1600 वर्ष पुराने इस जैन मंदिर की अनोखी है कहानी, देखें वीडियो

Amit Sharma

Publish: Jun, 20 2017 05:55:00 (IST)

Firozabad, Uttar Pradesh, India
 1600 वर्ष पुराने इस जैन मंदिर की अनोखी है कहानी, देखें वीडियो

राजा चंद्रसेन द्वारा बनवाए गए चंद्रवाड़ मंदिर पर मोहम्मद गौरी ने हमला किया लेकिन उसका घमंड इस मजबूत मंदिर के सामने चूर-चूर हो गया।  

फिरोजाबाद। 300 वर्ष पहले फिरोजाबाद का नाम चन्द्रनगर था। जिसका राजा चन्द्रसेन था। राजा चन्द्रसेन जैन समाज से था। इसलिए उसने आज चन्द्रवाड़ के नाम से मशहूर पुराने फिरोजाबाद में भव्य जैन मंदिर का निर्माण कराया था। राजा चन्द्रसेन के शासन में यहां की जनता काफी प्रसन्न रहती थी। राजा चन्द्रसेन मूर्ति और साहित्य प्रेमी थे।

राजा ने बनवाए थे 51 जैन मंदिर
राजा चन्द्रसेन ने अपने कार्यकाल में 51 जैन मंदिर बनवाए थे। जहां जैन समाज के लोग पूजा अर्चना करने जाया करते थे। 1205 ईसवी में मोहम्मद गौरी की नजर इस शहर पर पड़ी तो उसने राजा चन्द्रसेन पर आक्रमण करने की योजना तैयार कर ली। मोहम्मद गौरी ने राजा चन्द्रसेन पर चढ़ाई कर दी और उन्हें हराकर अपना साम्राज्य स्थापित कर लिया।

तोड़ दिए जैन मंदिर

मोहम्मद गौरी ने राजा चन्द्रसेन द्वारा बनवाए गए जैन मंदिरों को तुड़वाना शुरू कर दिया था। इससे घबराए जैन श्रद्धालुओं ने मूर्तियों को मोहम्मद गौरी के हाथों से बचाने के लिए उन्हें जमीन में छिपा दिया था, जिससे वह मुहम्मद गौरी से बच सकें। गौरी ने उस दौरान नरसंहार किया था। जो भी उसकी बात मानने से इंकार करता, उसे मौत दे दी जाती थी।

मुस्लिम धर्म अपनाने को बनाया दबाव
मुुहम्मद गौरी ने यहां की प्रजा पर बहुत जुल्म ढ़ाए। गैर मुस्लिम लोगों को मुस्लिम धर्म अपनाने के लिए उन्हें प्रताड़ित किया गया। उस समय जिन लोगों ने मुस्लिम धर्म अपना लिया उन्हें छोड़ दिया गया औरर जिन्होंने मुस्लिम धर्म अपनाने से मना कर दिया। उनका कत्लेआम कर दिया गया। मोहम्मद गौरी की तानाशाही को देखते हुए वहां रह गए लोग चन्द्रवाड़ से पलायन कर गए थे।

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चूना और ककइया ईंटों से बना है जैन मंदिर
मोहम्मद गौरी के आतंक से चन्द्रवाड़ स्थित जैन मंदिर बच गया था। जिसमें आज भी जमीनों से निकलने वाली मूर्तियों को सुरक्षित रखा गया है। मंदिर के पुजारी पंकज जैन बताते हैं कि उस समय मोहम्मद गौरी से बचाने के लिए जिन मूर्तियों को जमीन में छिपाकर रखा गया था। वह मूर्तियां आज खुदाई में निकल आती हैं। खुदाई में निकलने वाली अधिकांश मूर्तियां खंडित हैं। जो सही होती हैं उन्हें मंदिर में रखवा दिया जाता है। पुजारी ने बताया कि इस मंदिर में कहीं भी लोहे का प्रयोग नहीं किया गया है। यह पूूरा मंदिर चूने की छत और ककइया ईंट से बना है जो काफी मजबूत है। पुुराना फिरोजाबाद चन्द्रवाड़ ही है।

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