हर हर बम बम से गूंजे शिवालय, यहां एक असुर ने की थी शिव की आराधना

Akanksha Singh

Publish: Jul, 17 2017 02:10:00 (IST)

Lucknow, Uttar Pradesh, India
हर हर बम बम से गूंजे शिवालय, यहां एक असुर ने की थी शिव की आराधना

सावन के दूसरे सोमवार पर शिवभक्तों का हुजूम विभिन्न शिवालयों में भोलेनाथ का जलाभिषेक व रूद्राभिषेक करने के लिए उमड़ पड़ा.

चित्रकूट। सावन के दूसरे सोमवार पर शिवभक्तों का हुजूम विभिन्न शिवालयों में भोलेनाथ का जलाभिषेक व रूद्राभिषेक करने के लिए उमड़ पड़ा. मठ मंदिर शिवालय हर हर बम बम की गूँज से गूँज उठे. शिवनाम के कीर्तन मंत्र स्तुति आराधना के माध्यम से भक्त अपने आराध्य शिव को पूजते नज़र आए. भगवान राम की तपोस्थली चित्रकूट में प्रसिद्द बाबा मत्स्यगजेंद्रनाथ मंदिर में जलाभिषेक करने के लिए भोर की पव फटते ही आस्थावानों का जमघट लगना शुरू हो गया. यही हाल अन्य शिव मंदिरों शिवालयों में रहा. कहा जाता है कि भोले भंडारी की आराधना देव दानवों सभी ने की, क्योंकि भोलेनाथ भाव के भूखे होते हैं और भाव से कोई भी बाबा भोलेनाथ की आराधना कर उनकी कृपा पा सकता है. 


देव दानव सुर असुर सभी भोलेनाथ के लिए भक्ति के मापदण्ड पर एक समान हैं, जिसने भी भाव से भोले भंडारी को पुकारा उनकी आराधना की उसे सहर्ष स्वीकार्य करते हुए शिव ने अपनी कृपा से सुशोभित किया. चित्रकूट एक ऐसा ही स्थान है रिसियन, जहाँ एक असुर ने भोलेनाथ की आराधना कर शिवलिंग स्थापित किया. मान्यता व् विभिन्न धार्मिक उल्लेखों के आधार पर यह स्थान असुर बाणासुर की राजधानी बना और उसकी माँ भी नित्य पास में ही स्थित यमुना नदी में स्नान के बाद शिवलिंग पर जलाभिषेक करती थी. असुर बाणासुर की माँ का नाम कोटरा था जिसके नाम पर यहाँ कोटरा गाँव भी है और ऐसा माना जाता है कि इस क्षेत्र को बाणासुर ने अपनी राजधानी बनाया था. एक अन्य मान्यता व् उल्लेखों के मुताबिक वनवासकाल के दौरान श्री राम ने इस स्थान पर शिव की आराधना की थी व् लगभग 84 हजार ऋषियों ने भी यहां तप किया था जिसके बाद इस स्थान का नाम रिसियन पड़ा. जाने क्या मान्यता क्या है इतिहास इस स्थान का.

वातावरण में चारों तरफ सावन की हरियाली है तो शिवभक्तों की झूमती टोलियां कांवरियां बनकर देश के विभिन्न क्षेत्रों में स्थापित शिवलिंगों पर जलाभिषेक करने के लिए मदमस्त होकर निकल पड़ी हैं. सावन के दूसरे सोमवार पर श्रद्धालुओं ने शिवभक्ति में गोता लगाते हुए विभिन्न मठ मंदिरों शिवालयों में भोले बाबा की आराधना की. भगवान राम की तपोस्थली में भी बाबा औघड़दानी की जय जयकार से माहौल भक्तिमय हो उठा. चित्रकूट यूँ तो गुफाओं कंदराओं जंगलों की धरती कही जाती है और यहां कई ऐसे धार्मिक स्थान हैं जो आदिकालीन हैं, जिनके बारे में विभिन्न धार्मिक पुस्तकों ग्रन्थों लेखों में उल्लेख मिलता है. ऐसे धार्मिक स्थान सुदूर क्षेत्रों घने जंगलों में स्थित हैं जहाँ आम आदमी का जाना पहुंचना शायद थोडा मुश्किल है. सावन के इस पवित्र महीने में पत्रिका आपको जनपद के एक ऐसे ही शिव स्थान के बारे में बताएगी जो घनघोर जंगल व् बीहड़ में स्थित है. गुफा के अंदर स्थापित शिवलिंग अगाध आस्था का केंद्र है. अब धीरे धीरे इस स्थान पर शिवभक्तों का आवागमन जारी हो चुका है. मनोरम वादियों में स्थित इस स्थान का नाम है "रिसियन".

असुर बाणासुर ने स्थापित किया शिवलिंग

जनपद मुख्यालय से लगभग 60 किलोमीटर दूर मिर्जापुर झांसी राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित मऊ थाना क्षेत्र के यमुना किनारे घनघोर जंगल में स्थित रिसियन नाम के इस शिव स्थान का उल्लेख विभिन्न धार्मिक उल्लेखों में उल्लिखित है. ऐसी मान्यता है कि असुर बाणासुर व् उसकी माँ कोटरा परम शिवभक्त थे. माँ व् पुत्र शिवभक्ति में तल्लीन रहते थे. शिवभक्ति से ओतप्रोत असुर बाणासुर ने इस स्थान पर एक गुफा में शिवलिंग की स्थापना करते हुए सच्चे मन से शिव आराधना की. असुर बाणासुर की माँ कोटरा नित्य यमुना नदी में स्नान कर गुफा में स्थापित शिवलिंग का जलाभिषेक किया करती थीं. असुर बाणासुर की मां के नाम पर इस क्षेत्र में कोटरा गांव भी है. इस गाँव के बाशिंदों का इस स्थान के प्रति अटूट विश्वास व् आस्था कायम है. इसी स्थान पर असुर बाणासुर ने तप कर शिव को प्रसन्न किया था. वनवासकाल के दौरान जब श्री राम माता सीता व् लक्ष्मण के साथ चित्रकूट आए तो उन्होंने भी इस स्थान का दर्शन कर शिव की आराधना की, ऐसी मान्यता व् उल्लेख वाल्मिकी रामायण में मिलता है. इस स्थान का नाम रिसियन पड़ने के पीछे यह कहा जाता है कि लगभग 84 हजार ऋषियों ने इस घनघोर जंगल में रहते हुए तप किया व् शिव आराधना करते हुए भक्ति के चरमोत्कर्ष को प्राप्त किया तब से इस स्थान का नाम रिसियन पड़ा.

गुफा में स्थापित है शिवलिंग

रिसियन गुफा के अंदर प्रवेश करते ही आपको ऐसा लगेगा कि आप शायद पाषाण युग में आ गए हैं. बेहद छोटी गुफा में स्थापित है शिवलिंग. ख़ास बात यह कि इसके अंदर अदृश्य जल स्रोत से निरंतर शिवलिंग पर जल गिरता रहता है. कई स्थानीय लोगों ने तो सावन के महीने में यहां जल की गिरती हुई बूंदों से ॐ की ध्वनि सुनाई देने की बात भी अन्य लोगों को बताई. लेकिन इस ध्वनि के निकलने का कोई निश्चित समय नहीं बताया गया. सावन के महीने में कई शिवभक्त इस गुफा के अंदर स्थापित शिवलिंग का जलाभिषेक व् रूद्राभिषेक करने आते हैं.

भारतीय पुरात्तव की देखरेख में है यह स्थान

सुंदर वनों छोटे जल स्रोतों से सुशोभित रिसियन भारतीय पुरात्तव सर्वेक्षण के आधीन है फिर भी उपेक्षित है. स्थानीय लोगों की आस्था की बदौलत यहां वर्ष भर यहां छोटे मोटे धार्मिक अनुष्ठान चलते रहते हैं लेकिन सरकारी व् प्रशासनिक उपेक्षा के चलते इस स्थान का बहुत विकास नहीं हो पाया. कई वर्षों तक यह स्थान डकैतों की शरणस्थली बना रहा जिस दौरान कोई भी अन्य व्यक्ति यहां जाने की हिम्मत नहीं करता था. दस्युओं के खात्में के बाद अब भक्तों का आवागमन गाहे बगाहे होता रहता है.

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