भिलाई शहर में गंभीर कुपोषित, 60 फीसदी बच्चों तक नहीं पहुंच रहा सुपोषित आहार

Satya Narayan Shukla

Publish: Oct, 19 2016 11:16:00 (IST)

Bhilai, Chhattisgarh, India
भिलाई शहर में गंभीर कुपोषित, 60 फीसदी बच्चों तक नहीं पहुंच रहा सुपोषित आहार

नवाजतन योजना के तहत मध्यम और गंभीर कुपोषित बच्चों को एक बार फिर महिला एवं बाल विकास विभाग सुपोषित बनाने की तैयारी में है, पिछले बार के टारगेट में मात्र 40त्न बच्चे ही सुपोषित हो पाए।

भिलाई.नवाजतन योजना के तहत मध्यम और गंभीर कुपोषित बच्चों को एक बार फिर महिला एवं बाल विकास विभाग सुपोषित बनाने की तैयारी में है, पिछले बार के टारगेट में मात्र 40% बच्चे ही सुपोषित हो पाए। आंगनबाडिय़ों में वजन त्योहार, नवाजतन योजना चलााई जाती है, लेकिन कुपोषित बच्चों का प्रतिशत अब भी ज्यादा है। यही वजह है इस बार टारगेट ज्यादा कर दिया है। 2 अक्टूबर से पांचवा चरण शुरू हुआ।

3200 का टारगेट

विभाग ने इस बार जिन केन्द्रों को चुना है। उनमें सबसे ज्यादा गंभीर कुपोषित बच्चे पाटन और भिलाई 1 परियोजना में है। मध्यम कुपोषित  बच्चे पाटन परियोजना में 500 से ज्यादा है। नवाजतन के पांचवे चरण में इस बार विभाग को 3297 बच्चों को सुपोषित करने का लक्ष्य दिया गया है। जिसमें  8 परियोजना के विभिन्न केन्द्रों में चयनीत कुपोषित बच्चों को रेडी टू ईट और गर्म सुपोषित भोजन देकर उन्हें कुपोषण से मुक्त करने का प्रयास करना है। पिछले बार के मुकाबले इस बार टारगेट भी बढ़ा दिया है।

पाटन में बुरी स्थिति
जुलाई में हुए वजन त्योहार के बाद यहां मध्यम और गंभीर कुपोषित बच्चों का चयन किया गया है ऐसे बच्चों की संख्या 650 है। जबकि सबसे ज्यादा गंभीर कुपोषित दुर्ग ग्रामीण क्षेत्र में 91 बच्चे हैं। मध्यम कुपोषित पाटन में 571 है। इससे बाद सबसे ज्यादा गंभीर कुपोषित बच्चे भिलाई शहर के श्रम बस्तियों में है। पिछले वर्ष नवाजतन योजना के तहत करीब 2400 कुपोषित बच्चों को सुपोषित करने का लक्ष्य दिया था, पर छह महीने में मात्र 925 बच्चे ही सुपोषण की कतार में आ पाए।

दुर्ग जिले में 30 प्रतिशत बच्चे कुपोषण से पीडि़त
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सुपोषण मित्र इस अभियान के बाद भी उन बचे हुए बच्चों की निगरानी कर उन्हें सुपोषित बनाने का प्रयास करते हैं, लेकिन वास्तविकता कुछ और है। सुपोषण मित्र  और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता  नए बच्चों पर अपना ध्यान लगाएं या पुराने कुपोषित बच्चों का ख्याल रखें। दुर्ग जिले में कुल 30 प्रतिशत से ज्यादा बच्चे कुपोषण से पीडि़त है। जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी गुरप्रीत कौर ने बताया कि गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों को सुपोषित करने में वक्त लगता है। टारगेट जो भी मिले उसमें 40 प्रतिशत से ज्यादा बच्चों को सुपोषण की श्रेणी में लाना मुश्किल है।

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