दो गांवों का खौफनाक सच: जिंदा जले थे 40, लेकिन अब भी आती है इनके कराहने की आवाज  

prabha shankar

Publish: Jul, 17 2017 07:51:00 (IST)

Chhindwara, Madhya Pradesh, India
दो गांवों का खौफनाक सच: जिंदा जले थे 40, लेकिन अब भी आती है इनके कराहने की आवाज  

कैमरे में हो कैद हो चुके हैं दृश्य और आवाजें, दहशत इतनी कि दिन में भी नहीं गुजरता कोई इनके पास से 

छिंदवाड़ा. ये इंसानों की नहीं, प्रेत आत्माओं की आवाजें हैं, जो दर्द व जलन से कराह रहीं हैं। विलाप करती हैं और बचाव के लिए बुलाती हैं । ग्रामीणों में दहशत और भय का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने अंधेरा होते ही घरों से बाहर निकलना बंद कर दिया है। ये कहीकत है दो अलग-अलग गांवों की। पहले तो सभी को यही लगा कि ये बिल्लियों के रोने की आवाजें हैं लेकिन जैसे-जैसे रात ढलती गई लोगों के रोंगटे खड़े होने लगे। ये आवाजें कभी बिल्लियों के रोने की लग रहीं थीं तो कभी इंसानों के। लेकिन गिनती के कुछ लोगों के अलावा वहां और कोई नहीं था। जब हकीकत सामने आई थी उनके पैरों तले जमीन खिसक गई।




ग्रामीणों ने बताया कि ऐसी आवाजें यहां से रोज आती हैं। शैतानी प्रकोप से बचने के लिए पूजा-पाठ, तंत्र-मंत्र यहां तक कि गांव को बांधने तक की रस्म पूरी हो चुकी है। फिर भी दहशत ऐसी कि कोई दिन में भी यहां से गुजरना नहीं चाहता है। 


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दरअसल बालाघाट के खैरी में सात जून को हुए पटाखा फैक्ट्री विस्फोट में 26 लोगों की जिंदा जलने से मौत हो गई थी। इस घटना के कुछ दिन बाद से ही मौके से लोगों के कराहने और रोने की आवाजें आती हैं। मौके पर लोगों के मोबाइल पर जो भी रिकॉर्ड हुआ उस पर विश्वास करना वाकई मुश्किल था। कभी ये बिल्लियों के रोने की आवाज लगती है तो कभी इंसानों के कराहने की।

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बहरहाल कुछ भी हो। अगर ये मान भी लें कि ये बिल्लियों के रोने की आवाजें हैं तो घटना स्थल से ही हर रात ये घटना लगातार क्यों सामने आ रही है। वहीं दूसरी घटना छिंदवाड़ा के बारगी गांव की है। यहां सहकारी समिति में केरोसिन से आग लगने के कारण 13 लोग मौके पर जिंदा जल गए थे। एक अन्य ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था। पहले यहां भी इसी तरह के मामले सामने आए बाद में उक्त भवन को तोडऩे के बाद ही लोगों ने राहत की सांस ली थी।

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