परिवार कल्याण केन्द्र में भूसा रखते हैं ग्रामीण

Ghazipur, Uttar Pradesh, India
 परिवार कल्याण केन्द्र में भूसा रखते हैं ग्रामीण

गाजीपुर जिला के रेवतीपुर ब्लाक में बने परिवार कल्याण उपकेन्द्र सरकारी उपेक्षा का शिकार 

गाजीपुर. सरकार आमजन को राहत देने और खासकर ग्रामीण ईलाकों में रहने वाली आम महिलाओं व गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ को बेहतर करने के लिये अनेक कवायद करती है। लेकिन विभागीय उपेक्षा के कारण योजनाएं शुरू होने से पहले ही बदहाली की भेट चढ़ जाती हैं। ऐसा ही एक मामला गाजीपुर जिले के रेवतीपुर ब्लाक के रेवतीपुर ग्रामसभा में बने परिवार कल्याण उपकेन्द्र का भवन है, जहां लाखों रुपये खर्च हो जाने के बाद भी दस साल से कोई विभागीय कार्य नहीं हो सका। सरकारी उपेक्षा के शिकार इस परिवार कल्याण उपकेन्द्र में विभागीय कार्य होने के बजाय स्थानीय लोग उसमे उपले और भूसा रख अपना कब्जा जमाये हैं। वहीं, इस बाबत संबंधित अधिकारी कहते हैं कि कार्यदायी संस्था ने अब तक भवन हैंडओवर नहीं किया है, इसलिए यहां काम शुरू नहीं हो सका। 




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बसपा सरकार में तत्कालीन स्थानीय विधायक के प्रस्ताव पर रेवतीपुर ग्राम में तीन परिवार कल्याण उपकेन्द्र बनाने का कार्य कराया गया। विभाग ने इन भवनों को लैक्फेड के द्वारा बनवाना आरम्भ किया, जिससे आने वाले समय में इस गांव के साथ ही आसपास के गांवो की रहने वाली गर्भवती महिलाओं व बच्चों का टिकाकरण आसानी से कराया जा सके। भवन बनकर एनआरएचएम के तहत तैयार हुआ। लेकिन उसी सरकार में एनआरएचएम में बड़ा घोटाला आने के बाद स्वास्थ विभाग के द्वारा कराये गये कार्य जांच के दायरे में आ गये। इसके बाद निर्माणदायी संस्था ने उक्त भवन को विभाग को हैण्डओवर नहीं किया। जिसके चलते बने तीन भवनों में से दो तो गिर चुके हैं। 


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वहीं, रेवतीपुर प्रथम के नाम से बना भवन जिसमें आज स्थानीय लोगों ने अतिक्रमण कर उसमें अपने उपले और भूसा रखना आरम्भ कर दिये हैं। स्थानीय लोगों से जब इस अतिक्रमण के बारे में जानने का प्रयास किया तो उनका कहना था की निर्माणदायी संस्था जब विभाग को हैण्डओवर नहीं किया और विभाग ने इसकी आजतक सुध नहीं लिया तो आस पास के लोगों ने अपनी सुविधा के लिये अपने कार्य में प्रयोग करना आरम्भ कर दिया।






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इस इस बाबत प्रभारी मुख्य चिकित्साधिकारी डाॅ. आरके सिन्हा ने कहा कि लैक्फेड के द्वारा उन भवनों को बनाया गया था, लेकिन हैण्डओवर नहीं किया। उन्होंने बताया कि हैंडओवर न करने पर विभाग की ओर से लैक्फेड के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज कराया गया था। प्रभारी सीएमओ ने कहा कि भविष्य में हम दूसरे संस्था से उसका निर्माण करा के अपने प्रयोग में लेंगे।






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