जब सपा मुखिया को उनके अति करीबी ने दी थी चुनौती

Gorakhpur, Uttar Pradesh, India
जब सपा मुखिया को उनके अति करीबी ने दी थी चुनौती

मुलायम सिंह सभा को संबोधित कर रहे थे और लोग बालेश्वर के लिए चंदा जुटा रहे थे

गोरखपुर.  बात 2004 की है। लोकसभा चुनाव चल रहे थे। सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव पूरे जोश के साथ चुनावी जनसभाओं को कर रहे थे। पडरौना के जूनियर हाईस्कूल मैदान में उनकी चुनावी जनसभा थी। मुलायम सिंह जब सभा को संबोधित करने लगे तो जनता के बीच से अचानक से जयकार की बजाय हूटिंग होने लगी। दर्जनों लोग हाथ में चप्पल,जूते लहराने लगे। एक कार्यकर्ता ने गमछा ज़मीन पर बिछाया और वहां चन्दा इकठ्ठा किया जाने लगा। 

यह चन्दा पूर्व सांसद बालेश्वर यादव के लिए एकत्र किया जा रहा था। यह वही बालेश्वर यादव हैं जो मुलायम सिंह के मुख्यमंत्रित्व काल में मिनी मुख्यमंत्री के नाम से जाने जाते थे। बालेश्वर निर्दल चुनाव मैदान में उतरे और जनता ने जोरदार समर्थन किया और वह 2004 में चार बार सांसद रहे भाजपा के रामनगीना मिश्र, पूर्व केंद्रीय मंत्री आरपीएन सिंह को शिकस्त देकर निर्दल सांसद बने। इस चुनाव में सपा प्रत्याशी रामअवध यादव को बेहद कम वोट मिले। 

हालांकि, बालेश्वर से सपा मुखिया ज्यादा दिन नाराज नहीं रह सके और कुछ साल बाद ही पार्टी में शामिल भी करा लिया।

पूर्व सांसद बालेश्वर यादव की राजनैतिक शुरुआत छात्र राजनीति से है। 1964 में बीआरडीपीजी कॉलेज देवरिया के छात्रसंघ महामंत्री बने थे। समाजवादी राजनीति से अपनी शुरुआत की। देवरिया जिले के रुद्रपुर में 24 दिसंबर 1941 को जन्में बालेश्वर 1980 में पहली बार पडरौना विधानसभा से लोकदल के बैनर से चुनाव लड़े लेकिन हार गए। 
1985 में मुलायम सिंह यादव की विशेष कृपा से उनको टिकट मिला और पडरौना से पहली बार विधायक चुने गए। 

इसके बाद वह मुलायम सिंह के करीबियों में गिने जाने लगे। 1989 में जनता दल से पडरौना के सांसद बने। जब सपा मुखिया मुख्यमंत्री तो यह मिनी मुख्यमंत्री के नाम से जाने जाने लगे। समाजवादी पार्टी से 1993 में पडरौना से दुबारा विधायक चुने गए। समाजवादी पार्टी के गठन के बाद देवरिया के जिलाध्यक्ष बने। वर्ष 2004 में तत्कालीन जिलाध्यक्ष राम अवध यादव को सपा ने पडरौना से लोकसभा का टिकट थमा दिया तो बगावत का बिगुल बजा दिया और जनता ने सपा मुखिया को हराने के लिए इनको समर्थन दिया। 

जीतने के बाद बीच में उन्होंने बसपा और कांग्रेस का दामन भी थाम लिया। वर्ष 2009 में बालेश्वर यादव ने देवरिया लोकसभा से कांग्रेस के प्रत्याशी रहे। इसमें बसपा प्रत्याशी गोरखप्रसाद जायसवाल ने जीत दर्ज की थी। विधानसभा चुनाव 2012 के पूर्व सपा में वापसी की। उस समय मुलायम सिंह यादव ने उन्हें दुर्दिन का साथी बताया था। विधानसभा चुनाव में पडरौना से सपा ने उनके पुत्र बबलू यादव को टिकट थमाया लेकिन हार का सामना करना पड़ा। 2014 के लोकसभा में देवरिया से सपा से बालेश्वर यादव प्रत्याशी हुए लेकिन हार गए। इस बार विधानसभा में उनके बेटे पर सपा ने दुबारा भरोसा जताते हुए प्रत्याशी बनाया है। 

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