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सीकर.इराक संकट से भारत लौटे लोग अब वहां के हाल बयां कर रहे हैं। लोगों ने वहां ...

सीकर

Updated: January 16, 2015 12:03:24 pm

सीकर.इराक संकट से भारत लौटे लोग अब वहां के हाल बयां कर रहे हैं। लोगों ने वहां के आंतक का आंखों देखा हाल बताया तो हर किसी का दिल कांप गया। इराक के आंतक प्रभावित शहरों में आंतकियों ने ढूंढ-ढूंढ़ कर फौजियों की हत्या की। दिनभर सिर्फ गोलियों और बमों की आवाजें ही सुनाई देती थीं। घरों में छिपे लोगों के पास राशन खत्म होने की कगार पर था। मदद के लिए कोई भी आगे नहीं आ रहा था।

दिन में महज आधे घंटे के लिए दुकानें खुलती थी, इस दौरान ही सामान लाया जाता था। इसमें भी भारतीयों को बाहर जाने की इजाजत नहीं दी गई थी। केवल बांग्लादेशी नागरिकों को ही बाहर जाने की इजाजत थी। मजदूरी के लए इराक के बसरा शहर में गए शौकत ने एक महीने वहां बिताए दिनों की पूरी कहानी पत्रिका को बताई।

फंसे थे 150 लोग
शौकत ने बताया कि बसरा की एक कंपनी में काम करने वाले करीब 150 लोग थे। सभी लोगों को कंपनी के अंदर ही बंधक बनाकर रखा गया था। भारतीय समाचार पत्रों में बंधक बनाए जाने की खबर मिलने के बाद दूतावास हरकत में आया। दूतावास के लोगों ने उनसे संपर्क साधा। इसके बाद राशन और अन्य साामन की व्यवस्था की गई। शौकत ने बताया कि एक बार तो ऎसा लगा कि वे भारत कभी नहीं जा पाएंगे। बाद में परिवार के लोगों और दूतावास के कर्मचारियों ने संपर्क साधा तो वतन वापसी की आस जगी।

बंधक बना मांगी रकम
पलसाना. रामदास का बास और सामोता का बास गांव के युवक इराक के बगदाद में इंजीनियरिंग एंटरप्राइजेज में ठेकेदार के मार्फत काम करने गए थे। रामदास का बास के मुक्तिलाल ने बताया कि पहले तो वहां काम नहीं मिला बाद में जब काम मिला तो कुछ दिनों बाद हिंसा भड़क गई। जिससे वह एक जगह बंधक बनकर ही रह गया। हिंसा बढ़ने लगी तो उसने वतन वापस लौटने का मन बनाया। लेकिन कंपनी में ठेकेदार ने पासपोर्ट छीन लिया और घर भेजने के बदले 2000 हजार डॉलर मांगे। सामोता का बास निवासी राजेन्द्र यादव से भी ठेकेदार ने पासपोर्ट जब्त करने के बाद घर भेजने के बदले रूपए मांगे थे।

खबरें सुन डर जाते थे
इराक से लौटे युवकों ने बताया जहां वो ठहरे थे उनके कैंप के आस-पास तो हिंसा नही हुई लेकिन जब आसपास के शहरों में हो रही घटनाओं के बारें में सुनते थे तो उनका दिल दहल उठता था। उनके कैंप से 30 किलोमीटर दूर पंजाब के एक युवक के गोलियां लगने की खबर सुनी तो उनका दिल जवाब दे गया। ऎसी घटनाओं के बारे में सुनने के बाद जल्द से जल्द घर लौटने की इच्छा करती लेकिन ठेकेदार की तानाशाही के आगे वो बेबस थे।

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