जननी के इंतजार में तड़पती रही प्रसूता

Editorial Khandwa

Publish: Jun, 20 2017 05:13:00 (IST)

Burhanpur, Madhya Pradesh, India
जननी के इंतजार में तड़पती रही प्रसूता

निजी वाहन में हो गई महिला की डिलेवरी, जुड़वा बच्चों को दिया जन्म, हालत गंभीरएसएनसीयू में किया नवजात को भर्ती

बुरहानपुर. स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही फिर एक प्रसूता को भारी पड़ गई। हालात ऐसे बने की जच्चा और बच्चा दोनों की जान पर बन आई। जननी वाहन के इंतजार में तड़प रही प्रसूता को परिजन निजी वाहन की व्यवस्था कर अस्पताल की ओर तो निकल गए, लेकिन रास्ते में प्रसव पीड़ा से तड़प रही महिला ने एक बच्चे को चलती गाड़ी में जन्म दे दिया। इसके बाद में प्रसूता तड़पती रही और डोइफोडिय़ा स्वास्थ्य केंद्र पर ?ार्तीकरने पर दूसरे बच्चे को जन्म दिया। जहां दोनों बच्चों की हालत गंभीर होने पर एसएनसीयू में भर्तीकिया गया है।
तुकईथड़ में शैलेश देशमुख की पत्नी बिना देशमुख को सोमवार सुबह 11 बजे अचानक प्रसव पिड़ा हुई। परिजनों ने जननी एक्सप्रेस बुलाने के लिए फोन किया, लेकिन उन्हें बताया गया कि अभी वाहन उपलब्ध नहीं है, इंतजार करना होगा। लेकिन बिना की हालत रुकने जैसी नहीं थी। आखिरकार परिजन बिना को निजी वाहन में बैठाकर निकले। डोईफोडिय़ा से कुछ किलोमीटर दूर ही महिला ने लड़की को जन्म दिया। बच्चे के जन्म के बाद भी महिला दर्द से कराह रही थी। इसलिए रास्ते में वाहन रोकना भी मुश्किल था। पति सीधे वाहन लेकर 26 घर से 26 किमी दूर डोईफोडिय़ा के स्वास्थ्य केंद्र पर पहुंचा।जहां बिना को भर्तीकराते ही एक लड़के को जन्म दिया।
एसएनसीयू में डॉक्टर की देखरेख में नवजात
बिना ने एक लड़की और एक लड़के को जन्म दिया है। अस्पताल में दोपहर 2 बजे दोनों नवजात को लाया गया। जुड़वा होने के कारण यह कमजोर थे। दोनों बच्चों को तुरंत एसएनसीयू में भर्ती किया गया और डॉक्टरों ने उनका उपचार शुरू किया। जबकि महिला को प्रसव वार्ड में भर्ती किया है। परिजन गजानंद तायड़े ने बताया कि जननी एक्सप्रेस को फोन करने वाहन नहीं मिला, इस लिए निजी वाहन से वह आ रहे थे।   
समय पर नहीं आता जननी वाहन
ग्रामीणों अंचलों में सुविधा के लिए जननी एक्सप्रेस का संचालन शुरू किया था, लेकिन समय पर ग्रामीण अंचलों में वाहन की सुविधा नहीं मिल पाती। अधिकतर ग्रामीण अपने वाहनों से ही अस्पताल में आते हैं। निजी वाहन में डिलेवरी होने का यह पहला प्रकरण नहीं है। इसके बाद भी अधिकारी व्यवस्था सुधारने की ओर ध्यान नहीं दे रहे है।
वाहनों में जीपीएस ही नहीं
जननी के कईवाहन ऐसे हैं, इसमें जीपीएस सिस्टम लगा ही नहीं है।इससे पता नहीं चल पाता कि वाहन कितने किमी चला है।इसकी पूरी बिलिंग वाहन मालिक के पेट्रोल-डीजल की रसीद पर चलता है। जबकि स्वास्थ्य विभाग के स?त नियम है कि वाहन में जीपीएस सिस्टम जरूरी है। ऐसे कईवाहन हैजो आंतरिक गांव में नहीं पहुंच पाते हैं।
अस्पताल में पहुंचने पर दोनों जूड़वा बच्चें काफी कमजोर थे, उन्हें तुरंत उपचार के लिए भर्ती किया गया, फिलहाल उनकी स्थिति में सुधार हो रहा है। बच्चों की स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
डॉ. प्रतिक नवलखे, शिशु रोग विशेषज्ञ

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