के 48 घंटे पहले पूरा किराया जमा करना होता है। एक टूर का 20 लाख रुपए से लेकर 40 लाख रुपए तक होता है।

पांच सौ के नोट ही जमा कर रहे

इस महीने हुए एफटीआर में सबसे ज्यादा प्राइवेट एजेंसी के हैं, जो लोगों से रुपए चारो धाम या फिर तीर्थ दर्शन आदि टूर का रेल पैकेज देकर उन्हें यात्रा करवाते हैं। यह प्रत्येक पैसेंजर से टूर पैकेज के लिए निर्धारित रकम को लेकर रेलवे में एफटीआर करवाके ट्रेन बुक करवाते हैं। यात्री को इन एजेंसी संचालकों को खुल्ले पैसे ही देते हैं लेकिन वह रेलवे में 500 के नोट से ही पूरा भुगतान कर रहे हैं। इसके एवज में यात्री से मिले सौ-पचास के नोट के बदले में पांच सौ के नोट जमा कर इन खुल्ले नोटों को दबाए दे रहे हैं या फिर 30 प्रतिशत में उन्हें इन नोटों से बदले ले रहे हैं। इस तरह एफटीआर के नाम पर टूर कंपनी संचालक काले धन को सफेद करने में लगे हुए हैं। अभी तक रेलवे में एफटीआर के लिए जितने भी रुपए जमा हुए हैं उसमें सभी नोट 500 के ही हैं। अगर यह कैंसल भी होता है या फिर रेलवे उक्त तिथि में कोच उपलब्ध नहीं करवा पाता तो एजेंसी के खाते में जमा की गई एडवांश राशि को रिफण्ड कर दिया जाएगा। उस राशि को एजेंसी संचालक लोगों से जमा कराई गई राशि को बताकर वापस ले सकता है।

इस महीने 4 एफटीआर

बिलासपुर मण्डल के तहत नवंबर महीने में अभी तक 4 एफटीआर हो चुकी है जबकि प्रत्येक महीने सामान्यत: 2 एफटीआर ही होती है। वहीं अगर पिछले साल नवंबर की बात करें तो भी केवल दो एफटीआर ही हुई थी। अगर जोन की बात करें तो यह संख्या करीब एक दर्जन है। यह ज्यादातर तीर्थदर्शन के लिए जाने वाली ट्रेनों के लिए होता है। तीर्थ दर्शन के लिए मण्डल के कोरबा में तीन टूर एजेंसी हैं, जो प्रत्येक दो माह में एक एफटीआर करवाती हैं, वहीं बिलासपुर में भी एक एजेंंसी है।

निर्देश में एफटीआर का नहीं जिक्र

नोटबंदी पर सरकार द्वारा रेलवे को हजार व पांच सौ रुपए के नोट लेने के संबंध में जारी किए गए निर्देशों में मुख्य रूप से तीन बिंदुओं का जिक्र है, जिसमें यात्री को टिकट बनवाते समय, 5 हजार से अधिक राशि के रिफण्ड और ट्रेनों में कैटरिंग आदि के भुगतान पर 500 के नोट लिया जाना है। एेसे में एफटीआर के भुगतान का इसमें जिक्र न होने के कारण इसमें 5सौ रुपए के नोट के भुगतान को स्वीकार किया जा रहा है।

इस संबंध में रेलवे को कोई जानकारी नहीं है। हम यह नहीं जान सकते कि एफटीआर करवाने वाला 500 के नोट कहां से लाया है। इस संबंध में रेलवे बोर्ड से आए आदेशों का पालन किया जा रहा है।
डॉ. प्रकाश चंद्र त्रिपाठी, सीपीआरओ

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