शंकरवन मेले में पहुंचे हजारों श्रद्धालु

Prashant Sahare

Publish: Jan, 14 2017 12:10:00 (IST)

Chhindwara, Madhya Pradesh, India
शंकरवन मेले में पहुंचे हजारों श्रद्धालु

आस्था का प्रतीक है शंकरवन धाम सनातन काल से ही आस्था से भक्ति से प्रसाद और फल प्राप्त करने की मान्यता चली आ रही है। कुछ ऐसी ही मान्यता इस शंकरवन मेले से जुड़ी हुई है।

छिंदवाड़ा (बिछुआ). बिछुआ. विकासखंड बिछुआ मुख्यालय से 10 किमी दूर स्थित ग्राम पंचायत पानाथावड़ी के ग्राम कुरई में सात जनवरी से 14 जनवरी तक लगने वाला विशाल शंकरवन मेले का आज मंकर संक्राति के दिन दही-लाही के साथ मेले का समापन होगा। आस्था का प्रतीक है शंकरवन धाम सनातन काल से ही आस्था से भक्ति से प्रसाद और फल प्राप्त करने की मान्यता चली आ रही है। कुछ ऐसी ही मान्यता इस शंकरवन मेले से जुड़ी हुई है।  यह मेला वर्ष 1967 में लगाना शुरू हुआ था। तब से आज तक यह विशाल मेला हर वर्ष एक सप्ताह के लिए भरता है। 


ये है मान्यता 
इस विशाल शंकरवन मेले का श्रेय जियालाल मिश्रा को जाता है। मिश्रा का जन्म 16 जनवरी 1938 को ग्राम रहपुरा जिला चित्रगुप्त उत्तर प्रदेश में हुआ था। बताया जाता है कि मिश्रा उस समय घुड़ सवारी के शौकीन थे और घोड़े से ही सवारी करते थे। एक दिन घुड़सवारी करते हुए उन्हें नदी में स्वयं एक शिव लिंग दिखा। जिसके संबंध में ग्रामवासियों से चर्चा कर उन्होंने ग्राम में इस शिवलिंग को मंदिर में स्थापित कर दिया। कहा जाता है कि तब से ही इस मंदिर में लोगों की काफ ी अधिक आस्था है। उस समय से ही यह मेला प्रतिवर्ष विशाल और भव्य रूप में लगता है। यह विशाल शंकरवन मेला लगभग 100 एकड़ भूमि में  लगता है। छिंदवाड़ा जिले में प्रमुख और बिछुआ विकासखंड में यह धार्मिक मेला प्रथम स्थान पर लगता है। मेले में प्रतिदिन हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। साथ ही शिवलिंग की पूजा अर्चना कर सत्यनारायण की कथा करवाते हैं। मेले के सातों दिन लगभग 50 से 100 कथाओं का वाचन होता है। साथ ही श्रद्धालु अपनी मन्नतें पूरी होने पर विशाल भंडारे का भी आयोजन करते हैं। 
 

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