शादी के एक माह बाद मौत, फिर भी चार नए रूप में जिंदा है यह शख्स

rajendra sharma

Publish: Jun, 29 2017 10:54:00 (IST)

Chhindwara, Madhya Pradesh, India
शादी के एक माह बाद मौत, फिर भी चार नए रूप में जिंदा है यह शख्स

 वैवाहिक जीवन की शुरुआत करने के महज तीन दिन बाद ही मौत हो गई , फिर भी चार नए रूप में जिंदा है श्यामसुंदर 


छिंदवाड़ा/नागपुर. पड़ोसी जिले नागपुर के नरखेड़ निवासी श्यामसुंदर कलंबे मौत के बाद भी चार रूप में जिंदा है। दरअसल, श्यामसुंदर की वैवाहिक जीवन की शुरुआत करने के महज तीन दिन बाद ही मौत हो गई। परिजन ने मरणोपरांत उनकी देहदान करने की अनुकरणीय पहल की है। उनकी मौत के बाद परिजन ने उनका हृदय, दोनों किडनी और लीवर दान कर चार लोगों को नई जिंदगी दी है।  
जानकारी के अनुसार 34 वर्षीय श्यामसुंदर दिल्ली की डीन ठक्कर कंस्ट्रक्शन कम्पनी में एकाउंटेंट के पद पर कार्यरत थे। युवा अवस्था में ही उनकी 22 जून को दुर्घटना में मौत हो गई थी। उनके पार्थिव देह के अंतिम दर्शन करने के लिए शहर में उनके चाहने वालों की भारी भीड़ जुटी। श्यामसुंदर का विवाह 22 मई 2017 को सावरगांव के गिरडकर परिवार की पल्लवी से हुआ था।

जागरूक हो रहे विदर्भवासी

उल्लेखनीय है कि नागपुर में शनिवार 24 जून को पहली बार ग्रीन कॉरिडोर तैयार किया गया और महज 4 मिनट के भीतर लीवर अस्पताल से एयरपोर्ट पहुंचाया गया।  नागपुर के मधुबन ले-आउट नरेंद्रनगर निवासी विनायक रामराव देशकर (67) ने जाते-जाते 5 लोगों को जीवन दान दिया है। शहरवासियों ने भी उनके इस पुण्य काम के लिए हाथ जोड़कर नमन किया।  
देशकर अपने परिवार के साथ पचमढ़ी गए थे। 16 जून को स्नान के दौरान वे बेहोश होकर गिर गए। परिजन ने उनका उपचार कर रहे नागपुर के डॉक्टर से संपर्क किया और उन्हें अस्पताल में भर्ती किया।  22 जून को उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ गई। परिजन ने डॉक्टरों से बातचीत की तो ब्रेन डेड होने का पता चला।  तब विनायक की पत्नी गायत्री, बेटे अभिषेक और अनुराग ने उनकी लीवर, आंखें और अन्य अंग जरूरतमंद लोगों को दान करने की इच्छा जाहिर की। जोन ट्रांसप्लांट कोआर्डिनेशन कमेटी (जेडटीसीसी) के सचिव डॉ. रविंद्र वानखेड़े ने कागजी और वैद्यकीय कार्रवाई के लिए परिजन का मार्गदर्शन किया और विनायक को खामला चौक पर स्थित निजी अस्पताल ले जाया गया। ट्रांसप्लांट कोआर्डिनेटर मंजिरी दामे ने दस्तावेजों की कार्रवाई पूरी की। डॉक्टरों की एक समिति ने जांच कर ब्रेन डेड घोषित किया।  

100 से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात थे

शनिवार  9.30 बजे के दौरान सर्जरी शुरू की गई और पुलिस प्रशासन से लीवर को सुरक्षित एयरपोर्ट तक पहुंचाने के लिए ग्रीन कॉरिडोर मांगा गया।  मुंबई के डॉक्टर भी नागपुर आए थे, लेकिन एयर ट्रैफिक कंट्रोलर ने मौसम खराब होने की जानकारी दी।  इसीलिए सर्जरी भी धीमी गति से की गई। जैसे ही मौसम साफ होने की जानकारी मिली, लीवर को एयरपोर्ट पहुंचाने की कार्रवाई शुरू हो गई।  ट्रैफिक विभाग के डीसीपी रविंद्रसिंह परदेशी, इंस्पेक्टर जयेश भांडारकर, उमेश बेसरकर और बजाजनगर के थानेदार सुधीर नंदनवार दल-बल के साथ तैयार हो गए।  खामला चौक से एयरपोर्ट तक रास्ते पर आवागमन बंद कर दिया गया।  महज 4 मिनट के भीतर एमब्युलेन्स में लीवर को एयरपोर्ट पहुंचा दिया गया।  

अलग-अलग अस्पतालों में पहुंचे थे अंग

डॉक्टरों की टीम की जांच के दौरान पता चला कि विनायक का दिल और फेफड़े किसी के काम नहीं आ सकेंगे। लीवर को मुंबई के निजी अस्पताल में भर्ती मरीज तक समय रहते पहुंचाना जरूरी था।  इसीलिए वहां के डॉक्टरों की टीम चार्टर्ड फ्लाइट से नागपुर आई थी। इसी फ्लाइट में लीवर को मुंबई भेजा गया। जेडटीसीसी की प्रतीक्षा सूची के अनुसार किडनी जरूरतमंद मरीज को दी जाएगी। आंखें डॉक्टर महात्मे आई बैंक को दी गई हैं जबकि चमड़ी को स्किन बैंक में रखा गया है, जिसका इस्तेमाल झुलसे पेशेंट के लिए किया जाएगा। 

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