बचपन में ही सिर से उठ गया था पिता का साया; मेहनत की भट्टी में तप कर 'खरा सोना' बना है ये भारतीय गेंदबाज!

Rahul Mishra

Publish: Jun, 18 2017 11:23:00 (IST)

Cricket
बचपन में ही सिर से उठ गया था पिता का साया; मेहनत की भट्टी में तप कर 'खरा सोना' बना है ये भारतीय गेंदबाज!

यह खिलाड़ी पिछले करीव 3 सालों से सुर्ख़ियों में है। रफ़्तार, स्विंग और डेथ ओवरों में सटीक यॉर्कर ही इसकी पहचान है। लेकिन इसके निजी जीवन से जुड़ीं सारी बातें लोग शायद नहीं जानते हैं। नए-नए मैच विजेता इसकी जगह लेने की ताक में रहते हैं, लेकिन ये गेंदबाज कभी विचलित नहीं हुआ। इसने हर फॉर्मेट में खुद को साबित किया...

नई दिल्ली: यह खिलाड़ी पिछले करीव 3 सालों से सुर्ख़ियों में है। रफ़्तार, स्विंग और डेथ ओवरों में सटीक यॉर्कर ही इसकी पहचान है। लेकिन इसके निजी जीवन से जुड़ीं सारी बातें लोग शायद नहीं जानते हैं। नए-नए मैच विजेता इसकी जगह लेने की ताक में रहते हैं, लेकिन ये गेंदबाज कभी विचलित नहीं हुआ। इसने हर फॉर्मेट में खुद को साबित किया। क्या आईपीएल और क्या अंतराष्ट्रीय क्रिकेट मैच! हर जगह इसने अपनी छाप छोड़ी है।

जी हाँ! हम आज यहाँ बात कर रहे हैं भारतीय तेज गेंदबाज और यॉर्कर किंग जसप्रीत बुमराह की। जिसने अपनी गेंदबाजी का लोहा विश्वभर में मनवाया है। लेकिन जसप्रीत का भारतीय टीम तक पहुँचने का सफर बेहद मुश्किल भरा रहा है। जिसके बारे में हम आपको आज बताने जा रहे हैं।


भारत में क्रिकेट के प्रति किशोरों का जुनून दिन प्रतिदिन परवान चढ़ रहा है। छोटे शहरों से राज्य-राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी नहीं निकलते। इस मिथक को यहां के क्रिकेटरों ने झुठलाया है। यहां बीते तीन से चार वर्षो में ऐसे कई खिलाड़ी राज्य एवं राष्ट्रीय पटल पर अपनी पहचान बनाने में सफल रहे हैं। कुछ ऐसी ही कहानी है भारतीय पेश बैटरी जसप्रीत बुमराह की।

साल 2013 से पहले शायद ही कोई क्रिकेट प्रेमी जसप्रीत बुमराह को पहचानता हो लेकिन आज इस गेंदबाज ने अपनी मेहनत और अपनी गेंदबाजी के दम पर भारतीय टीम में अपनी खास और स्थाई जगह बना ली है।

Image result for jaspret bumrah and teemगुजरात के अहमदाबाद में 6 दिसंबर 1993 को जसबीर सिंह- दलजीत के घर जसप्रीत का जन्म हुआ था. पिता जसबीर सिंह का खुद का बिज़नेस था और मां दलजीत एक प्राइमरी स्कूल में बतौर प्रिंसिपल कार्यरत थीं। लेकिन जसप्रीत के 7 साल की उम्र होने के बाद उनके सिर से पिता का हाथ उठ गया। जिसके बाद उनकी मां दलजीत ने ही उन्हें पाल-पोस कर बड़ा किया। बचपन से ही बुमराह को क्रिकेट में काफी दिलचस्पी थी. लेकिन उन्होंने कहीं से कोचिंग नहीं ली, वो घर पर ही गेंदबाजी का अभ्यास किया करते थे। एक दिन ऐसे ही मां ने शोर से तंग आकर गुस्से में कह दिया कि ऐसे गेंद फेंको जिससे शोर न हो।
Image result for jaspret bumrah and teemजसप्रीत ने मां की बात मान ली और इसके बाद वो ज्यादातर बॉल दीवार के निचले सिरे पर किया करते थे, ताकि टप्पा ज़मीन पर न पड़े और जिससे शोर न हो। बस यहीं से अभ्यास करते करते बुमराह यॉर्कर गेंद के बेताज बादशाह बन गए।
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4 अप्रैल 2013 को मुंबई इंडियंस की ओर से आईपीएल में अपना डेब्यू मैच खेलते हुए उन्होंने रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के खिलाफ 3 विकेट झटके। इसमें उन्होंने 32 रन देकर 3 विकेट झटके। जसप्रीत ऐसे पहले गेंदबाज थे जिसने अपने पहले ही मैच में तीन विकेट झटके थे। बस इसके बाद जसप्रीत बुमराह से वापस कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा। अपनी बेहतरीन गेंदबाजी के दम पर वो भारतीय राष्ट्रीय टीम के चयनकर्ताओं की निगाहों में आये और उन्हें टीम इंडिया में जगह मिल गई। तब से अब तक बुमराह अपनी गेंदबाजी से विरोधी टीम के बल्लेबाजों को चकित करते आये हैं।

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