खूंटी में रखरखाव के अभाव में अंतिम सांसें गिन रहा एस्ट्रोटर्फ

Indresh Gupta

Publish: Nov, 30 2016 12:36:00 (IST)

Chaibasa, Jharkhand, India
खूंटी में रखरखाव के अभाव में अंतिम सांसें गिन रहा एस्ट्रोटर्फ

खेल एवं युवा कार्य विभाग के निदेशक रणेन्द्र कुमार ने आश्वासन दिया कि जल्दी ही इसे ठीक कराया जाएगा।

चाईबासा। खूंटी के एकमात्र एस्ट्रोटर्फ हॉकी स्टेडियम की हालत पिछले कई सालों से बेहद खराब है। एसएस हाईस्कूल हॉकी स्टेडियम में लगभग आठ साल पहले लगाए गए एस्ट्रोटर्फ रखरखाव के अभाव और विभागीय लापरवाही के अभाव में अंतिम सांसे गिन रहा है।

एस्ट्रोटर्फ मैदान के लिए खेल विभाग की ओर से रख रखाव की कोई उचित व्यवस्था नहीं की गई है, जिसके कारण एस्ट्रोटर्फ
मैदान पूरी तरह से खराब होने के कगार पर है। एस्ट्रोटर्फ जगह-जगह से उखड़ने लगा है। इसके लिए अब तक न तो उचित पानी की व्यवस्था हो पाई और न ही ड्रेनेज सिस्टम ही बनाया गया।

यह स्थिति तब है जब हाल ही में ओलंपिक खेलों में राज्य की पहली महिला हॉकी खिलाड़ी बनने का अवसर खूंटी की निक्की
प्रधान को मिला था। खेल एवं युवा कार्य विभाग के निदेशक रणेन्द्र कुमार ने आश्वासन दिया कि जल्दी ही इसे ठीक कराया जाएगा।

उधर खेल एवं युवा कार्य विभाग की प्रशिक्षण प्रमुख उमा जायसवाल ने कहा कि यहां नियमित रूप से खिलाड़ियों के प्रशिक्षण की भी व्यवस्था की जाएगी, ताकि एस्ट्रोटर्फ का लाभ नई प्रतिभाओं को मिल सके। स्टेडियम की दुर्दशा ने निराश हॉकी प्रेमियों और पूर्व खिलाड़ियों को अब खेल विभाग के अधिकारियों से मिले सकारात्मक आश्वासन के बाद एक बार फिर से जिले में हॉकी की नई प्रतिभाओं के राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय मानचित्र पर उभरने की उम्मीद है।

पूर्व खिलाड़ी सह कोच सुशांति हेरेंज कहती हैं कि हॉकी स्टेडियम की बेहतरी के लिए उठाए गए कदम राष्ट्रीय स्तर पर स्थानीय प्रतिभा के चयन को सुनिश्चित करते हैं। हालांकि हॉकी के क्षेत्र में खूंटी किसी पहचान का मोहताज नहीं है। निक्की प्रधान से पहले भी पुष्पा प्रधान, बिगन सोय, जसिंता केरकेट्टा जैसे जिले के कई हॉकी खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है।

लेकिन पिछले कुछ सालों से यह पहचान खो गई थी। ऐसे में खेल विभाग यदि अपने प्रयासों में सफल रहता है तो हॉकी के क्षेत्र में स्वर्णिम इतिहास को दोहराने की कवायद एक बार फिर हो सकेगी।

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