डाक के जरिए दिया गया तलाक, केरल के कोर्ट ने किया रद्द 

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डाक के जरिए दिया गया तलाक, केरल के कोर्ट ने किया रद्द 

 देश में तीन तलाक को लेकर जारी विवाद के बीच केरल में मलप्पुरम की एक अदालत ने एक अहम फैसला सुनाया है, जिसमें पांच वर्ष पहले डाक के जरिए दिये गए तीन तलाक को रद्द कर दिया है। 

मलप्पुरम. देश में तीन तलाक को लेकर जारी विवाद के बीच केरल में मलप्पुरम की एक अदालत ने एक अहम फैसला सुनाया है, जिसमें पांच वर्ष पहले डाक के जरिए दिये गए तीन तलाक को रद्द कर दिया है। मलप्पुरम परिवार अदालत के न्यायाधीश रमेश भाई ने एरिक्कोड ओर्नगैटिल के निवासी अली फैजी पावन्ना द्वारा पांडाराकण्डी की जमीला को दिए गए तीन तलाक को सही कारण नहीं होने का कारण खारिज कर दिया। 

2012 में डाक के जरिए दिया था तलाक
फैजी ने 2012 में डाक के जरिए अपनी पत्नी को तलाक दे दिया था। इसके बाद जमीला ने कानूनी प्रक्रिया एवं गुजारा भत्ता बढ़ाने के लिए अदालत में अपील की थी। जमीला की अर्जी पर सुनवाई करते हुये अदालत ने पाया कि तलाक देते समय कुरान में तय किये गये नियमों का पालन नहीं किया गया था तथा तलाक के लिए कोई वाजिब कारण नहीं बताया गया था। 

तलाक के बाद फैजी कर चुका है तीन और शादियां
अदालत ने 2012 में उत्तर प्रदेश की शेमी आया केस में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को आधार बनाया, जिसमें उच्चतम अदालत ने पाया था दो रिश्तेदारों की मध्यस्थता के बाद भी आरोपी ने मुद्दे को सुलझाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया था। फैजी को पहली पत्नी से एक बेटा है। इसके बाद उसने तीन और शादियां की। 

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