सामने आया शौचालय घोटाला, जनता को धोखा देकर अधिकारियों ने की ये करतूत

Lucknow, Uttar Pradesh, India
 सामने आया शौचालय घोटाला, जनता को धोखा देकर अधिकारियों ने की ये करतूत

देश के प्रधानमंत्री ने गंगा के किनारे के सभी गांवो को ओडीएफ कराना चाहते है लेकिन गांव के प्रधान और अधिकारी मिलकर शौचालयों का पैसा मिलकर खा जाते है। 

फर्रुखाबाद। देश के प्रधानमंत्री ने गंगा के किनारे के सभी गांवो को ओडीएफ कराना चाहते है लेकिन गांव के प्रधान और अधिकारी मिलकर शौचालयों का पैसा मिलकर खा जाते है। जब लोग घोटाले की शिकायत उच्च अधिकारियों से करते हैं। तब एक जांच समिति बनाकर मामला शांत कर दिया जाता है। स्वच्छ भारत योजना को कैसे सफलता मिल सकती है जब जनता तक योजना का लाभ नही पहुंचेगा। 

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हम बात कर रहे हैं फर्रुखाबाद के विकासखंड बढ़पुर क्षेत्र के गांव अमेठी जदीद में 2012 से लेकर 2015 तक सरकार द्वारा 541 स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत सभी के घरो में बनाई जानी थी लेकिन ग्राम विकास अधिकारी शशि देव व प्रधान जियाउल रहमान ने मिलकर 168 लोगों के नाम कागजों पर चढ़ाकर पैसे हड़प लिए और लाभार्थी के घरों में शौचालय नहीं बनाये गए।जिसको लेकर जिलाधिकारी ने गांव में खुली बैठक बुलाई गई जिसमें 168 लोगों के नाम सूची में थे। उन लोगों के यहां शौचालय नही बनाये गए। जिसमे 26 पन्नों में जांच हुई। शौचालय घोटाला को लेकर ग्राम विकास अधिकारी को निलंबित कर दिया गया था लेकिन अभी तक प्रधान के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। जबकि जिलाधिकारी ने दोनों लोगों के खिलाफ एफआईआर के आदेश दिए थे।

ग्रमीणो का कहना है कि शौचालय बनाने के लिए अपने घर से पैसा लगाना पड़ रहा है। ग्राम प्रधान ने जो शौचालय बनबाए भी है उनकी लागत 6 हजार से ज्यादा नही है। 500 ईट, दो वोरी सीमेंट, गेट, चार फुट मौरंग, दो किलो सरिया इतना सामान लाभार्थी को दिया जा रहा है।

वर्तमान प्रधान पति इदरीश का कहना है कि गांव का प्रधान इसलिए चुना जाता है।कि जनता को सरकार द्वारा दिया गया सहयोग उसके पास तक पहुँच सके।मेरे शासन काल में सरकार द्वारा जितने भी शौचालय जनता के घरो में बनाने के लिए दिए गए मैंने सभी बनबा दिए है लेकिन गांव में कुछ खुराफाती तत्व है वह खुले में शौच करने से बाज नहीं आ रहे है।

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