Amazing Village: ढाई सौ साल पहले हुआ था कुछ ऐसा कि आज भी पहरा देती है उनकी रूह

prabha shankar

Publish: Jun, 21 2017 12:53:00 (IST)

chhindwara
Amazing Village: ढाई सौ साल पहले हुआ था कुछ ऐसा कि आज भी पहरा देती है उनकी रूह

एक गांव का ऐसा सच जो अच्छे-अच्छों को हजम नहीं होता

छिंदवाड़ा.   कुछ नटनी थीं जो अलौकिक शक्तियों से भरी थीं। इसी दल के मुखिया ने गांव वालों को बताया कि जल्द ही पूरा गांव खत्म हो जाएगा। ग्रामीण घबरा गए और उनसे जीवन की याचना करने लगे। बेडनियों ने बताया कि वे गांव को बचा तो लेंगी लेकिन किसी एक बेडऩी को अपनी जान देनी ही पड़ेगी।  इसके बदले में बेडऩी ने गांव वालों से कुछ वचन लिए और कुछ वचन खुद दिए। आज भी बारिश के दौरान उस बेडऩी की आत्मा अपनी कसम पूरी करने जरूर आती है।

छिंदवाड़ा और सिवनी जिले की सीमा पर स्थित ग्राम चक्की खमरिया कभी अनाज पीसने वाली चक्की के लिए पूरे प्रदेश में जाना जाता था। आज भी वह अपनी एक अलग खासियत के लिए चर्चा में रहता है। इस गांव के किसानों को 250 वर्षों से आज तक कभी भी ओलावृष्टि की मार नहीं झेलनी पड़ी। जबकि पड़ोसी गांवों में कई एकड़ की फसल ओलावृष्टि और अतिवृष्टि से हर साल बर्बाद हो रही है।

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क्या है रहस्य
गांव के 56 वर्षीय गुलाब गिरी बताते हैं कि उन्होंने जीवन में अब तक गांव में कभी भी भारी ओलावृष्टि होते नहीं देखी। कभी-कभी बारिश के साथ ओले गिरते तो हैं लेकिन वे कुछ ही देर में पानी में मिल जाते हैं। वे बताते हैं कि पहले सभी गांव मालगुजारों के हुआ करते थे। चक्की खमरिया में करीब 250 वर्ष पहले बेडनियों का एक समूह आया था। वे लोग कला का प्रदर्शन कर लोगों का मनोरंजन किया करते थे और बदले में अनाज लिया करते थे और इसी से उनका गुजारा होता था।

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पूरे गांव की जिम्मेदारी मालगुजारों पर हुआ करती थी। करीब पूरे गांव की जमीन इन्हीं मालगुजारों के नाम हुआ करती थी। बेडिनियों के समूह में कुछ नटनी थीं जो अलौकिक शक्तियां और भविष्य देखने की क्षमता रखतीं थीं। उस समय बरसात का मौसम था। बेडनियों के समूह के मुखिया ने गांव के मालगुजार के पास पहुंचकर भविष्यवाणी की कि जल्द ही इस क्षेत्र में ओलावृष्टि होने वाली है जिससे गांव की फसल बर्बाद हो जाएगी और जमीन कई वर्षों तक बंजर बनी रहेगी। मालगुजार यह सुनकर चिंतित हुए बेडनियों से ही इस समस्या का समाधान पूछा। बेडनियों ने बताया कि वे इस समस्या से निजात तो दिला सकते हैं लेकिन वह प्रक्रिया बहुत कठिन है। यह विद्या बेडनियों में केवल दो नटनी मां-बेटी को ही आती थी। मां गर्भवती थी। यदि मां ओलावृष्टि रोकने का प्रयास करेगी तो सकता है उसका गर्भपात हो जाएगा और वह खुद मृत्यु को प्राप्त हो जाएगी। यदि बेटी प्रयास करेगी तो वह भी मृत्यु को प्राप्त हो सकती है।

दोनों ही स्थिति में जीवन दाव पर था। अंत में बेटी ने ओलावृष्टि रोकने के लिए हां की, लेकिन शर्त रखी कि यदि उसकी मृत्यु होती है उसकी समाधि बनाकर प्रतिवर्ष उसकी पूजा की जाएगी। तभी उस शक्ति का प्रभाव बना रहेगा और हमेशा वह गांव वालों को ऐसी आपदा से बचाने के लिए आती रहेगी। इस पर पूरा गांव इसके राजी हो गया।

नटनी ने ऐसे रोकी ओलों की बारिश
अगले दिन सभी ग्रामीण, मालगुजार और बेडनियों का दल गांव के बीचोंबीच जमा हो गया। आसमान में काले बादल छाए हुए थे और हल्की बूंदाबांदी हो रही थी। नटनी जो करीब 16 वर्ष की थी बैलगाड़ी का पहिया लेकर गांव के बीच में बैठ गई और मंत्र पढऩे लगी। थोड़ी ही देर में जो कुछ हुआ वह चौंकाने वाला था। पूरे गांव में होने वाली ओलावृष्टि पहिये के छेद में समाती गई। इस वाकये को पूरे गांव ने देखा। कुछ मिनटों बाद ओलावृष्टि बंद हो गई, लेकिन इसी के साथ नटनी ने भी दम तोड़ दिया। हालांकि उस वाकये को देखने वाला आज कोई भी जीवित नहीं है, लेकिन यह कहानी के रूप में पीढ़ी दर पीढ़ी आज भी जीवित है। गांव वालों ने नटनी के कहे अनुसार उसकी समाधि बनाई जो आज भी यहां मौजूद है।

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आए दिन यहां ग्रामीण पहुंचतें हैं और उसके बलिदान को याद करते हैं। आज भी पूरे गांव की सीमा नटनी के प्रभाव में बंधी हुई है। तब से आज तक इस गांव में ओलावृष्टि से किसी का बाल भी बांका नहीं हुआ।
 

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