सात फेरे लेने से पहले पहुंचे बाल संरक्षण अधिकारी, रुकवाई शादी, राजकिशोर नगर की एक नाबालिग दुल्हन बनने से बची

Kajal Kiran Kashyap

Publish: Apr, 21 2017 12:56:00 (IST)

bilaspur
सात फेरे लेने से पहले पहुंचे बाल संरक्षण अधिकारी, रुकवाई शादी, राजकिशोर नगर की एक नाबालिग दुल्हन बनने से बची
बिलासपुर. राजकिशोर नगर में रहने वाले एक परिवार ने नाबालिग का विवाह लवन जाकर करने वाले थे। इसकी सूचना मिलने पर महिला एवं बाल विकास विभाग के दो जिला अधिकारियों को यह शादी रुकवाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी।

जिला बाल संरक्षण अधिकारी पार्वती वर्मा को जानकारी मिली की कि राजकिशोर नगर निवासी नाबालिग का विवाह लवन बलौदाबाजार निवासी टिपेन्द्र देंवागन के साथ 19 अप्रैल को तय किया गया था। उक्त जानकारी से महिला एवं बाल विकास अधिकारी आनंद प्रकाश किस्पोट्टा को अवगत कराया गया।

उनके मार्गदर्शन में बाल विवाह रोकने की कार्यवाही प्रारंभ की गई। चूंकि नाबालिग का विवाह लड़की पक्ष द्वारा लवन बलौदा बाजार जाकर किया जाना था, इसलिए उक्त जानकारी से बाल संरक्षण इकाई बलौदा बाजार के जिला बाल संरक्षण अधिकारी प्रकाश दास महंत को दी गई।

महंत अपनी टीम एवं बलौदा बाजार पुलिस थाना की टीम लेकर विवाह स्थल पहुंचे और वर-वधु पक्ष के लोगों को समझाया कि 18 वर्ष से कम उम्र की लड़की एवं 21 वर्ष से कम उम्र के किसी भी लड़के का विवाह कानूनन अपराध है। लड़की की उम्र सत्यापन कराने पर वह 15 वर्ष 10 माह 23 दिन की थी। बहुत समझाइश के बाद दोनों पक्ष विवाह न करने के लिए राजी हुए तथा दोनों पक्षों ने शपथ लिया कि वे नाबालिग लड़की का विवाह नहीं करेंगे।

जिला बाल संरक्षण अधिकारी बलौदा बाजार के द्वारा उपस्थित ग्रामीणों को जानकारी दी गई कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के अंतर्गत 21 वर्ष से कम उम्र के लड़के एवं 18 वर्ष से कम उम्र की लड़की का विवाह प्रतिबंधित है। यह कानून बाल विवाह के बंधन में बंधने वाले बालक, बालिका को अपना विवाह शून्य घोषित करने का अधिकार प्रदान करता है। इसके अतिरिक्त जानकारी दी गई कि कम उम्र में विवाह करने से बच्चों का बचपन नष्ट हो जाता है एवं बच्चे के शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ता है।बच्चे खासतौर से लड़किया पढ़ाई लिखाई से वंचित हो जाती हैं।

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