BSF स्थापना दिवस: फौजी भी कमाल के होते हैं छोटे से बटुए में छिपा परिवार और दिल में पूरा हिंदुस्तान..

Satya Narayan Shukla

Publish: Dec, 01 2016 02:10:00 (IST)

Bhilai, Chhattisgarh, India
 BSF स्थापना दिवस: फौजी भी कमाल के होते हैं छोटे से बटुए में छिपा परिवार और दिल में पूरा हिंदुस्तान..

भारतीय सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) गुरुवार को 51 वां स्थापना दिवस मना रहा है। इन 51 सालों में सीमा सुरक्षा बल के रणबांकुरों ने दुश्मन के हर नापाक मंसूबों को नाकाम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है

दाक्षी साहू@भिलाई.फौजी भी कमाल के होते हैं अपने छोटे से बटुए में पूरा परिवार छिपा, दिल में पूरा हिंदुस्तान बसाकर रखते हैं। बीएसएफ के 51 वे. स्थापना दिवस पर कुछ ऐसा ही नजारा बीएसएफ छत्तीसगढ़ मुख्यालय भिलाई में देखने मिला। स्थापना दिवस कार्यक्रम में अपने बटुए में छिपाकर रखे परिवार के तस्वीरों को निहारते हुए बीएसएफ जवान जीडी प्रसाद राव भावुक हो गए। परिवार से दूर एक नजर तस्वीरों को निहारकर आहे भरते हुए फिर बटुआ जेब में रख लिया। चंद मिनटों में वर्दी की शान बढ़ाते हुए भारत माता की जयकार लगाते हुए कहते हैं कि देश के लिए परिवार क्या, ऐसी सौ जिंदगी हंसते-हंसते कुर्बान कर सकते हैं। हिमालय की बर्फीली वादियों से लेकर वीरान थार के मरूस्थल और अब घने जंगलों में एंटी नक्सल ऑपरेशन में तैनात जवानों का दिन अपनों की याद में कुछ ऐसे ही लम्हों के साथ बीत जाता है।

BSF 51 Raising Day Celebrate chhattisgarh

घने जंगलों में तैनात आठ हजार जवान
रावघाट माइनिंग प्रोजेक्ट की सुरक्षा में बीएसएफ के लगभग 8 हजार जवान रावघाट के घने जंगलों में तैनात है। इंटरनेट की दुनिया में यहां बमुश्किल एक महीने में एक बार मोबाइल का टॉवर पकड़ लेता है। कई बार तो महीनों घर में बात नहीं होती। दो महीने पहले ही बीएसएफ मुख्यालय पहुंचे जवान हरविंदर सिंह (परिवर्तित नाम) बताते हैं कि घने जंगलों में पर्स में रखी तस्वीरें देखकर अपनों की सलामती की दुआ कर लेते हैं। जंगलों में हर कदम पर बिछी मौत से कदमताल करते हुए आगे बढ़ जाते हैं।

रावघाट के जंगलों में माओवाद का सफाया
सात साल पहले वर्ष 2009 में बीएसएफ की तैनाती प्रदेश के घोर माओवाद प्रभावित उत्तर बस्तर कांकेर में की गई। एंटी नक्सल ऑपरेशन और रावघाट माइनिंग प्रोजेक्ट की सुरक्षा करने के लिए बीएसएफ ने इस्पात नगरी भिलाई को अपना मुख्यालय बनाया। सात वर्षों में जवानों ने अपने अदम्य साहस और सामाजिक दायित्व के निर्वहन से रावघाट की आबो-हवा बदल दी। लाल सलाम के आतंक का गढ़ आज बीएसएफ जवानों की सुरक्षा में विकास की इबारत लिख रहा है। बीएसएफ डीआईजी आरपीएस मलिक कहते हैं कि जंगलों में चुनौती कम न थी पर बीएसएफ ने मोर्चे पर डटकर विकास कार्यों को आगे बढ़ाया है।

700 माओवादियों को जिंदा पकड़ा
बीएसएफ ने उत्तर बस्तर कांकेर, रावघाट के जंगलों में सघन सर्चिंग ऑपरेशन चलाकर लगभग 717 माओवादियों को जिंदा पकड़ा। वहीं 94 माओवादियों को आत्मसमर्पण की जरिए समाज की मुख्यधारा में जोड़ा। मजबूत सूचना तंत्र और सटीक रणनीति की बदौलत 146 जिंदाबम बरामद कर जानमाल के नुकसान से लोगों को बचाया। इसके अलावा माओवादियों से 194 अत्याधुनिक हथियार और 505 गोलियां बरामद कर उनके नापाक मंसूबों पर अंकुश लगा दिया। आज रावघाट के आदिवासी आजादी की खुली हवा में सांस लेकर जवानों के साथ कदमताल करते नजर आते हैं।

पहले दिल जीता फिर बनाया हुनरमंद
सीमा सुरक्षा बल के जवानों ने दंडकवन स्थित कैंप में आदिवासियों को हुनरमंद बनाने अनूठी मुहिम छेड़ी है। जवानों ने सामाजिक दायित्व निभाते हुए पहले आदिवासियों का दिल जीता। अब उन्हें सिलाई-कढ़ाई, कंप्यूटर, राजमिस्त्री, मैकेनिक सहित अन्य विषयों की ट्रेनिंग देकर काबिल बनाने में जुटे हैं। छत्तीसगढ़ में बीएसएफ के लगभग 10 हजार जवान माओवादियों से लोहा लेकर भगवान राम की कर्मस्थली में शांति स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहे हैं।



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