मिट्टी और गोबर से बनी है ये रामभक्त हनुमान जी की प्रतिमा, जानिये क्या है खास

Lucknow, Uttar Pradesh, India
 मिट्टी और गोबर से बनी है ये रामभक्त हनुमान जी की प्रतिमा, जानिये क्या है खास

 आपने मंदिर कई प्रकार के देखे व सुने होंगे व ईट पत्थर और सीमेन्ट की मूर्ति भी देखी होगी। आज हम आपको दिखाने जा रहे हैं मिट्टी और गोबर से बनी श्री रामभक्त हनुमान जी की प्रतिमा। 

फर्रुखाबाद। आपने मंदिर कई प्रकार के देखे व सुने होंगे व ईट पत्थर और सीमेन्ट की मूर्ति भी देखी होगी। आज हम आपको दिखाने जा रहे हैं मिट्टी और गोबर से बनी श्री रामभक्त हनुमान जी की प्रतिमा। रामभक्त हनुमान जी की मूर्ति उत्तर प्रदेश के छोटे से शहर फर्रुखाबाद में भोलेपुर में वीराजमान है। फतेहगढ़ रेलवे स्टेशन से लगभग 100 मीटर दूरी पर स्थित हनुमान जी का मंदिर हजारों लोगों की आस्था का केन्द्र है। 

कई साल पुराने इस मंदिर की मान्यता है कि यहां सच्चे दिल से मांगी गई हर मुराद पूरी होती है। खास बात यह है कि मंदिर में श्री रामभक्त हनुमान की जो प्रतिमा है वो मिट्टी और गोबर से बनी है। मंदिर में रहने वाले बाबा की मानें तो यह प्रतिमा लगभग 25 फिट की होगी। बताते हैं कि करीब 500 साल पहले गुरु महाराज मुनि ने इस मंदिर की नींव रखी थी। अब हर मंगलवार यहां मेला सा लगता है। सालों से यहां आने वाले लोगों की इस मंदिर के प्रति आस्था देखने लायक होती है।


श्रद्धालुओं का कहना है कि यहां आने वाले हर किसी की समस्या चमत्कारिक रुप से हल हो जाती है। साल दर साल मंदिर को भव्य रुप दिया जा रहा है। पूरे देश  में हनुमान जी की इस तरह की प्रतिमा नहीं है। हरतीरथ से लायी गयी मिट्टी और जल में गाय का गोबर मिलाकर इस प्रतिमा को बनाया गया था। यहां पूजा अर्चना के लिये किसी विशेष रीति रिवाज की नहीं बल्कि भाव की भक्ति को महत्व दिया जाता है।

हर मंगलवार को यहां आस्था का सैलाब उमड़ता है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं का कहना है कि सच्चे दिल से मांगी गयी हर मुराद पूरी होती है। मंदिर में छोटे बच्चों को झाड़ कर बुरी आत्माओं से बचाया जाता है। यहां आकर हर व्यक्ति अपने को सुरक्षित महसूस करता है।


जिस जमीन पर यह मंदिर बना है फर्रुखाबाद में गुरु महाराज जी ने अचानक आकर इस जमीन पर छोटे से मंदिर की स्थापना कर पूजा अर्चन करने लगे थे। जिस पर गुरु महाराज जी को जमीन मालिक छत्र सिंह ने डांटकर भगा दिया था। जिसके बाद छत्र सिंह का परिवार बीमार पड़ गया था। छत्र सिंह ने गुरु महाराज जी को खोजकर माफी मांगी तब जाकर उनके कष्टों का निवारण हुआ।

Rajasthan Patrika Live TV

1
Ad Block is Banned