मानसून में कान-नाक-गले का ऐसे रखें खयाल, जानें खास बातें

Vikas Gupta

Publish: Jun, 19 2017 06:55:00 (IST)

Body & Soul
मानसून में कान-नाक-गले का ऐसे रखें खयाल, जानें खास बातें

इस दौरान मौसम में हुए बदलाव आपको बीमार भी कर सकते हैं। इसलिए जरूरी है कि इस दौरान कुछ खास बातों का खयाल रखा जाए। आइए जानते हैं इनके बारे में।

यूं तो बारिश का मौसम मन को भाने वाला होता है। लेकिन इस दौरान मौसम में हुए बदलाव आपको बीमार भी कर सकते हैं। इसलिए जरूरी है कि इस दौरान कुछ खास बातों का खयाल रखा जाए। आइए जानते हैं इनके बारे में। 

मार्निंग वॉक में बरतें सावधानी
इस मौसम में मॉर्निंग वॉक पर जाते समय सावधानी रखें। भले ही बारिश नहीं हो रही हो लेकिन वातावरण में मौजूद नमी भी खतरनाक हो सकती है। बारिश के मौसम में फूल-पत्तियों से पोलेन ग्रेन निकलता है जो एलर्जी का एक बड़ा कारण है। इसलिए सुबह की सैर पर जाते समय मास्क लगाकर या मुंह को ढककर जाना ही उचित होगा। 

अस्थमा रोगी रखें ध्यान
मानसून के दौरान वाहन चलाते वक्त भी विशेष रूप से सजग रहने की जरूरत है क्योंकि बादलों के मौसम में प्रदूषण अधिक होता है। यह जरूरी है कि ड्राइव करते समय या तो मास्क लगाएं या स्कार्फ  लगा लें। जिन लोगों को अस्थमा की तकलीफ हो वे घर में एयर कंडीशनर (एसी) का प्रयोग कम से कम करें। एसी की हवा से नाक और गला दोनों खराब होने की आशंका रहती है। वैसे तो सावधानी ही उपचार है लेकिन यदि एलर्जी अधिक बढ़ जाए तो विशेषज्ञ की सलाह से मरीज नाक में डालने के लिए स्टेरॉइड नॉजल स्प्रे का उपयोग कर सकते हैं। इसके अलावा रोगी एलर्जी और अस्थमा के लिए भी डॉक्टरी सलाह से ही दवाओं का प्रयोग करें। इस मौसम में कई घरों में सीलन आने का खतरा रहता है जो एलर्जी को और बढ़ाने का काम करती है। इससे बचाव के लिए पहले ही उचित उपाय करें।

कान के लिए नमी सही नहीं
बारिश के दिनों में कान की छोटी-छोटी शिकायतें बाद में बड़ी बन सकती है। कान के लिए शुष्कता या नमी ठीक नहीं है। इसके अलावा बारिश में भीगने से कान में पानी जाने पर संक्रमण और फंगस होने का खतरा बना रहता है। जब हम ईयरबड से वैक्स निकालने का प्रयास करते हैं तो वह बाहर निकलने की बजाय और अंदर चला जाता है। इससे कान में फंगस व पर्दे पर चोट लग सकती है और सुनने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। कान से किसी प्रकार का बहाव, दर्द या अन्य कोई तकलीफ होने पर विशेषज्ञ से फौरन संपर्क करना ही उचित रहता है। अक्सर लोग कानदर्द की स्थिति में सरसों के तेल की कुछ बूंदें डाल लेते हैं। इससे संक्रमण और अधिक बढ़ सकता है इसलिए इसके प्रयोग से बचें।

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