बच्चों का खेल बन गया पर्यावरण संरक्षण, चार साल में रोपे 14 लाख पौधों का पता नहीं

Bhilai, Chhattisgarh, India
 बच्चों का खेल बन गया पर्यावरण संरक्षण, चार साल में रोपे 14 लाख पौधों का पता नहीं

पर्यावरण संरक्षण के नाम पर पिछले 4 साल में जिले में करीब 14 लाख पौधे रोपे जा चुके हैं। इनमें से कितने पौधे बचे, इसका कोई भी हिसाब जिला प्रशासन के पास नहीं है।

दुर्ग. पर्यावरण संरक्षण के नाम पर पिछले 4 साल में जिले में करीब 14 लाख पौधे रोपे जा चुके हैं। इनमें से कितने पौधे बचे, इसका कोई भी हिसाब जिला प्रशासन के पास नहीं है, वहीं अब फिर से 14.29 लाख पौधे रोपने की तैयारी की जा रही है। जिला प्रशासन 20 जुलाई से विशेष अभियान शुरू कर रहा है। प्रदेश के साथ जिले में भी पर्यावरण संरक्षण के नाम पर हर साल लाखों रुपए खर्च कर पौधरोपण कराए जा रहे हैं।

इसके बाद भी न तो रोपे हुए पौधे दिखते हैं और न ही हरियाली नजर आती है। पौधे लगाने के बाद उसकी देखभाल व सुरक्षा पर ध्यान नहीं दिए जाने के कारण यह स्थिति बन रही है। इससे सबक लेने के बजाए, इस बार फिर फौरी तैयारियों के साथ पौधरोपण किए जाने की संभावना दिख रही है। सीएसवीटीयु के नए भवन के सामने नेवई मुख्य मार्ग पर फेंसिंग कर पौधे लगाए गए थे।

Environmental protection tree palntation

ठूंठ में बदल गए
यहां से पौधों के साथ फेंसिंग सालभर में ही गायब हो गए। यहां पिछले अगस्त में फिर से पौधे लगा दिए गए, लेकिन फेंसिंग नहीं किया गया।इससे पौधे फिर से गायब गए। 2015-16  में बोरई-नगपुरा मार्ग पर नगपुरा से आगे हिर्री, लिटिया, सेमरिया तक करीब आधा दर्जन स्थलों पर सड़क के किनारे हजारों की संख्या में पौधे लगाएगए थे। नगपुरा के समीप लगाएगएपौधे पहले ही सूख गए। हिर्री व लिटिया के पौधे भी ठूंठ में बदल गए हैं।

नगपुरा कोडिय़ा बनें उदाहरण
इन अभियानों के तहत दुर्ग के नगपुरा में एक लाख और धमधा के कोडिय़ा और देऊरझाल में 75 हजार पौधे लगाए गएहैं। यहां देखभाल व सुरक्षा की बेहतर व्यवस्था के कारण अधिकतर पौधे अब पेड़ों में तब्दील हो गए हैं। नए पौधरोपण वाले जगहों में इसी तरह की व्यवस्था हो तो बेहतर नतीजे आ सकते हैं। जिला पंचायत सदस्य जयंत देशमुख ने बताया कि पर्यावरण संरक्षण के नाम पर लाखों खर्च कर पौधे तो लगाए जा रहे हैं, लेकिन इनकी सुरक्षा पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

ज्यादा संख्या में पौधे लगाने के बजाए रोपे गए पौधों को बचाने पर ध्यान दिया जाना चाहिए। एडीएम व नोडल अधिकारी पीएस एल्मा ने बताया कि पौधा लगाने के लिए स्थलों का चिन्हांकन कर लिया गया है। गड्ढे खोदने का कार्य जारी है। शहरी इलाकों में प्रमुख रूप से फलदार पौधे लगाए जाएंगे। विभागों, नगरीय निकाय और बीएसपी को पौधे लगाने के लिए लक्ष्य दे दिए गए हैं। पौधों की सुरक्षा का भी पुख्ता इंतजाम कराया जाएगा।

4000 रोपे 400 भी नहीं बचे
उतई मार्ग पर नेवई, सीआईएसएफ मैदान से लेकर उतई तक करीब 4 किलोमीटर सड़क पर दोनों किनारों पर वर्ष 2014-15 में लोक निर्माण विभाग द्वारा 4000 से अधिक पौधे रोपे गएथे। पौधरोपण के साथ यहां फेंसिंग भी लगाया गया था, लेकिन अब यहां 400 पौधे भी नहीं बचे हैं।

इस बार जिला प्रशासन का यह दावा
 
146  हेक्टेयर खाली जमीन और 10 किमी सड़क के किनारे रोपे जाएंगे  14.26  लाख पौधे।
रुआबांधा, अहेरी, पाटन और पिटौरा नर्सरी में जिले में रोपने के लिए पर्याप्त पौधे।
2 लाख पौधे वितरित कर रोपने के लिए प्रेरित किया जाएगा, जनदर्शन में आने वाले लोगों को।
7.42 लाख वन विभाग द्वारा और बीएसपी द्वारा 2 लाख पौधे रोपे जाएंगे।
रोपे गए पौधों की सुरक्षा पर जोर, आम लोगों के साथ समाजसेवी संगठनों, जनप्रतिनिधियों को जोड़ा जाएगा।
6 हजार पौधे लगाए जाएंगे हिंगनाडीह में। वन विभाग हिंगनाडीह में ऑक्सीवन विकसित करेगा।
आम, नीम, नीबू, नीलगिरी, करण, करौंदा, कटहल, सीताफल, करंज, अमरूद के पौधे रोपे जाएंगे।  
वन विभाग द्वारा प्रमुख तौर से शीशम, नीम, करंजा, गुलमोहर और पेल्टाफार्म के पौधे लगाए जाएंगे।

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