अब एक फू में  हो जाएगा कैंसर टेस्ट

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अब एक फू में  हो जाएगा कैंसर टेस्ट

एक ऐसी मशीन आ गई है, जो पेट और आहार नाल जैसे घातक कैंसर का पता फू करते ही (यानी मशीन में फूंक मारते ही) लगा लेगी। वो भी शुरुआती दौर में ही। दरअसल, लंदन के इंपीरियल कॉलेज के रिसर्चरों ने 'ब्रीद टेस्टÓ के जरिए कैंसर का पता लगाने वाली मशीन ईजाद की है।

नई दिल्ली. अभी तक आप ने कई बाबाओं को झार-फूक से किसी बीमारी को छू मंतर करने की बात सुनी होगी। लेकिन, अब एक ऐसी मशीन आ गई है, जो पेट और आहार नाल जैसे घातक कैंसर का पता फू करते ही (यानी मशीन में फूंक मारते ही) लगा लेगी। वो भी शुरुआती दौर में ही। दरअसल, लंदन के इंपीरियल कॉलेज के रिसर्चरों ने 'ब्रीद टेस्टÓ के जरिए कैंसर का पता लगाने वाली मशीन ईजाद की है। यह मशीन पेट और आहार नाल के खतरनाक कैंसर का शुरुआती दौर में ही पता लगा लेती है। बताया जाता है कि ट्रायल के दौरान 300 लोगों पर इस मशीन का टेस्ट किया गया। जिसमें से मशीन ने 85 फीसदी सटीक नतीजे दिए।

पहले एंडोस्कोपी से होती थी जांच
पेट और आहार नाल के कैंसर को बेहद खतरनाक माना जाता है। इनका पता लगाने के लिए अब तक एंडोस्कोपी की जाती है। एंडोस्कोपी की प्रक्रिया काफी जटिल और महंगी है। इसके लिए शरीर में भी दखल देनी पड़ती थी। इसमें कई तरह का जोखिम भी रहता है।

ऐसे की जाती एंडोस्कोपी
एंडोस्कोपी में कैमरा लगे एक पाइप को मुंह में डाला जाता है और आहार नाल से नीचे ले जाते हुए पेट तक पहुंचाया जाता है। तब जाकर कैंसर का पता लग पाता है। इस विधि से बीमारी का पता तभी चल पाता है, जब वह काफी बड़े पैमाने पर फैल जाता है, जिससे मरीज के पास इलाज के लिए काफी कम समय बचता है। इसकी वजह से ज्यादातर मरीजों की इलाज के दौरान ही मौत हो जाती है। 

ऐसे होती है ब्रीद टेस्ट
दरअसल, पेट और आहार नाल के कैंसर से जूझ रहे लोगों की जांच से पता चला कि पेट और आहार नाल के कैंसर से जूझ रहे लोगों के पेट में और स्वस्थ लोगों के पेट में कुछ खास रसायनों का स्तर अलग होता है। इस जांच में रसायनों के इसी स्तर को आधार बनाया गया है। मशीन में फूंक मारने से इन रसायनों के स्तर का पता चल जाता है। जिससे डॉक्टर आसानी से यह पता लगा लेते हैं कि व्यक्ति कैंसर से पीडि़त है या नहीं।

ये हैं ब्रीद टेस्ट के फायदे
ब्रीद टेस्ट में कैंसर से पीडि़त मरीजों को एक विशेष जांच मशीन में सिर्फ एक फूंक मारनी होती है। इस टेस्ट के लिए शरीर के भीतर दखल नहीं दिया जाता है।  इससे कैंसर का जल्द पता लग जाता है, जिससे इलाज के लिए डॉक्टरों को काफी समय मिल जाता है, जिस कारण मरीज के बचने की संभावना ज्यादा होती है।

ऐसे किया गया रिसर्च
शोध दल ने लंदन के तीन अस्पतालों से 335 लोगों के सांस के नमूने लिए गए, जिनमें से 163 लोगों के पेट या आहार नाल में कैंसर होने की मशीन ने पुष्टि की। वहीं, एंडोस्कोपी में कैंसर का कोई सबूत नहीं मिला। इसके बाद जब और गहराई से टेस्ट किए गए तो पता चला कि सांस का विश्लेषण करने वाली मशीन एंडोस्कोपी से ज्यादा तेजी से कैंसर का पता लगा रही है। ब्रीद एनालाइजिंग मशीन पेट में मौजूद गैसों और रसायनों में आए मामूली अंतर को भी पकड़ रही है।

मशीन को बाजार में आने में लगेंगे 3 साल
शोध से जुड़े डॉक्टरों के मुताबिक ब्रीद टेस्ट मशीन का ट्रायल अब तीन साल और चलेगा। हालांकि, नतीजों की सफलता से वे काफी खुश हैं। उन्होंने कहा है कि शोध दिखाता है कि हम सांस के जरिए टेस्ट में सामने आए अंतर के आधार पर संकेत दे सकते हैं कि किन मरीजों को पेट और आहार नाल का कैंसर है और किस को नहीं।

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