एक साल बाद भी विवादित भर्ती की जांच अधूरी, कागजों में हैं भ्रष्टाचार की परतें 

Deepak Rai

Publish: Jul, 18 2017 01:05:00 (IST)

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एक साल बाद भी विवादित भर्ती की जांच अधूरी, कागजों में हैं भ्रष्टाचार की परतें 

महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विवि, जांच के लिए चार सदस्यीय टीम का किया गया था गठन

छतरपुर. महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्विद्यालय  में चतुर्थ श्रेणी भर्ती में हुए भ्रष्टाचार की जांच ठंडे बस्ते में चली गई है। भर्ती प्रक्रिया को एक साल से ज्यादा होने के बाद भी जांच पूरी नहीं हो सकी। जिससे भर्ती में हुए भ्रष्टाचार की परतें नहीं खुल पा रही हैं। गड़बड़झाला कैसे हुआ, किसने किया, इसमें कौन-कौन दोषी हैं या फिर भष्टाचार हुआ ही नहीं इसकी तस्वीर साफ न होने से विश्व विद्यालय के दामन पर लगे दाग साफ नहीं हो पा रहे हैं। 
चतुर्थ श्रेणी की भर्ती में भ्रष्टाचार का मामला यूनिवर्सिटी की 31 मार्च 2016 को हुई कार्य परिषद की बैठक में छाया रहा था। तब इस मामले की जांच के लिए चार सदस्यीय टीम के गठन का प्रस्ताव पारित किया गया था। कार्यपरिषद का कहना था कि विवादित भर्ती का मामला गंभीर है। इसकी जांच चार सदस्यीय टीम से कराई जाए। जिसमें रिटायर्ड जज, प्रशासनिक अधिकारी समेत यूनिवर्सिटी में शामिल दो कार्यपरिषदों के सदस्यों को नामित किया जाए। इसके बाद यूनिवर्सिटी प्रबंधन द्वारा एक  जांच समिति बनाई थी। जिसमें भोपाल के एक सेवा निवृत्त जज को शामिल किया था। साथ ही एक डीएसपी को भी शामिल किया था। एक साल से ज्यादा समय गुजरने के बाद भी जांच पूरी नहीं हुई। पिछले दिनों यूनिवर्सिटी के डिप्टी रजिस्ट्रार राजीव मिश्रा को यह दस्तावेज लेकर भोपाल जाना था लेकिन इसी दौरान उनका स्थानांतरण आदेश आ गया। जिससे वह भोपाल नहीं जा सके और यूनिवर्सिटी से रिलीव हो गए। 

यह है विवादित भर्ती का पूरा मामला 
2016 की शुरुआत में विवि द्वारा विभिन्न पदों की भर्ती के लिए विज्ञप्ति निकाली गई थी। मार्च में यूनिवर्सिटी में विभिन्न पदों के लिए साक्षात्कार लेने थे। इससे पहले की यूनिवर्सिटी में साक्षात्कार का सिलसिला शुरू होता कि विवि के  तत्कालीन रजिस्ट्रार डॉ. परीक्षित सिंह द्वारा 1061 आवेदन निरस्त कर दिए गए थे। इसके बाद 13 व 14 मार्च को साक्षात्कार की तिथि घोषित की गई थी। लेकिन इससे पहले ही साक्षात्कार की प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी। जिससे यह मामला गरमा गया था। इसको लेकर आवेदकों ने यूनिवर्सिटी में हंगामा भी किया था। जिसके बाद 16 मार्च को विवि के रजिस्ट्रार डॉ. परीक्षित सिंह का स्थानांतरण आदेश आ गया था लेकिन वह चतुर्थ श्रेणी के 25 पदों पर भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही यहां से रिलीव हुए थे। हालांकि बाद में यूनिवर्सिटी प्रबंधन द्वारा तृतीय श्रेणी के पदों पर भर्ती की प्रक्रिया को स्थगित कर दिया था। इसके बाद डॉ. एलएस सोलंकी यूनिवर्सिटी में रजिस्ट्रार के पद पर पदस्थ हुए थे। उनका स्थानांतरण भी शासन द्वारा भोपाल कर दिया गया।

कार्यपरिषद की बैठक में कर्मचरियों की भर्ती की जांच में देरी पर चर्चा की गई। तय किया गया कि जांच समिति को दो माह का समय दिया जाए। जिससे कि दो माह के अंदर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की भर्ती की जांच सामने आ सके।
डॉ. संजीव तिवारी, रजिस्ट्रार महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी 

यूजी के लिए सालाना फीस को लेकर की चर्चा

छतरपुर. महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विवि की कार्य परिषद की बैठक का आयोजन सोमवार को किया गया। बैठक में विवि के विभिन्न कार्यों को लेकर चर्चा की गई। इस दौरान यूजी में सेमेस्टर प्रणाली खत्म होने पर सालाना कोर्स के लिए फीस पर चर्चा की गई। साथ ही कई प्रस्ताव पारित किए गए।
बैठक से पहले यूनिवर्सिटी के अधिकारियों व कार्य परिषद के सदस्यों ने पौधरोपण किया। इसके बाद विवि के कुलपति डॉ. प्रियवृत शुक्ल की अध्यक्षता में आयोजित बैठक करीब ढाई घंटे तक चली। इस दौरान यूनिवर्सिटी के बजट को लेकर चर्चा की गई। साथ ही अभी तक धारा 28 का पालन कितने कॉलेजों द्वारा किया गया इसके बारे में जानकारी दी गई। साथ ही यूनिवर्सिटी में किस तरह नए कार्य कराए जाए इसको लेकर भी चर्चा की गई। 
बैठक के दौरान महाविद्यालयों की संबद्धता शुल्क को लेकर चर्चा हुई। तब यह बात सामने आई कि अब सेमेस्टर         प्रणाली खत्म होने से विभिन्न कक्षाओं के कोर्स एलुअल के आधार पर होंगे। ऐसे में महाविद्यालयों की संबद्धता शुल्क पर विचार करना होगा। यह तय किया गया कि इसके लिए यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. प्रियवृत शुल्क के  दिशा-निर्देशन में चार सदस्यीय समिति का गठन किया जाएगा। 
कमेटी की अनुशंसा के आधार पर फीस निर्धारित की जाएगी। बैठक में विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ. संजीव तिवारी, कार्यपरिषद के सदस्य अवनीष शर्मा, कमलेश घोष, अतुल त्रिपाठी, भावना झारिया, मोनिका गौड़, एसपी सिंह भदौरिया आदि मौजूद रहे।

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