इन कार्यों के लिए बहुत अच्छा है आज का दिन, आप भी करना न भूलें

Sunil Sharma

Publish: Jun, 20 2017 09:09:00 (IST)

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इन कार्यों के लिए बहुत अच्छा है आज का दिन, आप भी करना न भूलें

एकादशी नन्दा संज्ञक तिथि रात्रि 10.29 तक, तदन्तर द्वादशी भद्रा संज्ञक तिथि प्रारम्भ हो जाएगी

एकादशी नन्दा संज्ञक तिथि रात्रि 10.29 तक, तदन्तर द्वादशी भद्रा संज्ञक तिथि प्रारम्भ हो जाएगी। एकादशी तिथि में यज्ञोपवीत, विवाहादि मांगलिक कार्य, देवोत्सव, यात्रा, प्रवेश, अलंकार, गृहारम्भ व व्रतोपवास आदि कार्य तथा द्वादशी तिथि में सभी चर व स्थिर कार्य, विवाह, जनेऊ और अन्य मांगलिक कार्य शुभ कहे गए हैं। द्वादशी में तेल लगाना व यात्रा नहीं करना चाहिए।

नक्षत्र: अश्विनी 'क्षिप्र व तिर्यंकमुख' संज्ञक नक्षत्र अपराह्न 3.44 तक है। इसके बाद भरणी 'उग्र व अधोमुख' संज्ञक नक्षत्र है। अश्विनी नक्षत्र में यात्रा, औषध, अलंकार, विद्या, चित्रकारी व कलादि कार्य सिद्ध होते हैं। भरणी नक्षत्र में उग्र व अग्निविषादिक असद् कार्य, शत्रुवध व बंधन आदि कार्य करने योग्य हैं। योग: अतिगंड नामक नैसर्गिक अशुभ योग सायं 6.01 तक, तदन्तर सुकर्मा नामक नैसर्गिक शुभ योग है।

विशिष्ट योग: अमृत-सर्वार्थसिद्धि योग सूर्योदय से दिन के 3.44 तथा कुमार योग नामक शुभ योग, तदुपरान्त रात्रि 10.29 से राजयोग नामक शुभ योग है। करण: बव नामकरण पूर्वाह्न 11.50 तक, इसके बाद बालवादि करण हैं।

शुभ विक्रम संवत् : 2074
संवत्सर का नाम : साधारण
शाके संवत् : 1939
हिजरी संवत् : 1438
अयन : उत्तरायण
ऋतु : ग्रीष्म
मास : आषाढ़। पक्ष - कृष्ण।

शुभ मुहूर्त : आज विवाह कात्यायनोक्त, हलप्रवहण, उपनयन (अति आवश्यकता में), प्रसूतिस्नान तथा सगाई-सम्बंध, रोका व टीका आदि के अश्विनी नक्षत्र में शुभ मुहूर्त हैं।

श्रेष्ठ चौघडि़ए: आज प्रात: 9.04 से दोपहर बाद 2.13 तक क्रमश: चर, लाभ व अमृत तथा अपराह्न 3.55 से सायं 5.37 तक शुभ के श्रेष्ठ चौघडि़ए हैं एवं दोपहर 12.00 बजे से दोपहर 12.55 तक अभिजित नामक श्रेष्ठ मुहूर्त है, जो आवश्यक शुभकार्यारम्भ के लिए अत्युत्तम हैं।

व्रतोत्सव: आज योगिनी एकादशी व्रत सबका है। ग्रह राशि-नक्षत्र परिवर्तन: अंतरात्रि 4.36 पर वक्री शनि ज्येष्ठा नक्षत्र के चतुर्थ चरण में प्रवेश करेगा।

दिशाशूल: मंगलवार को उत्तर दिशा की यात्रा में दिशाशूल रहता है। चन्द्र स्थिति के अनुसार आज पूर्व दिशा की यात्रा लाभदायक व शुभप्रद है। चन्द्रमा: चन्द्रमा सम्पूर्ण दिवारात्रि मेष राशि में रहेगा। राहुकाल: अपराह्न 3.00 से सायं 4.30 बजे तक राहुकाल वेला में शुभकार्यारंभ यथासम्भव वर्जित रखना हितकर है।

आज जन्म लेने वाले बच्चे
आज जन्म लेने वाले बच्चों के नाम (चो,ला,लि,लू,ले,लो) आदि अक्षरों पर रखे जा सकते हैं। इनकी राशि मेष तथा जन्म का पाया स्वर्ण है। सामान्यत: ये जातक शुद्ध विचार वाले, धर्मपरायण, धनवान, सेवा-विनय में व्यस्त, विदेश यात्रा की चाह रखने वाले, जनप्रिय और यशस्वी होते हैं। अश्विनी नक्षत्र में जन्मे जातकों की नक्षत्र शांति (मूल शांति) करा लेना जातकों के हित में होगी। क्योंकि अश्विनी गंडमूल नक्षत्रों में है। इनका भाग्योदय लगभग 20 वर्ष की आयु तक हो जाता है। मेष राशि वाले जातकों को आज कुछ क्लेश व विवादों की स्थिति से गुजरना पड़ सकता है। अपने व्यवहार को विनम्र रखें। लाभ होगा।

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