भाजपा की बगावत से मिल सकता है सपा और बसपा को फायदा

Noida, Uttar Pradesh, India
भाजपा की बगावत से मिल सकता है सपा और बसपा को फायदा

इस बार नगर निगम चुनाव में पलट सकता है सत्ता 

गाजियाबाद। तीन तलाक में उलझी भारतीय जनता पार्टी के लिए अपने ही मुश्किल का सबब बनने वाले हैं। दिल्ली की तरह गाजियाबाद में भी अभी से नगर निगम चुनाव की हवा बहने लगी है। दिल्ली एमसीडी की तरह भाजपा नए लोगों को इस बार टिकट देने के मूड में है। इसकी वजह से कई पार्षद टिकट कटने पर विरोध का मूड बना रहे हैं। फिलहाल ऐसे नेताओं ने खुद को विक्लप मोड में रखा हुआ है। अगर भाजपा में कोई भी बगावत की स्थिति बनी तो इसका सीधा फायदा समाजवादी पार्टी और बसपा को मिल सकता है।

गाजियाबाद निगम पर सालों से रहा है बीजेपी का कब्जा

हॉटसिटी में पिछले 15 सालों से ¸भारतीय जनता पार्टी का कब्जा रहा है। मेयर से लेकर उपाध्याक्ष और पार्षदों की संख्या में भी अव्वल रही है। कई पार्षद ऐसे रहे हैं जिन्होंने विपरीत स्थिति में अपने वॉर्ड से शानदार जीत हासिल की है। इनमें मुकेश त्यागी, राजेन्द्र त्यागी, मनवीर नागर समेत कई ऐसे नाम शामिल हैं।

ओबीसी के लिए कराया जा रहा सर्वे

नगर निगम चुनाव को नीतिगत तरीके से कराने के लिए इन दिनों नगरीय क्षेत्र में ओबीसी वोटरों की संख्या को लेकर सर्वे कराया जा रहा है। निगम द्वारा कराए जा रहे सर्वे में ओबीसी के कितने वोटर्स किस वार्ड में कितने हैं
इसकी संख्या को तैयार करने का काम किया जा रहा है। 27 अप्रैल तक ओबीसी सर्वे का समस्त कार्य किया जाना है ।

ये रहेगा सीटों का समीकरण

निगम सदन में 33 फीसदी महिलाएं नगरीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करेंगी। निगम में 21 वार्ड अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित रहेंगे। जिसमें से  7 सीटें महिला अनुसचित जाति के लिए आरक्षित होंगी। 27 सीटें ओबीसी के लिए आरक्षित होंगी, जिसमें 9 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। इसी हिसाब से 52 सीटें सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित होंगी जिसमें 17 सीटें सामान्य महिलाओं के लिए आरक्षित रहेंगी। कुल 33 महिलाएं नगर निगम के सदन में नगरीय क्षेत्र की जनता का प्रतिनिधित्व करेंगी।

सिम्बल पर चुनाव लड़ेगी सपा और बसपा

विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद सपा और बसपा इस बार सिंबल के दम पर मैदान में उतरेगी। समाजवादी पार्टी की तरफ से इसके चलते बैठक और आवेदन प्रकियाओं का दौर भी शुरू कर दिया गया है। जबकि बसपा की तरफ से फिलहाल जमीनी स्तर पर इसके लिए काम किया जा रहा है। आलाकमान की हरी झंडी के बाद में बसपा भी इस बार सिंबल पर चुनाव लड़ेगी।

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