भक्तों पर अन्न-धन बरसाने वाले भोलेनाथ

Mukesh Sharma

Publish: Jul, 17 2017 09:53:00 (IST)

Chennai, Tamil Nadu, India
भक्तों पर अन्न-धन बरसाने वाले भोलेनाथ

तंजावुर जिले के तिरुवैयारू तहसील में भगवान शिव का श्री सोट्रतुरै नाथर मंदिर है। शैव संत तिरुणावकरसर ने

चेन्नई।तंजावुर जिले के तिरुवैयारू तहसील में भगवान शिव का श्री सोट्रतुरै नाथर मंदिर है। शैव संत तिरुणावकरसर ने अपने भक्ति काव्य में स्वयंभू शिवलिंग सोट्रतुरै नाथर की वंदना की है। थेवारम में वर्णित यह स्थल कावेरी नदी के दक्षिणी छोर पर 13वां शिवालय है। मंदिर के भगवान को ओड़वनेश्वर और तोलयासेल्व नाथर नाम से पुकारा जाता है। मंदिर का मुख्य आकर्षण शिवरात्रि और अन्य शिवोत्सव है जब हजारों की संख्या में श्रद्धालु उमड़ते हैं। यह स्थल उन सात शिव स्थलों में से तीसरा मंदिर है जहां भगवान शिव ने अपने भक्तों को भोजन कराया।

पौराणिक कथा


मान्यता के अनुसार प्रजापिता ब्रह्मा, विष्ण, गौतम मुनि, सूर्य देवता और देवराज इंद्र ने यहां शिव की पूजा की है। कहा जाता है कि इंद्र को देवराज की उपाधि यहीं मिली और गौतम मुनि को मोक्ष मिला।

एक समय की बात है यहां भयंकर अकाल पड़ा। शिव भक्त अरुलालर ने शिव से बिलखते हुए प्रार्थना की वे भूख से मरते उनको भक्तों को बचाने के लिए आएं। सूखे की वजह से मंदिर का पुजारी आना बंद हो चुका था। एक व्यक्ति ही मंदिर में दीपक जलाने आता था। वह भी असह्य भूख से धराशायी हो गया। मंदिर पूरी तरह अंधेरे की गर्त में था। अरुलालर इस घनघोर अंधेरे में भी मंदिर ईश स्तुति करता रहा। तभी काले बदल घिरे और मूसलाधार बरसात होने लगी।

 कुछ ही समय बाद यह क्षेत्र जलप्लावित हो गया। इस जल में कटोरा तैरता हुआ अरुलालर के पास आया। फिर उसे सुनाई पड़ा कि यह अक्षय पात्र है जो कभी खाली नहीं होगा और तुम इसके जरिए लोगों की भूख मिटाओ। इसके बाद अक्षय पात्र दाल, चावल, घी और अन्य खाद्य वस्तुएं निकलने लगी और भक्तों के चेहरे पर खुशी की लहर छा गई।

इतिहास और संरचना

यह शिवालय भी करीब 2 हजार साल पुराना माना जाता है। अन्य शिव मंदिरों की तुलना में मंदिर के गोपुरम का आकार छोटा है लेकिन इसके विस्तार में अन्य सन्निधियां और मंडप है। छोटे से गोपुरम से जुड़े परकोटे के भीतर सभी सन्निधियां हैं। गर्भगृह में शिव सोट्रतुरै नाथर विराजित हैं। मंदिर के दक्षिण पूर्वी हिस्से में मां पार्वती की सन्निधि हैं। वे अन्नपूर्णी और तोलयासेल्वी नाम से आराध्य हैं। उनका अन्य नाम ओप्पिलाम्बीकै भी है। मंदिर का मूल वृक्ष बिल्व है और इससे जुड़े तीर्थस्रोत कावेरी और सूर्य तीर्थम है। परिसर में अम्मन मंडपम, मुरुगन, गणेश और भगवान विष्णु की भी मूर्ति है। मंदिर के भीतर ही सुंदर बाग भी है।

विशेष आकर्षण

भक्तों पर अनंत धन की वर्षा करने वाले भगवान शिव की यहां सोट्रतुरै नाथर के रूप में होती है। देवी पार्वती अद्र्धांगिनी के रूप में यश और वैभव की वर्षा करती है। विश्वास है कि यहां शिव पूजा से गरीबी और निर्धनता से छुटकारा मिलता है। लोगों की मान्यता है कि यहां दर्शन करने वाले भक्त के घर में अन्न और समृद्धि की कमी नहीं रहती। नंदी भगवान और सुयम प्रकाशी का विवाहोत्सव यहां धूमधाम से मनाया जाता है। सुयम प्रकाशी व्यक्रपद मुनि की पुत्री थी। यह उत्सव मार्च-अप्रेल महीने में पुनर्वसु नक्षत्र के दिन आयोजित होता है।

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