शिक्षा है जरूरी, पर स्कूल पहुंचने के लिए उफनती नदी पार करना है मजबूरी

deepak dilliwar

Publish: Oct, 18 2016 08:42:00 (IST)

Dhamtari, Chhattisgarh, India
शिक्षा है जरूरी, पर स्कूल पहुंचने के लिए उफनती नदी पार करना है मजबूरी

शिक्षा वर्तमान समय में सबसे प्राथमिक जरूरत है। शिक्षा के विकास के लिए सरकार द्वारा नई-नई योजनाएं भी चला रही है। लेकिन छत्तीसगढ का यह गांव सरकार की संपूर्ण योजनाओं से परे है

शैलेंद्र नाग@धमतरी. शिक्षा वर्तमान समय में सबसे प्राथमिक जरूरत है। शिक्षा के विकास के लिए सरकार द्वारा नई-नई योजनाएं भी चला रही है। लेकिन छत्तीसगढ का यह गांव सरकार की संपूर्ण योजनाओं से परे है। बच्चों को सकूल जाने के लिए जान जोखिम में डालकर अधूरे बने पुलिया को पार करना पड़ता है खल्लारी का रपटा अधूरा होने के कारण ग्रामीणों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बारिश के दिनों में यहां चमेदा, मासूलखोई और नयापारा का आवागमन पूरी तरह प्रभावित हो जाता है। स्कूली बच्चों को तो जान जोखिम में डालकर रपटा पार करना पड़ता है। जिला प्रशासन से यहां लगातार पुलिया बनाने की मांग की जा रही हैं।

जिला मुख्यालय धमतरी से 95 तथा ब्लाक मुख्यालय नगरी से 35 किमी दूरस्थ खल्लारी और सोंढूर नदी क्षेत्रवासियों के लिए बड़ी मुसीबत का कारण बन गया है। खल्लारी सीआरपीएफ कैम्प के नीचे खल्लारी नदी बहती है। यहां सालभर से रपटा निर्माण का काम चल रहा है। उल्लेखनीय है कि नदी के उस पार करीब 1 किमी की दूरी पर नयापारा बस्ती और चमेदा तथा मासूलखोई गांव भी है। ये गांव खल्लारी और करही के आश्रित हैं, लेकिन सुविधाओं के मामले में यहां कुछ भी नहीं है। बारिश का चौमासा इन गांवों पर आफत बनकर टूटता है। अब भी खल्लारी रपटा में 2-3 फीट पानी ऊपर चल रहा है। बच्चे मजबूरी में अपनी जिंदगी दांव पर लगाकर इसी रपटे से स्कूल जाते है। इससे परिजनों को हमेशा भय बना रहता है।

रपटा के बदले पुल चाहिए
ग्रामीण रामसाय नेताम, देवसिंह ध्रुव, कलीराम, धीराज मंडावी आदि ग्रामवासियों नेे बताया कि खल्लारी और सोंढूर नदी को पार करने के लिए पुलिया निर्माण की मांग की गई थी, लेकिन यहां रपटा बनाया जा रहा है। उन्होंने आगे बताया कि यहां चिकित्सा सुविधा का भी अभाव है। मजबूरी में उन्हें 6 किमी दूर उप-स्वास्थ्य केंद्र रिसगांव में इलाज के लिए जाना पड़ता है। अक्सर नदी में उफान रहता है, जिसके कारण अस्पताल तक पहुंचना भी मुश्किल होता है। उनका कहना है कि दोनों नदियों में पुलिया का निर्माण कर दिया जाए, तो निश्चित ही इसका लाभ ग्रामीणों को मिलेगा। 

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