अब मास्टर प्लान की समीक्षा, कहीं छेड़छाड़ की तैयारी तो नहीं

Sunil Sharma

Publish: Jun, 24 2017 01:43:00 (IST)

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अब मास्टर प्लान की समीक्षा, कहीं छेड़छाड़ की तैयारी तो नहीं

सरकार ने मास्टर प्लान की समीक्षा के नाम पर संशोधन करने के आदेश दे दिए हैं

जयपुर। सरकार ने मास्टर प्लान की समीक्षा के नाम पर संशोधन करने के आदेश दे दिए हैं। प्रदेश में 190 से अधिक नगरीय निकाय हैं, जिनमें अधिकांश के मास्टर प्लान बनकर तैयार हो गए। अब इन्हीं मास्टर प्लान में कमियों को दूर करने और प्रभावी बनाने के नाम पर समीक्षा की जाएगी। स्वायत्त शासन विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है। इसमें सभी नगर पालिकाओं को कहा गया है कि वे नगर पालिका अधिनियम के तहत प्रक्रिया अपनाते हुए मास्टर प्लान में समीक्षा के लिए विभाग को अवगत कराएं।

सरकार ने माना है कि मास्टर प्लान बनाते समय नगर पालिकाओं की भागीदारी नगण्य रही, जिसके कारण मौके की स्थिति और प्लान में निर्धारित भू-उपयोग में विरोधाभास आ रहा है। विभाग ने पत्र में इसका जिक्र किया है। इससे साफ है कि पहले तो एसी कमरों में बैठकर शहरों के नियोजन का ब्लू प्रिंट तैयार कर लिया और सरकार अब उसी को अपने हिसाब से संशोधन करने का काम करेगी।

सूत्रों के मुताबिक आगामी चुनाव को देखते हुए यह सब कुछ किया जा रहा है। जबकि, अफसरों ने इसके शहरों के बेहतर विकास के लिए जरूरी बताया है।

हाईकोर्ट की रोक, निकाली गली
बड़ी आबादी के लिहाज से जरूरत नहीं होने पर मास्टर प्लान में संशोधन को लेकर हाईकोर्ट ने रोक लगा रखी हैै। लेकिन विभाग ने इसकी गली निकाल ली। सरकार ने नगर पालिका अधिनियम 2009 की धारा 165 का हवाला दिया है। इसमें उल्लेख है कि 10 साल के भी प्लान की समीक्षा की जा सकती है।

पहले अध्ययन, फिर फाइनल हो सर्वे
निदेशालय ने साफ किया है कि सर्वे दोबारा होगा और उसके आधार पर संशोधन किया जाएगा। मौके पर भू-उपयोग क्या है और प्लान में क्या दर्शाया हुआ है, इसका भी दोबारा अध्ययन कर सर्वे कर रिपोर्ट तैयार होगी।

निकायों को मिलें अधिकार
इस प्रक्रिया के पीछे एक ओर कारण बताया जा रहा है। सरकार चाहती है कि मास्टर प्लान बनने के अधिकार नगर पालिकाओं को ही मिलें। केन्द्र सरकार की अमृत योजना में भी निकायों को प्रभावी बनाने और ज्यादा अधिकार देने के लिए कहा जाता रहा है।

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