यहां तैयार होता है अमानक बीज, किसान भाई रहें सावधान

rajendra sharma

Publish: Jun, 28 2017 05:52:00 (IST)

Chhindwara, Madhya Pradesh, India
 यहां तैयार होता है अमानक बीज, किसान भाई रहें सावधान

कृषि मंत्री और सांसद के बीच तीखी नोक-झोक हो चुकी है। सांसद ने कहा था कि अमानक बीजों की बिक्री किसी के संरक्षण में हो रही है। 


छिंदवाड़ा/बालाघाट/नागपुर. महाकौशल और विदर्भ में इन दिनों मानसून सक्रिय है। किसान बोवनी में व्यस्त है और मौके का फायद उठाकर कई दुकान प्रतिबंधित धान बीज बेच रहे हैं। बालाघाट जिले में कार्रवाई के दौरान ऐसे प्रकरण प्रकाश में भी आ चुके हैं।
उल्लेखनीय है कि बीज उत्पादक कंपनियों की गड़बडिय़ों का मामला पहले से ही चर्चा में है। कांग्रेस राकांपा की सरकार के समय विदर्भ की कुछ बीज कंपनियों पर प्रतिबंध लगाया गया था, लेकिन प्रतिबंधित बीजों की अब भी खपत हो रही है। इसी कड़ी में विदर्भ जन आंदोलन समिति के संयोजक किशोर तिवारी ने कहा है कि इन कम्पनियों की जांच के बारे में महाराष्ट्र सरकार से निवेदन किया गया है। सरकार की जांच रिपोर्ट का इंतजार है।

हो चुका है विवाद

गौरतलब है कि कुछ दिनों पहले प्रतिबंधित बीज की बिक्री का मामला मध्यप्रदेश में गूंजा था। मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले के मलाजखंड में सरकारी कार्यक्रम के दौरान कृषि मंत्री गौरीशंकर बिसेन व सांसद बोधसिंह भगत के बीच तीखी नोक-झोक हो गई थी, सांसद ने मंत्री को मंच पर ही काफी कुछ कह दिया था। विवाद से पहले भाषण में सांसद ने कहा था कि यशोदा प्रा. लिमिटेड के धान बीजों की बिक्री से किसान ठगे जाने की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि प्रतिबंधित बीज को किसी के संरक्षण में बेचा जा रहा है। विवाद बढऩे पर दूसरे ही दिन कृषि मंत्री बिसेन ने यशोदा का धान बीज विक्रय प्रतिबंधित कर दिया था।



आदेश भी हो चुका जारी

जबलपुर के कृषि उपसंचालक ने यशोदा के बीज प्रतिबंध के सम्बंध में बकायता आदेश जारी किया था। यशोदा कंपनी विदर्भ के ही हिंगणघाट की है। हिंगणघाट व वर्धा में पहले से ही ऐसे कई कृषि उपज बीज के माफिया सक्रिय है। यहां के बीजों की बिक्री को लेकर तेलंगाना में भी विवाद हुआ था। कपास बीज के मामले में विधानसभा में बहस हुई थी। पृथ्वीराज चव्हाण के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र सरकार के समय कृषि मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटील ने अप्रमाणित बीजों पर पाबंदी लगाई थी। हिंगणघाट व वर्धा की कई कंपनियां चपेट में आईं थीं, लेकिन कुछ समय बाद ही इन कम्पनियों का कारोबार चलने लगा।

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