किसानों की बल्ले-बल्ले, मिलेगा दोगुना मुआवजा

Ghaziabad, Uttar Pradesh, India
किसानों की बल्ले-बल्ले, मिलेगा दोगुना मुआवजा

सुप्रीम कोर्ट ने सहारा समूह की 281 एकड जमीन के मामले ​में दिया फैसला

गाजियाबाद। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) द्वारा मधुबन बापूधाम आवासीय  योजना के लिए अग्रहित की जाने वाली किसानों और सहारा समूह की जमीन के मामले में अब नया मोड़ आ गया है। सुप्रीमकोर्ट में किसानों की ओर से अधिग्रहण को  चुनौती देने वाली याचिका के मामले में दोनों को ही कोई खास राहत सुप्रीमकोर्ट से नहीं मिल पाई। सुप्रीमकोर्ट की कोर्ट नंबर पांच के जस्टिस गोगोई ने किसानों की  याचिका सुनवाई करते हुए कहा कि जिन किसानों द्वारा याचिका दायर की गई है।

उन किसानों और मधुबन बापूधाम योजना के बीच में आने वाली सहारा समूह की जमीनों को जीडीए वापस नहीं करेगा, बल्कि जीडीए किसानों को नए भूमि अधिग्रहण बिल के आधार पर दोगुने रेट पर जमीनों का मुआवजा देकर खरीद सकेगा। मधुबन-बापूधाम में किसानों की 191 एकड़ और सहारा समूह की 90 एकड़ जमीन को मिलाकर 281 एकड़ जमीन का मामला सुप्रीमकोर्ट में लंबित चल रहा था। जीडीए द्वारा मधुबन बापूधाम  के लिए धारा-4 व धारा-6 के तहत अधिग्रहण की कार्रवाई की गई हैं।

वापस नहीं होगी जमीन

सुप्रीमकोर्ट ने धारा-4 की पूर्व की कार्रवाई को आधार माना है सुप्रीमकोर्ट के इस आदेश से किसान जहां ज्यादा मुआवजा मिलने की उम्मीद से थोड़ी राहत महसूसकर रहे है, वहीं जीडीए को थोड़ी राहत जरूर मिल गई है। कोर्ट के इस आदेश के बाद चौंकाने वाली बात यह है कि अगर जीडीए द्वारा किसानों व सहारा समूह की जमीन नहीं खरीदी जाती है तो वह अपनी जमीन दूसरे किसी व्यक्ति को भी नहीं बेच सकेंगे। जीडीए इस जमीन को वापिस नहीं करेगा। जीडीए के पास हालांकि खबर लिखे जाने तक सुप्रीमकोर्ट का फाइनल आदेश नहीं पहुंच पाया था।

क्या था पूरा मामला

जीडीए द्वारा वर्ष-2004 में मधुबन बापूधाम आवासीय योजना के लिए पांच गांव  सदरपुर, दुहाई, मटियाला, नंगला पाठ व मोरटा गांव की मिलाकर 1,234 एकड़ जमीन अधिग्रहण करने की कवायद शुरु की गई। जीडीए द्वारा वर्ष-2006 में धारा-4 और   बाद में धारा-6 की कार्रवाई की। किसानों ने ज्यादा मुआवजा देने की मांग को लेकर खूब धरना-प्रदर्शन किए। किसानों के इस आंदोलन के चलते एक किसान की मौत भी हो गई थी।

76 किसानों ने दायर की थी एसएलपी

जीडीए द्वारा उस वक्त 1100 रुपये प्रति वर्ग मीटर का रेट घोषित किया था इसके बाद इस जमीन का अवार्ड घोषित किया गया। जीडीए द्वारा किसानों की अधिग्रहित की जाने वाली जमीनों के अधिग्रहण को किसानों ने पहले हाईकोर्ट में चुनौती दी उसके बाद  सुप्रीमकोर्ट में चुनौती दी। सुप्रीमकोर्ट में वर्ष-2010 में 76 किसानों ने एसएलपी दायर कर दी। जिन किसानों द्वारा यह याचिका दायर की गई। उनकी करीब 191 एकड़ जमीन का मामला है। इसके अलावा सहारा समूह की 90 एकड़ जमीन को मिलाकर कुल 281 एकड़ जमीन शामिल हैं।

जीडीए की मधुबन-बापूधाम


योजना 1234 एकड़ जमीन पर विकसित होनी है, लेकिन इसमें से जीडीए अभी तक करीब 750 एकड़ जमीन पर ही कब्जा लेने में सफल रहा है। जीडीए के विधि अधीक्षक राजेंद्र त्यागी का कहना है कि 281 एकड़ जमीन का मामला सुप्रीमकोर्ट में पिछले छह साल से चल रहा था। सुप्रीमकोर्ट ने अब याचिका पर सुनवाई करते हुए नए भूमि अधिग्रहण एक्ट के तहत किसानों को जमीन का मुआवजा देने के आदेश दिए हैं।

जमीन बेच नहीं पाएंगे किसान


जीडीए उपाध्यक्ष विजय यादव के मुताबिक सुप्रीमकोर्ट में किसानों की ओर से दाखिल याचिका पर कोर्ट के जस्टिस गोगोई ने जीडीए को नए एक्ट से किसानों को मुआवजा देने के आदेश दिए है। हालांकि सुप्रीमकोर्ट के आदेश की प्रति अभी प्राप्त नहीं हुई है। किसानों से इस संबंध में जल्द ही वार्ता की जाएगी। कोर्ट ने पूर्व की धारा-4 को  आधार मानते हुए किसानों और सहारा समूह की जमीन कानए एक्ट से जमीन खरीदने के आदेश दिए है। इस जमीन को किसान फिलहाल बेच नहीं पाएंगे।

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