आर के पचौरी ने IPCC के अध्यक्ष पद से दिया इस्तीफा 

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आर के पचौरी ने IPCC के अध्यक्ष पद से दिया इस्तीफा 

संयुक्त राष्ट्र की पर्यावरण आईपीसीसी  के अध्यक्ष पर से राजेन्द्र के पचौरी ने इस्तीफा दे दिया

नई दिल्ली। यौन उत्पीड़न का सामना कर रहे राजेन्द्र के पचौरी ने संयुक्त राष्ट्र की पर्यावरण आईपीसीसी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है। पचौरी ने हालांकि आरोप का खंडन किया है। मंगलवार को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, पचौरी द्वारा पद छोड़ने के फैसले के बाद आईपीसीसी के ब्यूरो ने उपाध्यक्ष इस्माइल अल गिजौली को कार्यवाहक अध्यक्ष बनाने पर सहमति जताई है। बता दें की दिल्ली की एक 29 वर्षीय महिला कर्मचारी ने पचौरी पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था इसके बाद पुलिस मामले की जांच शुरू कर थी।

74 वर्षीय पचौरी दुनिया की सबसे उच्च पर्यावरण संस्था के अधिकारियों में से एक है। दि एनर्जी एंड रिर्सोसेस इंस्टीट्यूट" (टेरी) के एक रिसर्चर का कहना है कि जब उसने सिंतबर 2013 में नॉन प्रॉफीट थिंक टैंक ज्वाइन किया था तबसे ही वैज्ञानिक पैचारी ने उसे परेशान करना शुरू कर दिया था। हालांकि पचौरी ने आरोपों का खंडन किया। वहीं महिला ने सबूत के तौर पर कई सौं एमएस और व्हाट्सअप मैसेज सौंपे है। वहीं इसके जबाब में पचौरी के वकील कहना है कि उनका कम्प्यूटर और मोबाइल हैक कर लिया गया था।

हालांकि पचौरी इन आरोपों से इनकार कर दिया है। साकेत जिला अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश राजकुमार त्रिपाठी ने पचौरी की जमानत याचिका पर जांच अधिकारी को नोटिस जारी कर 26 फरवरी तक जवाब मांगा है। अदालत ने जमानत के साथ संलग्न इलाज के कागजों की जांच कर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।

इस पर अदालत ने पूछा कि पचौरी को किस तरह की बीमारी है। लूथरा ने कहा, हमने उनकी बीमारी के बाबत सारे मेडिकल रिकॉर्ड जमा किए हैं जिसमें ह्वदय रोग एवं यूटीआई से जुड़े मामले शामिल हैं। उन्होंने अदालत को बताया कि उच्च न्यायालय ने 19 फरवरी से लेकर आज की तारीख तक पचौरी को राहत दी थी और इसी वजह से वह अग्रिम जमानत अर्जी दाखिल कर रहे हैं।

बहरहाल, शिकायतकर्ता के वकील प्रशांत मेंदीरत्ता ने अदालत से मामले की सुनवाई कल करने का अनुरोध किया। मेंदीरत्ता ने कहा, "जांच अधिकारी कल तक जवाब दे सकते हैं और मेडिकल रिकॉर्ड का सत्यापन बहुत आसानी से किया जा सकता है। आरोपी पर लगाए गए आरोप बहुत गंभीर हैं जिसमें शिकायतकर्ता को दबोचना और शारीरिक हमला शामिल है।

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