छिंदवाड़ा के जंगल का राजा कौन, बाघ या तेंदुआ

prabha shankar

Publish: Feb, 17 2017 12:37:00 (IST)

Chhindwara, Madhya Pradesh, India
छिंदवाड़ा के जंगल का राजा कौन, बाघ या तेंदुआ

अंचल के ग्रामीण इस बात को लेकर बहस में व्यस्त हैं कि बाघ ज्यादा खतरनाक है या तेंदुआ


छिंदवाड़ा. पेंच नेशनल पार्क और सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के बीच छिंदवाड़ा के जंगलों में बाघ और तेंदुए दोनों की मौजूदगी का अहसास कई बार हो चुका है।  फिलहाल वन विभाग इस बात को लेकर संशय में है कि इनमें तेंदुए की संख्या ज्यादा है या बाघ की। जबकि हाल ही में  वन्यजीवों के हमले के बाद अंचल के ग्रामीण इस बात को लेकर बहस में व्यस्त हैं कि बाघ ज्यादा खतरनाक है या तेंदुआ। 




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बीते दो वर्षों में बाघ कभी घर के अंदर घुसा मिला तो कभी नाले के किनारे टोह लगाकर शिकार का इंतजार करते दिखा। दोनों ही स्थितियों में दहशत का माहौल बना। वहीं वन विभाग के आला अधिकारियों के चेहरे पर ङ्क्षचता की लकीरें भी देखने को मिली। बाघ की दहशत ग्रामीण भुला भी नहीं पाए थे कि तेंदुए ने लोगों पर हमला करना शुरू कर दिया। सभी हमले गांव से लगे खेतों पर हुए। इनमें एक की जान चली गई जबकि दो लोग गम्भीर रूप से घायल हुए । 


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पानी की तलाश में आते हैं बाहर
विभागीय अधिकारियों के अनुसार ये वन्यजीव शिकार और पानी की तलाश में ही जंगलों से बाहर निकल रहे हैं।  दिन में वे ऐसे स्थानों पर छिपे होते हैं जो लोगों की पहुंच से दूर हों। इस दौरान भूख और प्यास लगने पर ही बाहर निकलते हैं। बाघ को शिकार के लिए कोई भी वन्यजीव मिले तो वह मौका नहीं चूकता लेकिन तेंदुआ बड़े वन्यजीवों को शिकार बनाने का प्रयास कभी नहीं करता। फिलहाल इनमें बाघ ज्यादा हैं तेंदुए यहा कहना मुश्किल है।  

अवैध खनन भी बना परेशानी
जंगल के रहवासी क्षेत्र में बाघ, तेंदुआ के आने के पीछे केवल उनकी संख्या बढऩा कारण नहीं है। जंगल में तेजी से घट रहे पानी के स्रोत इसके प्रमुख कारणों में से एक है। तेजी से बढ़ रहा रेत का अवैध खनन पानी सम्बंधित स्रोतों को खत्म कर रहा है। रहवासी इलाकों से लगे तालाब, कुएं और चट्टानों के बीच जमा बारिश का पानी इन वन्यप्राणियों को अपनी ओर खींच रहे हैं।

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