थोक मूल्य सूचकांक गिरकर 5.70 फीसदी

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थोक मूल्य सूचकांक गिरकर 5.70 फीसदी

वाणिज्य मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक 2016 के मार्च में थोक मूल्य सूचकांक घटकर (-)0.45 फीसदी रही थी

नई दिल्ली। थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति की सालाना दर में गिरावट आई है और मार्च में यह 5.70 फीसदी रही, जबकि फरवरी में यह तीन सालों में सबसे तेज 6.55 फीसदी थी। आधिकारिक आंकड़ों से सोमवार को यह जानकारी मिली। वाणिज्य मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक 2016 के मार्च में थोक मूल्य सूचकांक घटकर (-)0.45 फीसदी रही थी। समीक्षाधीन माह में खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़कर 3.12 फीसदी रही, जबकि 2016 के मार्च में यह 4.09 फीसदी थी।

हालांकि मार्च में प्राथमिक वस्तुओं पर खर्च, जो थोक मूल्य सूचकांक के कुल वजन का 20.12 फीसदी है, 4.63 फीसदी बढ़ा, जबकि एक साल पहले समान माह में यह 2.97 फीसदी थी। मार्च में प्याज की थोक मुद्रास्फीति दर सालाना आधार पर (-) 10.78 फीसदी थी, जबकि आलू की (-)17.07 फीसदी रही। कुल मिलाकर, मार्च में सब्जियों की कीमतें बढ़कर 5.70 फीसदी पर रही, जबकि एक साल पहले की इसी महीने में यह (-) 2.03 फीसदी की नकारात्मक स्तर पर थी।

समीक्षाधीन माह में सालाना आधार पर गेहूं बढ़कर 4.65 फीसदी रहा, जबकि प्रोटीन आधारित खाद्य पदार्थ जैसे अंडे, मांस और मछली की मुद्रास्फीति दर घटकर 3.12 फीसदी रही। विनिर्मित उत्पादों की कीमतें, जो सूचकांक में लगभग 65 फीसदी हैं, मार्च में बढ़कर 2.99 फीसदी रही, जो पिछले साल मार्च में 0.13 फीसदी थी।


खुदरा महंगाई दर घटी, आरबीआई घटा सकती है ब्याज दरें

सब्जियों, ईंधन एवं बिजली तथा परिवहन एवं दूरसंचार सेवाओं की कीमतों के अपेक्षाकृत धीमी बढ़ोतरी के कारण अगस्त में खुदरा महंगाई में आम लोगों को बड़ी राहत मिली है। केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष के पहले चार महीने में लगातार बढऩे के बाद अगस्त में खुदरा महंगाई की दर घटकर 5.05 प्रतिशत पर आ गई। यह इस साल मार्च के बाद का इसका निचला स्तर है।

इस साल जुलाई में खुदरा महंगाई 6.07 प्रतिशत तथा पिछले साल अगस्त में 3.74 प्रतिशत दर्ज की गई थी। चीनी तथा कंफेक्शनरी उत्पादों की महंगाई दर 24.75 प्रतिशत तथा दालों की 22.01 प्रतिशत पर रहने के बावजूद अगस्त में खाद्य पदार्थों की खुदरा महंगाई भी जुलाई के 8.80 प्रतिशत से घटकर 5.91 प्रतिशत पर आ गई। यह इसका भी इस साल मार्च के बाद का निचला स्तर है।

खुदरा महंगाई घटने से अक्टूबर में रिजर्व बैंक के ब्याज दरों कटौती की उम्मीद बढ़ी है। अब महंगाई दर केंद्रीय बैंक के अपेक्षित स्तर के काफी करीब आ गई है। उसने अगले साल मार्च तक इसे पांच प्रतिशत के आसपास रखने का लक्ष्य तय किया था। साथ ही अच्छे मानसून से भी ब्याज दरों में कमी करने के लिए रास्ता साफ होगा।

विनिर्मित खाद्य उत्पादों की उप-श्रेणी में बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह 6.96 फीसदी रही, जबकि एक साल पहले 5.58 फीसदी थी। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार पिछले महीने उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) या खुदरा मुद्रास्फीति में मार्च के दौरान माह-दर-माह आधार पर बढ़ोतरी हुई और यह 3.81 फीसदी बढ़ी, जबकि फरवरी में सीपीआई महंगाई दर 3.65 फीसदी थी।

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