ऐसी मजबूरी कि दिव्यांग पिता ने ही उठाया बेटी का शव, देखें वीडियो...

dinesh sahu

Publish: Jun, 20 2017 12:10:00 (IST)

chhindwara
ऐसी मजबूरी कि दिव्यांग पिता ने ही उठाया बेटी का शव, देखें वीडियो...

झुलसने से गम्भीर रीतिका ने उपचार के दौरान तोड़ा दम, परिजन ने लापरवाही का लगाया आरोप

छिंदवाड़ा . जिला अस्पताल की बदइंतजामी का खमियाजा सोमवार को फिर एक परिवार को भुगतना पड़ा।  अनखाबाड़ी निवासी रीतिका पिता हरीश उइके (12) की झुलसने से हुई मौत के बाद शव को मर्चुरी में से स्वास्थ्य कर्मियों ने इनकार कर दिया। इससे पीडि़त परिवार को ही शव उठाने के लिए विवश किया। इतना ही नहीं नर्स व  स्वास्थ्यकर्मियों ने परिजन से दुव्र्यवहार भी किया। मजबूरी में एक हाथ से दिव्यांग पिता हरीश ने ही बेटी के शव को उठाकर मर्चुरी में रखा।



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 बताया जाता है कि रीतिका अपने घर में चाय बनाने के लिए चूल्हा जलाने का प्रयास कर रही थी। अधिक केरोसिन डालने की वजह से आग भड़की और वह चपेट में आ गई। इसके वह बुरी तरह  झुलस गई। जिला अस्पताल में उपचार के दौरान रीतिका ने रविवार-सोमवार की रात करीब चार बजे दम तोड़ दिया।




बर्न वार्ड में बंद थे एसी व पंखे


बर्न वार्ड में लगे एसी व पंखे घटना के समय बंद थे। तबीयत बिगडऩे की शिकायत करने पर नर्स द्वारा परिजन से अभ्रदता की गई तथा भीतर से दरवाजा बंद कर लिया गया। 


 हालांकि परिजन इसके लिए अस्पताल प्रबंधन  को दोषी बता रहें हैं। उनके अनुसार रीतिका को रविवार सुबह नौ बजे जिला अस्पताल के बर्न वार्ड में भर्ती किया गया था। वह  35 प्रतिशत झुलसी थी और खुद पैदल ही वार्ड तक गई थी। विभाग द्वारा लापरवाही नहीं बरती जाती तो वह जीवित होती। पीडि़त परिवार ने मामले की उचित जांच की मांग की है।



स्टाफ की कमी के चलते बनी समस्या 



मृतक रीतिका की भर्ती फाइल का अवलोकन करने पर पता चला कि वह 80 से 85 प्रतिशत झुलसी हुई थी। एेसी स्थिति में मरीज के बचने की उम्मीद कम रहती है। डॉक्टर तथा स्टाफ की कमी के कारण समस्या बनी हुई है। स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा किए गए दुव्र्यवाहर की जांच कराई जाएगी।



डॉ. शिखर सुराना, प्रभारी सिविल सर्जन 
 

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