परीक्षा के दौरान डरे नहीं, बस इन बातों का रखें ख्याल

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परीक्षा के दौरान डरे नहीं, बस इन बातों का रखें ख्याल

इसी प्रकार ऐसे भी कई लोग हैं, जिन्होंने बहुत पढ़ाई की और अच्छे अंकों से भरी डिग्रियां भी इकट्ठी कीं लेकिन फिर भी मनचाही सफलता के लिए संघर्ष कर रहे हैं

अ गर एक सवाल आपके सामने हो कि आप अपने बच्चे को पढ़ा-लिखा बनाना चाहते हैं या सफल तो स्वाभाविक उत्तर रहता है कि सफल। पढ़ा-लिखा भी इसीलिए रहे हैं ताकि बच्चा सफल हो पाए। क्या आप इस बात पर सहमत हैं कि ऐसे कई लोग हैं, जो ज्यादा अच्छे अंकों से परीक्षा और अपनी पढा़ई पूरी नहीं कर पाए लेकिन अपने जीवन में सफल हैं और समृद्ध हैं? इसी प्रकार ऐसे भी कई लोग हैं, जिन्होंने बहुत पढ़ाई की और अच्छे अंकों से भरी डिग्रियां भी इकट्ठी कीं लेकिन फिर भी मनचाही सफलता के लिए संघर्ष कर रहे हैं। यानी अच्छे अंक लाकर पढ़ाई पूरी करना सफलता के सफर में एक जरूरी पायदान तो है पर पूरी तरह से सफलता नहीं है।

अच्छे अंक लाना ही मंजिल नहीं
'आज फिर तुम फेल हो गए, हमेशा तुम्हारे इतने कम अंक आते हैं। लगता है तुम्हारा दिमाग बहुत कमजोर है। तुम जीवन में कभी सफल नहीं हो पाओगे,' वार्षिक परीक्षा में वो बच्चा फेल हो गया। उसकी माता को उस अध्यापिका ने एक डरावनी भविष्यवाणी भी कर दी, 'यह बच्चा भविष्य में कुछ नहीं कर पाएगा।' इसके बाद माता हर समय बहुत चिंतित रहने लगी लेकिन शायद यह बात उस बच्चे के दिमाग में किसी और तरीके से असर कर गई। एक दिन अपनी माता को उसने कहा, 'यह बच्चा भविष्य में कुछ नहीं कर पाएगा'...और ऐसा कहते हुए उसने अपनी माता के हाथ में भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' थमा दिया, जो उसे मिला था। माता ने उस लड़के को गले से लगा लिया। वो लड़का और कोई नहीं, बल्कि महान क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर थे।

अभ्यास बनाता है काम को आसान
कोई काम मुश्किल या आसान नहीं होता। बस अगर उस पर महारत है यानी परफेक्शन है तो आसान है और परफेक्शन नहीं है तो मुश्किल। कोई भी काम हो शुरू में सदैव मुश्किल होता है। ज्यादा फोकस करने से भी उस काम में देर लगती है और ज्यादा मेहनत करने पर भी परिणाम कम रहता है। जब उसे लगातार करते रहते हैं तो धीरे-धीरे मन-मस्तिष्क उस कार्य में निपुण हो जाता है और जब उस काम का अच्छा अभ्यास हो जाता है तो वो कार्य आपका कौशल बन जाता है और फिर कम प्रयास में ज्यादा जल्दी और ज्यादा सटीक परिणाम  मिलता है। जैसे कोई खिलाड़ी चैंपियन कैसे बनता है, सिर्फ  खेल को अच्छी तरह जानने से नहीं, बल्कि खूब अभ्यास करने से।


डटे रहना है
किसी चीज को अगर दिल से चाहो तो सारी कायनात उसे तुम्हारा बनाने में जुट जाती है। रॉन्डा बर्न ने अपनी पुस्तक 'द सीक्रेट' में लिखा है कि आकर्षण का नियम कहता है कि अगर आप किसी लक्ष्य को प्राप्त करने में पूरे मन से लगे हैं तो प्रकृति खुद भी आपके लिए आपकी सफलता का मार्ग प्रशस्त करती है। रेडियो को जब ट्यून करते हैं तो उसमें से गाना आने लगता है। यह गाना कहां है? रेडियो में या वातावरण में? हम सब जानते है कि यह वातावरण में है, अदृश्य है, बस जब रेडियो अपनी फ्रीक्वेंसी को उससे सुमेलित करता है तो रेडियो को वो गाना प्राप्त हो जाता है। ठीक ऐसे ही हम भी यदि लक्ष्य के साथ स्वयं को पूरी लगन और तल्लीनता से सुमेलित कर लें तो वो हमें जरूर प्राप्त होगा।


ऐसे देना है आपको अपने बच्चे का साथ

विश्वास करें
अपने बच्चे की काबिलियत पर विश्वास रखें और उसका विश्वास अर्जित करें। हर बच्चे में सफल होने की काबिलियत है, बस उसका तरीका अलग हो सकता है। आपके बच्चे के साथ आपका विश्वास बंधन इतना मजबूत होना चाहिए कि वो बच्चा आपको अपने जीवन की हर बात बताए, आपसे कुछ छिपाए नहीं और ये कहने से नहीं, बल्कि व्यवहार से होगा।

अच्छे श्रोता बनें
आप अपने बच्चे की सभी बातों को अच्छी तरह सुनें,  पूरा सुनें और समझें। निष्कर्ष निकालने से पहले उसे भावनात्मक और विश्लेषणात्मक रूप से जानें और समझें। उससे कोई गलती हो जाए तो भी उसे डांटने या दोषी ठहराने से पहले उसे भी अपना पक्ष रखने दें।

साथ समय बिताएं
यह जानते हुए भी कि जीवन में सबसे ज्यादा प्यारा और अजीज हर माता-पिता के लिए उसका बच्चा होता है, कई बार माता-पिता बच्चे की दैनिक जरूरतें तो पूरी कर देते हैं, अच्छे स्कूल में भी दाखिला दिलवा देते हैं लेकिन खुद समय बहुत कम दे पाते हैं। हर जरूरत की चीज देने के साथ आपका व्यक्तिगत साथ और समय भी बच्चे की मूलभूत आवश्यकता है।

बच्चे को प्रेरित करें
बच्चे को किसी भी कार्य में, चाहे वो पढ़ाई हो या कोई और काम, उसे प्रेरित करके करने को कहें, डराएं या दबाव न बनाएं। दिमाग मोटिवेट करने पर उस काम से जुड़ता है और दबाव डालने पर उसी काम से दूर भागता है। बच्चे को काम न करने के नुकसान ज्यादा न बताएं, बल्कि काम को सफलतापूर्वक करने के फायदे बताएं।

सफल व्यक्तित्व के लिए पढ़ाएं
बच्चो को सिर्फ  अंक लाने के लिए न पढ़ाएं, बल्कि सम्पूर्ण सफल व्यक्तित्व बनाने के लिए पढ़ाएं। केवल अंकों का और परीक्षा का दबाव बनाकर पढऩे को न कहें, बल्कि पढ़ाई का वास्तविक उद्देश्य सम्पूर्ण व्यक्तित्व का विकास है, यह जानकर पढऩे को प्रेरित करें। उनकी पढ़ाई से जुड़े गुणों को जानें और समस्याओं को समझें।

प्रोत्साहित करें
जो बातें आपके बच्चे की विशेषताएं हैं, उन्हें पहचान कर प्रोत्साहित करें। यदि उसे अच्छा गाना आता है या किसी खेल में वो निपुण है या उसमें कोई और अच्छी विशेषता है तो उसकी अनदेखी न करें, बल्कि उसे खूब प्रोत्साहित करें। कमजोरी या कमी को दोस्त की तरह समझाएं।

ये आदतें ही बनाएंगी आपको एक होनहार विद्यार्थी

सकारात्मक सोच
हमेशा सफल कैसे हों, इस बारे में सोचें और सदैव पॉजिटिव रहें। कैसा भी विषय हो या परीक्षा हो, उससे डरे नहीं, न ही तनाव में आएं, बल्कि अपने आप से कहें कि आपके दिमाग और इरादे के आगे ये कुछ भी नहीं है। कभी न सोचें कि मुश्किल है नहीं होगा, बल्कि कहें कि आसान है, मुझसे जरूर होगा। हर समस्या को पहेली समझें।

टाइम मैनेजमेंट
समय को अति आवश्यक और महत्वपूर्ण भागों में बांटकर अपनी दिनचर्या सुनियोजित करें। जो काम महत्वपूर्ण है किन्तु तात्कालिक रूप से अति आवश्यक नहीं है, उसे प्राथमिकता में दूसरे पायदान पर रखें।

प्रभावी अध्ययन
पढ़ाई सिर्फ  अंक लाने के लिए नहीं, बल्कि सीखने और ज्ञान प्राप्त करने के लिए करें। विषय के साथ भावनात्मक संबंध बनाएं। उसे सिर्फ  एक विषय की तरह नहीं, बल्कि जीवन में एक कौशल की तरह सीखें।

अंतराल के साथ पढ़ें
जिस प्रकार हम पूरे दिन का खाना एक साथ नहीं खा सकते, उसे विभिन्न अंतरालों से ही खाना पड़ता है, ठीक उसी प्रकार लगातार पढऩे की बजाय, हर एक घंटे की पढ़ाई के बाद दस से पंद्रह मिनट का विराम लें। इससे लर्निंग स्थाई बनती है।

एक बार में एक चीज
अपने दिमाग और शरीर को एक बार में एक चीज पर ही फोकस करें। एक बार में एक प्रश्न या विषय वस्तु को केंद्र में रख पर उसे पूरा करें और पक्का करें। बस यही सोचें कि यदि यह प्रश्न आया तो सही होगा।

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