मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में लगातार चौथे माह हुई वृद्धि

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मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में लगातार चौथे माह हुई वृद्धि

मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के अच्छे दिन आने के संकेत लगातार मजबूत होते जा रहे हैं। इससे लाखों बेरोजगार हाथों को रोजगार मिलने की संभावना भी बनने लगी है। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में अप्रेल में लगातार चौथे महीने वृद्धि दर्ज की गई है। हालांकि, वृद्धि की रफ्तार में इससे पिछले महीने के मुकाबले ज्यादा बदलाव नहीं देखा गया, लेकिन सेक्टर के परफॉर्मेंस में स्थिरता और आने वाले दिनों में बेहतरी के संकेत साफ हैं। 

नई दिल्ली. मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के अच्छे दिन आने के संकेत लगातार मजबूत होते जा रहे हैं। इससे लाखों बेरोजगार हाथों को रोजगार मिलने की संभावना भी बनने लगी है। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में अप्रेल में लगातार चौथे महीने वृद्धि दर्ज की गई है। हालांकि, वृद्धि की रफ्तार में इससे पिछले महीने के मुकाबले ज्यादा बदलाव नहीं देखा गया, लेकिन सेक्टर के परफॉर्मेंस में स्थिरता और आने वाले दिनों में बेहतरी के संकेत साफ हैं। अप्रेल के दौरान नए ऑर्डर में भी वृद्धि दर्ज किया गया, हालांकि उत्पादन वृद्धि कुछ हल्की ही रही। 

निक्केई मार्किट इंडिया मैन्युफैक्चरिंग पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) अप्रेल में भी मार्च के ही समान 52.5 अंक पर रहा। यह सूचकांक देश में विनिर्माण क्षेत्र की गतिविधियों के बारे में बताता है। पीएमआई सूचकांक का 50 से अधिक रहना इस सेक्टर के विस्तार को दर्शाता है, जबकि इससे कम अंक रहने से सेक्टर की गतिविधियों में गिरावट का संकेत मिलता है। 

अप्रैल माह के दौरान हालांकि, माल के नये आर्डर में अच्छी तेजी रही है और निर्यात आर्डर में लगातार तीसरे माह वृद्धि रही लेकिन जहां तक विस्तार कार्य की बात है मार्च के मुकाबले इसमें कुछ सुस्ती रही है। पिछले साल नोटबंदी के बाद आर्थिक गतिविधियों में आई गिरावट के बाद अप्रैल चौथा महीना है, जब विनिर्माण गतिविधियों में वृद्धि दर्ज की गई है।

डिमांड व ऑर्डर बढऩे का असर
आईएचएस मार्किट की अर्थशास्त्री और रिपोर्ट की लेखिका पॉलियाना डे लिमा ने कहा कि घरेलू स्तर पर अच्छी मांग के साथ-साथ विदेशी बाजारों से नए ऑर्डर में वृद्धि से कुल मिलाकर भारतीय विनिर्माताओं के नए व्यवसाय में अप्रैल माह के दौरान तेजी का रख रहा। मुद्रास्फीति के मामले में रिपोर्ट में कहा गया है कि अप्रेल में लगातार 19वें महीने खरीद लागत बढ़ी है। इसके बावजूद, पांच प्रतिशत से भी कम विनिर्माताओं ने अप्रेल माह में अपने उत्पादों के दाम बढ़ाए, जबकि 93 प्रतिशत ने कोई बदलाव नहीं होने का संकेत दिया।

रिजर्व बैंक ने अप्रेल में जारी मौद्रिक नीति में रेपो दर को 6.25 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखा, जबकि रिवर्स रेपो दर को 5.75 प्रतिशत से बढ़ाकर 6 प्रतिशत कर दिया था।

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