पाकिस्तान की जेल से छूटकर एक साल बाद वतन पहुंचे फतेहपुर के तीन मछुआरे

Fatehpur, Uttar Pradesh, India
   पाकिस्तान की जेल से छूटकर एक साल बाद वतन पहुंचे फतेहपुर के तीन मछुआरे

गुजरात के ओखा में ठेकेदार के लिये मछली पकड़ते समय पाकिस्तानी क्षेत्र में चले गए थे मछुआरे।

फतेहपुर. भारतीयों के लिये जहन्नुम कही जाने वाली पाकिस्तान की जेल से एक साल बाद छूटकर फतेहपुर के सुजानपुर निवासी तीन मछुआरे शुक्रवार को घर वापस लौट आए। उन मछुआरों ने वापस लौटने पर अपने साथ हुई यातनाओं को बताया तो गांव के लोगों का कलेजा मुंह को आ गया। उनके साथ हुई ज्यादतियों से गांव के लोगों को दुख तो है पर खुशी इस बात की है कि अब वह वापस आ गए। उनकी वापसी के लिये ग्रामीणों और खुद मछुआरों व उनके परिजनो ने पीएम मोदी और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को धन्यवाद दिया। उनको अपने करीब देखकर परिजनों की आंखें छलक आयीं।


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सुजानपुर गांव के रहने वाले तीन मछुआरे प्रमोद कुमार, जितेन्द्र और धनीराम गुजरात के ओखा में एक ठेकेदार के लिये मछली पकड़ने का काम करते थे। करीब साल भर पहले मछली पकड़ते समय उन्हें नींद आ गयी और वह पाकिस्तान की सीमा में पहुंच गए। जब नींद खुली तो तो उन मछुआरों ने पाया कि वह 12/52 बार्डर को पार करके पाकिस्तान की सीमा में पहुंच चुके थे। तीनों ने बताया कि उन्हें पाक सेना ने घेर लिया और गिरफ्तार कर करांची ले जाया गया। करांची में उन्हें लॉड्रीजेल में कैद कर दिया गया। वहां उनके साथ लगातार सख्ती से पूछताछ की गयी। पूछताछ के दौरान इस कदर मारा पीटा गया कि तीनों उसे याद करके सिहर उठते। लगातार यातनाओं के साथ ही उन्हें भूखा रखा जाता था। उनकी मानें जो खाना दिया भी जाता था, वह इस लायक भी नहीं था कि उसे कुत्ते खा सकें। पर मजबूरी के चलते वह उस तरह का खाना खाने को मजबूर थे।


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मछुआरों के वतन लौटने पर उनके परिजनों ने कहा कि बेटों पाकिस्तान की जेल में बंद हो जाने के बाद उनके घर में कमाने वाला कोई नहीं बचा था। वह फाकाकशी जैसी स्थिति में पहुंच गए थे। अब जब तीनों लौट आए हैं तो एक बार फिर उनकी जिंदगी पहले जैसी होने की आस बंधी है। परिजनों ने कहा कि अब वह भूखे रह जाएंगे पर बेटों को रोजगार के लिये बाहर नहीं भेजेंगे।



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