खुद की परवाह किए बिना आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बच्चों को बना रहे सेहतमंद

Dhamtari, Chhattisgarh, India
खुद की परवाह किए बिना आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बच्चों को बना रहे सेहतमंद

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के आने के बाद स्वास्थ्य के क्षेत्र में काफी सुधार हुआ है। खासकर कुपोषण के क्षेत्र में अप्रत्याशित रूप से उपलब्धि मिली है। इसके बाद भी कार्यकर्ता शासन की उपेक्षा के शिकार हैं

धमतरी. आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के आने के बाद स्वास्थ्य के क्षेत्र में काफी सुधार हुआ है। खासकर कुपोषण के क्षेत्र में अप्रत्याशित रूप से उपलब्धि मिली है। इसके बाद भी कार्यकर्ता शासन की उपेक्षा के शिकार हैं। उल्लेखनीय है कि जिले में 1050 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हैं, जहां इतने ही कार्यकर्ता वहां कार्यकर्ता हैं। इसके अलावा करीब 1008 सहायिका हैं, जो 62 हजार बच्चों की देखरेख करती हैं। गुरूवार को पत्रिका टीम ने शहर के आंगनबाड़ी केन्द्रों में पहुंचकर कार्यकर्ताओं को शासन की ओर से दी जाने वाली सुविधाओं के बारे में पड़ताल की। कार्यकर्ताओं ने बताया कि वे जिले को कुपोषण मुक्त करने भरपूर प्रयास कर रही हैं। अपने बच्चों की तरह इनकी देखभाल कर रही हैं और इसका सार्थक परिणाम भी आमने आ रहा है, लेकिन शासन उनकी जरूरतों पर ध्यान नहीं दे रहा है।


मेहनत का नहीं मिल रहा फल
कार्यकर्ताओं ने बताया कि उनकी मेहनत का फल नहीं मिल रहा है।  निर्वाचन, सुकन्या योजना, नोनी सुरक्षा योजना, पल्स पोलियो, नवाजतन योजना, आधार कार्ड, स्मार्ट कार्ड समेत अन्य कार्यों में भी उनका सहारा लिया जाता है। इसलिए वे हमेशा व्यस्त रहती हैं। परिवार के लिए भी समय नहीं निकाल पाता हैं।


कलक्टर दर से भी कम है मेहनताना
सन् 2007 से वे कार्यकर्ता के रूप में काम कर रही हैं। उस समय उन्हें शासन की ओर से हर महीने 12 सौ रुपए मेहनताना मिलता था। आंदोलन करने के बाद 2015 में इसे बढ़ाकर 17 सौ रुपए किया गया। वर्तमान में उन्हें 4 हजार रुपए दिया जाता है, जिसमें केन्द्र सरकार 3 हजार और राज्य सरकार 1 हजार रुपए दे रही है, जो कलक्टर दर से कम है। इतनी राशि से घर का गुजारा नहीं चल पा रहा है।


ये हैं उनकी मांगें
कार्यकर्ताओं की शासन से मांग है कि समान काम, समान वेतन और शासकीय कर्मचारी का दर्जा दिया जाए। सुपरवाइजर पद पर सीधी भर्ती न कर, उनकी पदोन्नति की जाए। पेंशन का लाभ दिया जाए। उनका वेतन 18 हजार रुपए से अधिक किया जाए। पेंशन का लाभ दिया जाए। 2013-14 तक अतिरिक्त मानदेय दिया जाए।


आंगनबाड़ी कार्यकर्ता संघ अध्यक्ष हसमीत कौर ने बताया कि कुपोषण मिटाने के साथ-साथ शासन की योजनाओं को भी लोगों तक पहुंचा रहे हैं। इसके बाद भी शासन उनकी मागों पर ध्यान नहीं दे रही है। रायपुर में अब उग्र प्रदर्शन करेंगे।

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