2 लाख से ज्यादा कैश लेन-देन पर लगेगा 100 फीसदी जुर्माना

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2 लाख से ज्यादा कैश लेन-देन पर लगेगा 100 फीसदी जुर्माना

केन्द्र सरकार कैश लेन-देन की सीमा 3 लाख से घटाकर 2 लाख करने जा रही है। इसके साथ ही 2 लाख रुपए से ज्यादा के कैश लेन-देन पर 100 फीसदी जुमार्ने का प्रावधान भी किया जा रहा है। 

नई दिल्ली. केन्द्र सरकार कैश लेन-देन की सीमा 3 लाख से घटाकर 2 लाख करने जा रही है। इसके साथ ही 2 लाख रुपए से ज्यादा के कैश लेन-देन पर 100 फीसदी जुमार्ने का प्रावधान भी किया जा रहा है। वहीं, 50 हजार रुपए से ज्यादा की कैश लेन-देन पर टैक्स लगाने की बात भी कही जा रही है। यानी केन्द्र सरकार के इस फैसले के बाद देश में किसी भी खरीदारी या लेन-देन में 2 लाख रुपए से ज्यादा का नकद का इस्तेमाल गैरकानूनी हो जाएगा। इसकी सानजारी रेवेन्यू सेक्रेटरी हसमुख अधिया ने दी है। गौरतलब है कि वर्ष 2017-18 के बजट में सरकार ने 3 लाख रुपए कैश लेन-देन की सीमा तय की थी। दरअसल, नकद लेन-देन की सीमा घटाकर सरकार कालेधन पर लगाम लगाना चाहती है। 
फाइनेंस बिल पास होते ही बन जाएगा कानून
केन्द्र सरकार ने फाइनेंस बिल में प्रस्ताव किया है कि मौजूदा 3 लाख रुपए कैश लेन-देन की सीमा को कम कर 2 लाख रुपए कर दिया जाए। प्रस्ताव के मुताबिक 2 लाख रुपए से अधिक नकद लेन-देन करते हुए पकड़े जाने पर 100 प्रतिशत का जुर्माना लगाया जाएगा। यानी यह जुर्माना 2 लाख रुपए से अधिक के लेन-देन वाली राशि के बराबर होगा। इसका मतलब ये हुआ कि अगर कोई खरीदार 2 लाख रुपए से ऊपर कैश खरीदारी करता है तो 2 लाख रुपए के ऊपर की रकम के बराबर जुर्माना देना होगा। फाइनेंस बिल संसद से पारित हो जाने के बाद कैश लेन-देन की सीमा 2 लाख रह जाएगी। यदि कोई व्यक्ति चार लाख रुपए नकद स्वीकार करते हैं तो उसे चार लाख रुपए का ही जुर्माना देना होगा। इसी तरह 20 लाख रुपए नकद लेने पर जुर्माना राशि 20 लाख रुपए होगी। यह जुर्माना उस व्यक्ति पर लगेगा जो नकद स्वीकार करेगा।

इसलिए सरकार ने किया बदलाव
आंध्र प्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू की अध्यक्षता में मुख्यमंत्रियों की समिति ने अपनी अंतरिम रिपोर्ट में एक सीमा से अधिक कैश लेनदेन पर रोक लगाने और 50,000 रुपए से अधिक के भुगतान पर कर लगाने की सिफारिश की है। वहीं, कालेधन पर रोक के लिए सुप्रीम कोर्ट की हिदायत पर बनी एसआइटी ने घर में नकदी रखने की भी अधिकतम सीमा पंद्रह लाख रुपए तय करने की सिफारिश की थी। बताया जा रहा है कि सरकार उस पर भी जरूरी विचार-विमर्श के बाद फैसला करेगी।

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