ये राजा सोने की अशर्फियां बिछा कर खेलते थे होली, केसर से बनते थे रंग

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ये राजा सोने की अशर्फियां बिछा कर खेलते थे होली, केसर से बनते थे रंग

कई बार इतिहास में कुछ ऐसी बातें भी होती हैं जो जनता को बरबस अपनी ओर खींच ही लेती हैं

कई बार इतिहास में कुछ ऐसी बातें भी होती हैं जो जनता को बरबस अपनी ओर खींच ही लेती हैं। ऐसा ही कुछ नजारा जयपुर राज्य की होली का भी होता था। यहां के राजा माधोसिंह द्वितीय ने वर्ष 1903 में होली के त्योहार पर वृंदावन में ब्रह्मचारी मंदिर के गर्भ गृह आंगन में सोने की हजारों अशर्फियां बिछाकर दान की थीं। मंदिर के संत गोविंदराम महाराज ने टोंक रिसाले के सैनिक माधोसिंह को जयपुर का महाराजा बनने का आशीर्वाद दिया था।

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महाराजा द्वारा स्वर्ण अशर्फियां बिछाने की देश विदेश में खासी चर्चा रही। माधोसिंह होली का त्योहार उत्साह से मनाते। जनता के साथ होली खेलने के बाद वे जनाना महलों में महारानियों व पड़दायतों की महफिल में शामिल होते। रिकार्ड के मुताबिक वर्ष 1913 में माधोसिंह ने अपना अधिकांश समय जनाना महलों की होली के उत्सव में बिताया। उनकी इस महफिल में नृत्यांगनाएं संगीत व नृत्य की महफिल में चार चांद लगा देती। सतरंगी मदनोत्सव की रस भरी राजसी धुलण्डी पर गुलाल अबीर के रंगों की सुगंध का दरिया बह उठता। कामकाज के लिए भागती दावडिय़ों के रेशमी घाघरों की सरसराहट गलियारों में सुनाई देती।



पानी के हौज में रंग और केसर घुलती। गुलाल गोटे और पीतल की नक्काशीदार पिचकारियों व डोलचियों से आपस में रंग डालते। वर्ष 1914 की होली पर महाराजा के लिए 9 नई पड़दायतें बनाई गईं। दूसरी पड़दायतों व पासवानों को सोने-चांदी के आभूषण भेंट किए गए। रियासत के कर्मचारियों के वेतन में वृद्धि की घोषणा की गई। लालजी साहब गोपाल सिंह व गंगा सिंह को 50-50 हजार रुपए व छोटे लालजी साहब व आठ बाईजी लालों को दो-दो हजार रुपए की इनायत की।

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इतिहासकार नंद किशोर पारीक ने वर्ष 1914 की होली पर सुख निवास में हुए बड़े जलसे के बारे में लिखा है कि महाराजा माधोसिंह ने पड़दायत रूपरायजी को पांच हजार रुपए सालाना की आय का गांव व चेला रूपनारायण को गांव बख्शिश किया। बल्लभजी चेला और गोपीनाथजी का भी वेतन बढ़ा। खास मर्जीदान सेठ रामनाथ को एक गांव दे दिया। नायब रूपनारायण का वेतन 30 से बढ़ा 50 रुपए मासिक कर दिया।

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जयपुर फाउंडेशन के सियाशरण लश्करी के मुताबिक पहले महाराजा पर कोई रंग नहीं डाल सकता था। अंतिम शासक मानसिंह ने 13 मार्च 1941 को महाराजा पर भी गुलाल व गुलाल गोटे डालने फरमान जारी किया। महावीर नगर निवासी देवेन्द्र भगत ने बताया कि होली पर महाराजा की सुरक्षा में तीन सौ पुलिसकर्मी लगाए जाते। सवाई राम सिंह के समय 1876 में ग्वालियर महाराजा जियाजीराव सिंधिया होली खेलने जयपुर आए। उस समय भी ऐसा ही कुछ नजारा चारों तरफ बन गया था।

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