नोटबंदी की मार, वेतन और पेंशन के बैंकों में लगी लम्बी कतारें, एटीएम ने दिया धोखा

Gorakhpur, Uttar Pradesh, India
नोटबंदी की मार, वेतन और पेंशन के बैंकों में लगी लम्बी कतारें, एटीएम ने दिया धोखा

लाइन में लगे लोगों को सता रहा डर, कहीं उनका नम्बर आने तक खत्म न हो जाए पैसे

गोरखपुर. मिर्जापुर गांव के विजय पाण्डेय रिटायर हो चुके हैं। गुरुवार को उनके खाते के पेंशन पोस्ट हो गया। चलने फिरने में असमर्थ श्री पाण्डेय घर के एक सदस्य के संग किसी तरह बैंक पहुंचे थे। सुबह से अपनी बारी आने का इंतज़ार कर रहे लेकिन घंटों बीतने के बाद उनकी बारी नहीं आई थी। सुबह से लाइन में लगे इस बुजुर्ग को डर सता रहा कि कहीं उनकी बारी आने तक पैसा ख़त्म न हो जाये। 




गढ़वा महादेव के रहने वाले संजय मौर्य सेना में हैं। श्रीनगर में पोस्टेड हैं। कई दिनों तक महाबीर छपरा स्थित अपने बैंक शाखा पर दौड़ते रहे लेकिन नो कैश की वजह से पैसा नहीं मिला। वहां कर्मियों ने मेन ब्रांच जाने की सलाह दी। शुक्रवार की सुबह वह मेन ब्रांच पहुंचे। घंटों लाइन में लगे रहे, जब बारी आई तो बैंक ने पैसे देने से मना कर दिया। दो दिन बाद इनको श्रीनगर रिपोर्ट करनी है, समझ नहीं पा रहे क्या करें। हालांकि, जब वह बैंक के सहायक प्रबंधक अमर सिंह से मिले तो अगले दिन बुलाया गया है। 



ये स्थितियां करीब करीब हर बैंकों की है। नोटबंदी ने पूरा जनजीवन अस्तव्यस्त कर दिया है। शुक्रवार को स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया के मेन ब्रांच में सुबह से ही कतारें लगनी शुरू हो गई थी। इन कतारों में थोडा अंतर ये था कि इसमें बुजुर्गों की संख्या आमदिनों से अधिक थी। नौकरीपेशा लोग भी ठीक ठाक संख्या में लाइन में दिखे। बाहर एटीएम का शटर डाउन था फिर भी दोपहर तक लोग इस इंतज़ार में लाइन में थे कि पैसा पड़ जाए और उनकी कतार में खड़े होने की तपस्या शायद फलदायी साबित हो।



बैंक के भीतर लाइन में खड़े सेना के सेवानिवृत्त नायब सूबेदार पुरुषोत्तम पाण्डेय 70 साल की उम्र में पेंशन लेने के लाइन में लगे थे। 1971 का युद्ध लड़ चुके श्री पाण्डेय बेलीपार से चलकर आये हैं। हालांकि, कई घंटों की मेहनत के बाद उनको पैसा मिल गया। लेकिन श्री पाण्डेय की तरह बांसगांव से ही आई शारदा देवी (55) भाग्यशाली नहीं। कुछ दिनों बाद लड़की की शादी है। कई दिनों तक अपने नज़दीकी शाखा पर लाइन लगाती रहीं। जब वहां पैसे नहीं मिले तो sbi मेन ब्रांच आईं। सुबह से लाइन में लगने के बाद धन की कमी की वजह से लौटा दिया गया। 



सहायक प्रबंधक अमर सिंह बताते हैं कि 220 करोड़ का डिमांड भेजा गया है। इस ब्रांच पर कम से कम 10 करोड़ रुपये प्रतिदिन चाहिए लेकिन दो दिन से एक भी पैसा नहीं मिला। उन्होंने बताया कि आज सैलरी और पेंशन वाले भी बहुत हैं। उनके लिए एक्स्ट्रा काउंटर खोल दिया है लेकिन ब्रांच में केवल 5 करोड़ रुपये है जो सुबह से बांटा जा रहा।

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