हनुमान चालीसा का यह प्रयोग तुरन्त संवारेगा बिगड़ी किस्मत

Sunil Sharma

Publish: Feb, 21 2015 06:22:00 (IST)

Dharma Karma
हनुमान चालीसा का यह प्रयोग तुरन्त संवारेगा बिगड़ी किस्मत

हनुमानचालीसा के कुछ विशेष तांत्रिक प्रयोग करने पर तुरंत प्रभाव होता है और व्यक्ति के बिगड़े कार्य बनते हैं

यूं तो सभी हनुमान भक्त हनुमान चालीसा की शक्ति से परिचित हैं और आवश्यकतानुसार इसका अनुष्ठान करते हैं। आमतौर पर हनुमानचालीसा को वैदिक सूक्त मान कर भगवान से अर्जी लगाई जाती है। परन्तु इसके कुछ विशेष तांत्रिक प्रयोग भी हैं जिन्हें शुरू करने पर तुरंत प्रभाव होता है और व्यक्ति के बिगड़े कार्य बनने लगते हैं।

हनुमानचालीसा के विशिष्ट प्रयोगों में से एक प्रयोग है कि किसी भी मंगलवार या शनिवार के दिन से इस स्त्रोत को कम से कम 11 बार पाठ करना शुरू करें। यह पाठ किसी हनुमान मंदिर में या शिव मंदिर में हो तो बेहतर रहेगा। मंदिर न होने की स्थिति में रामदरबार की फोटो अपने घर पर ले आएं। पाठ करने के पहले हनुमानजी तथा भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मणजी को हाथ जोड़कर प्रणाम करें। संभव हो तो उन्हें पुष्प, दीप तथा प्रसाद अर्पण करें। इसके बाद शांत चित्त से एकाग्र होकर हनुमानजी का ध्यान क रते हुए पूरे मनोयोग से हनुमानचालिसा का 11 बार पाठ करें। इसके बाद प्रसाद खुद भी खाएं और दूसरों को भी बांट दें। इस उपाय को तब तक करना चाहिए जब तक कि आपकी समस्या पूर्ण रूप से दूर न हो जाएं।

यदि समस्या बहुत ही विकट हो जाएं और आप हर तरफ से फंस जाएं तो हनुमानचालीसा का 11 बार पाठ करने की बजाय प्रतिदिन 108 बार पाठ करें। इस प्रयोग में इतनी शक्ति है कि एक बार मरते हुए व्यक्ति को भी जीवन दान दिया जा सकता है। चालीसा के इस पाठ से न केवल बिगड़े हुए काम ही संवरते हैं वरन भूत-प्रेत भी दूर भागते हैं। यदि किसी ने कोई जादू-टोना करवा रखा है और उससे आपका जीवन दुश्वार हो गया है तो इस प्रयोग को करने के पहले दिन से ही आपकी समस्याएं समाप्त होना शुरू हो जाएंगी।

बेहद सावधानी चाहिए इस प्रयोग में
ध्यान रखें यह दिखने में बेहद साधारण और सरल हैं परन्तु अत्यधिक उग्र तांत्रिक प्रयोग हैं। इसका उपयोग अति आवश्यकता होने पर ही करना चाहिए। उपयोग के समय मन में किसी प्रकार का विकार न हों और न ही कोई गलत कार्य करना चाहिए। समस्या का समाधान होने के बाद यदि आप चाहे तो इस प्रयोग को निरंतर चालू रख सकते हैं परन्तु मन में किसी प्रकार की इच्छा नहीं होनी चाहिए। भगवान मारूति स्वयं ही प्रसन्न होकर बिना मांगे आपको देते रहेंगे।

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