कोयला और लोहा के बाद अब सोना भी उगलेगा झारखंड, हर रोज मनाए धनतेरस

Indresh Gupta

Publish: Oct, 19 2016 12:28:00 (IST)

Dhanbad, Jharkhand, India
कोयला और लोहा के बाद अब सोना भी उगलेगा झारखंड, हर रोज मनाए धनतेरस

देश भर की पांच बड़ी कंपनियों ने सोने की खदान के लिए अपनी दिलचस्पी दिखायी है।

धनबाद। देश में कोल ब्लाक के रूप में चर्चित झारखंड की धरती अब सोना भी उगलेगी। क्योंकि सूबे में सोने के दो ब्लज्ञॅक की पहचान हो गई है, जिनसे सोना निकालने के लिए टेंडर प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में है। इसके साथ ही सोने के तीसरे ब्लॉक की पहचान शुरू हो गई है।

बता दें कि सूबे में सरकार चाहे जिसकी रहे, अगले तीस सालों तक हर रोज धनतेरस मनाया जा सकता है। कोल और लौह अयस्क खनन में अपनी पहचान बना चुके झारखंड की धरती पर 20 वर्षों के लंबे सर्वे के बाद चाईबासा के पहरदिया और रांची के तमाड़ स्थित परासी गोल्ड ब्लाक से सोने का उत्पादन शुरू होने की संभावना बनी है।

एमईसीएल ने दी सर्वे रिपोर्ट

एमईसीएल की सर्वे रिपोर्ट के बाद राज्य सरकार को जो रिपोर्ट सौंपी है उसमें कहा गया है कि पहरदिया और परासी क्षेत्र में सोने पाए जाने की ना सिर्फ प्रचुर संभावना है, बल्कि यहां अगले तीस सालों तक सोने की जो किस्म मिलेगी। वह अद्भुत और अद्वितीय होगी।

जानकारी के अनुसार झारखंड सरकार के खान निदेशक एस आई मिंज ने बताया कि सोना पाए जाने की संभावना के बाद सरकार ने अगस्त महीने में टेंडर प्रक्रिया शुरू की थी। जिसका टेक्निकल बिड आज खोला जाना है। पहरदिया गोल्ड ब्लॉक के लिए निकले गए टेंडर में देश भर की पांच बड़ी कंपनियों ने सोने की खदान के लिए अपनी दिलचस्पी दिखायी है।

ये कंपनियां हैं

अडाणी इन्टरप्राईजेज, रामगढ़ मिनरल एंड माइनिंग लिमिटेड कर्नाटका, मैथन इस्पात लिमिटेड कोलकाता, रूंगटा माइन्स और अम्बे माईनिंग प्राईवेट लिमिटेड।

बता दें कि चाईबासा के पहरदिया गोल्ड ब्लॉक 160 एकड़ में, जबकि तमाड़ का परासी गोल्ड ब्लॉक 270 एकड़ में फैला है। सोने की इस खनन के लिए जमीन अधिग्रहण की कोई समस्या नहीं आएगी क्योंकि पूरा इलाका घने जंगलों से घिरा है। सर्वे रिपोर्ट में बताया गया है कि झारखंड की धरती पर मिलने वाला सोना उच्च क्वालिटी का होगी।

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