जहां डूब जाता था हाथी वहां खरगोश के डूबने लायक नहीं है पानी

Widush Mishra

Publish: Apr, 21 2017 03:46:00 (IST)

Damoh, Madhya Pradesh, India
 जहां डूब जाता था हाथी वहां खरगोश के डूबने लायक नहीं है पानी

गौंडवाना शासन काल का ऐतिहासिक जोगीडाबर जलाशय खतरें में

दमोह. हटा ब्लॉक के मडिय़ादो में गौड़वाना शासनकाल के समय निर्मित कराया गया जलाशय जिसे जोगीडाबर के नाम से जाना जाता है, उसकी पहले यह विशेषता थी कि इसके पानी में पहले हाथी भी डूब जाता था, लेकिन वर्तमान में दुर्दशा का शिकार होकर अब इसमें खरगोश के डूबने लायक पानी नहीं बचा है। 

जोगीडाबर जलाशय हकीकत में तो एक जंगली नाला है, जो जंगल से लगभग आठ किमी  दूरी से प्रकट होकर मडिय़ादो की ओर बहता है। उपतहसील मडिय़ादों में कस्बे के किनारे गौड़वाना शासन काल में निर्मित बारहद्वारी किले को छूता हुआ यह जलाशय बारह मासी जल भराव से लबालब रहता था। 

राजशाही समाप्त होने के बाद लोकतंत्र शाही के जिम्मेदार लोगों ने इस प्राकृतिक जलस्रोत को उपेक्षित करना शुरू कर दिया। इसके किनारें पर अतिक्रमण होते रहे और घरों से निकला गंदा पानी इसमें समाता गया। इसके जीवनकाल में कभी भी सफाई अभियान नहीं चलाया गया, जिससे यह जलस्रोत अब दम तोड़ चुका है। 

स्थानीय निवासी बाबूलाल रैकवार का कहना है कि एक दशक पहले तक इस नाला की गहराई बहुत थी, जिस स्थान पर अब तीन चार फुट पानी शेष रह गया है। उस स्थान पर मई जून के महीने में हाथी को थाह मुशकिल से मिलती थी। ऐसा ही जीवन लाल कुशवाहा का कहना है कि जोगीडाबर में निरंतर पुराव हो रहा है। इस वर्ष तो बहुुत ही खराब दुर्गति हो चुकी है। अगर समय रहते जिम्मेदारों ने इसके अस्तित्व पर बचाने ध्यान नहीं दिया तो वह दिन दूर नहीं जब यहां जलाशय के स्थान पर खेल मैदान दिखाई देने लगेगा।

यहां शिवमंदिर घाट, जोगीडाबर के घाटों से दूर पानी पहुंच चुका है। बारहद्वारी और बाबा घाट पर भी ग्रामीण निस्तार करते नहाते धोते थे, लेकिन देख रेख के अभाव में इन घाटों पर भी गंदगी के कारण अस्तित्व समाप्त हो रहा है। प्रतिवर्ष पंचायत द्वारा हजारों रुपए सफाई और जलाशय की गहराई में खर्च करने का दावा किया जाता है, लेकिन जमीनी हकीकत जुदा है। यहां पिछले वर्ष गहराई के नाम पर महज दो घंटे जेबीसी मशीन चलाई गई थी। 


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